- 139 बालक और 72 बालिकाओं को सुरक्षित रेस्क्यू कर परिजनों के हवाले किया गया
- 654 खोए बैग, लैपटॉप और मोबाइल ढूँढकर आरपीएफ ने जीता यात्रियों का भरोसा
- 139 हेल्पलाइन और चौबीसों घंटे की चौकसी से सुरक्षित बन रहा रेल सफर
विशेष संवाददाता
रायपुर/बिलासपुर 23 जुलाई ।
भारतीय रेलवे की सुरक्षा बल (आरपीएफ) अब केवल पटरियों और ट्रेनों की रखवाली तक सीमित नहीं है, बल्कि ‘सुरक्षा, सेवा और संवेदनशीलता’ के मूल मंत्र के साथ सामाजिक सरोकार की एक नई इबारत लिख रही है। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) में आरपीएफ के जवानों ने अपनी तत्परता और मानवीय दृष्टिकोण से यह साबित कर दिया है कि वे संकट के हर मोड़ पर यात्रियों के सबसे भरोसेमंद साथी हैं।
वर्ष 2026 में 1 जनवरी से 21 जुलाई के बीच चलाए गए विशेष अभियानों ने आरपीएफ की कार्यप्रणाली पर जनता के विश्वास को और गहरा कर दिया है।

1. ‘ऑपरेशन नन्हें फरिश्ते’: 211 मासूमों को मिला नया जीवन
घर से भागे, भटके या बिछड़े बच्चों के लिए आरपीएफ का ‘ऑपरेशन नन्हें फरिश्ते’ किसी वरदान से कम साबित नहीं हो रहा है। चालू वर्ष में आरपीएफ की सतर्क टीमों ने विभिन्न स्टेशनों और ट्रेनों से 211 नाबालिग बच्चों (139 बालक और 72 बालिकाएं) को असुरक्षित स्थितियों से सकुशल रेस्क्यू किया।

कैसे मिलता है सहारा?
ट्रेनों और प्लेटफॉर्मों पर मुस्तैद महिला व पुरुष आरपीएफ कर्मी संदिग्ध या अकेले दिख रहे बच्चों को अपनी कस्टडी में लेते हैं। वैधानिक प्रक्रिया पूरी कर उन्हें बाल कल्याण समिति (CWC) और अधिकृत स्वयंसेवी संस्थाओं के सहयोग से उनके बिलखते परिजनों तक पहुँचाया जाता है।2. ‘ऑपरेशन अमानत’: ईमानदारी से लौटाया ₹1.58 करोड़ का सामान
सफर के दौरान अक्सर यात्री जल्दबाजी या भूलवश अपना कीमती सामान ट्रेनों में या स्टेशनों पर छोड़ देते हैं। आरपीएफ की ईमानदारी और त्वरित कार्रवाई का प्रमाण है ‘ऑपरेशन अमानत’।
- कुल बरामदगी: 654 कीमती सामान (लैपटॉप, मोबाइल, पर्स, जेवरात और बैग)।
- कुल अनुमानित मूल्य: ₹1,58,01,814 (एक करोड़ अट्ठावन लाख एक हजार आठ सौ चौदह रुपये)।
- नतीजा: सभी सामान उनके वास्तविक मालिकों को खोजकर पूरी सुरक्षा के साथ सुपुर्द किए गए।
3. हर मोर्चे पर मुस्तैद: सुरक्षा का त्रिस्तरीय चक्र
अभियान / सुरक्षा व्यवस्था कार्य प्रणाली और प्रभाव महिला सुरक्षा महिला आरपीएफ कर्मियों की विशेष तैनाती और समर्पित महिला हेल्पलाइन। रात का पहरा (नाइट एस्कॉर्ट) रात्रिकालीन एवं अतिसंवेदनशील ट्रेनों में नियमित एस्कॉर्टिंग से अपराधों पर अंकुश। डिकॉय टास्क फोर्स जहरखुरानी, पॉकेटमारी और सामान चोरी रोकने के लिए सादे कपड़ों में पैनी नजर। त्वरित हेल्पलाइन (139) किसी भी आपात स्थिति या शिकायत पर चंद मिनटों में सीधी कार्रवाई। आम जनता और यात्रियों से आरपीएफ की अपील
दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे आरपीएफ प्रशासन ने सभी यात्रियों और नागरिकों से सजग रहने की अपील की है।
“यदि रेलवे स्टेशन या ट्रेन में कोई बच्चा असहाय या अकेला दिखे, कोई लावारिस बैग/सामान मिले या कोई संदिग्ध गतिविधि नज़र आए, तो तुरंत रेलवे हेल्पलाइन 139 पर कॉल करें या निकटतम आरपीएफ जवान को सूचित करें। आपकी एक सतर्कता किसी बिछड़े बच्चे को उसका परिवार दे सकती है।“
