विपक्ष बौखलाहट में और मुद्दाविहीन, चर्चा से भागने के बजाय संसद में रखें अपनी बात: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय


रायपुर 23 जुलाई । छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष पर जोरदार हमला बोलते हुए कहा है कि कांग्रेस सहित पूरा विपक्ष इस समय गहराती बौखलाहट में है और पूरी तरह मुद्दाविहीन हो चुका है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि जब सरकार हर विषय पर खुले मन से चर्चा कराने को तैयार है, तो विपक्ष को सदन की कार्यवाही बाधित करने या भागने का बहाना नहीं ढूंढना चाहिए।
समाचार माध्यमों से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने विपक्ष के रवैये पर गहरी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा, “कांग्रेस और पूरे विपक्ष के पास आज जनता से जुड़ा कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है। वे केवल राजनीतिक तमाशा खड़ा करने की कोशिश कर रहे हैं। जब सरकार हर एक विषय पर नियमसंगत चर्चा के लिए तैयार है, तो विपक्ष को चर्चा से भागना नहीं चाहिए।”

लोकतंत्र में संसद से बड़ा कोई मंच नहीं

मुख्यमंत्री ने लोकतांत्रिक मूल्यों और संसदीय मर्यादा का उल्लेख करते हुए कहा कि किसी भी मुद्दे पर सार्थक और परिणामकारक चर्चा के लिए संसद और विधानसभाओं से बेहतर कोई मंच नहीं हो सकता।
उन्होंने विपक्ष को नसीहत देते हुए कहा कि यदि विपक्ष के पास वास्तव में देश और प्रदेश के हित में कहने के लिए कुछ है, तो उसे सड़क पर हंगामा करने के बजाय सदन के भीतर अपनी बात रखनी चाहिए। लोकतंत्र में जनता के प्रश्नों का समाधान और नीतियों का विश्लेषण उच्च सदन के भीतर ही संभव है, लेकिन विपक्ष चर्चा से कतराकर अपनी जवाबदेही से भाग रहा है।

विशेष टिप्पणी: राजनीतिक ड्रामे से नहीं, रचनात्मक संवाद से मजबूत होता है लोकतंत्र

संपादकीय दृष्टिकोण:
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का यह वक्तव्य भारतीय राजनीति के उस कड़वे सच को उजागर करता है, जहाँ अक्सर जनहित के मुद्दों को संसदीय चर्चा के बजाय राजनीतिक ड्रामे की बलि चढ़ा दिया जाता है। लोकतंत्र में विपक्ष की भूमिका केवल विरोध दर्ज कराना ही नहीं, बल्कि एक सजग और सतर्क पहरेदार के रूप में सदन के भीतर सरकार को घेरना और ठोस सुझाव देना भी है।
जब सरकार स्वयं हर मुद्दे पर संवाद के लिए मंच दे रही है, तब सदन का बहिष्कार करना या शोर-शराबा करके समय नष्ट करना विपक्ष के खुद ‘मुद्दाविहीन’ होने पर मुहर लगाता है। जनता अपने प्रतिनिधियों को संसद और विधानसभाओं में बहस करने और समाधान निकालने के लिए भेजती है, न कि चर्चा से भागने के लिए। संसदीय गरिमा को बनाए रखते हुए सदन में सार्थक बहस ही लोकतंत्र की असली ताकत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *