अंधेरा चीरकर ‘सोलर दीदी’ ला रहीं रोशनी: देश का पहला राज्य बना छत्तीसगढ़, ‘द्वीप्ति’ योजना से ग्रामीण महिलाएं बन रहीं सौर ऊर्जा उद्यमी

50 हजार हरित रोजगार और प्रधानमंत्री के ‘लखपति दीदी’ विजन को साकार कर रही राज्य सरकार की यह अनूठी पहल

24 जुलाई रायपुर।
दिनांक: 24 जुलाई 2026
छत्तीसगढ़ ने देश में ग्रामीण महिला सशक्तिकरण और हरित ऊर्जा (Green Energy) के क्षेत्र में एक नया इतिहास रच दिया है। प्रदेश की ग्रामीण महिलाएं अब केवल सरकारी योजनाओं की ‘लाभार्थी’ नहीं हैं, बल्कि वे सौर ऊर्जा के क्षेत्र में विक्रेता, तकनीशियन, प्रबंधक और सफल उद्यमी के रूप में अपनी नई पहचान गढ़ रही हैं।
राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी ‘द्वीप्ति’ (DWEEPTI) योजना ने महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को स्वच्छ ऊर्जा विस्तार से जोड़कर एक अभूतपूर्व क्रांति का शंखनाद किया है। इसके साथ ही, महिला नेतृत्व वाली विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा नीति लागू करने वाला छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य बन गया है।

क्या है ‘द्वीप्ति’ (DWEEPTI) योजना?

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा तकनीकी सहयोगी संस्था ‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया’ के साथ मिलकर ग्रीन इकोनॉमी ट्रांजिशन मिशन के तहत इस नीति को विकसित किया गया है। द्वीप्ति का पूर्ण रूप ‘डिसेंट्रलाइज्ड वूमेन एम्पावरमेंट ऑन एनर्जी एंड पॉलिसी फॉर ट्रांसफॉर्मेटिव इन्क्लूजन’ है।
इस योजना का मूल उद्देश्य स्व-सहायता समूहों (SHG) की महिलाओं को सौर ऊर्जा प्रणाली की स्थापना, संचालन और रखरखाव के लिए तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है, ताकि वे अपने ही गांवों में ‘सोलर दीदी’ के रूप में अपनी सेवाएं दे सकें।

‘सोलर दीदी’ की नई फौज और पीएम सूर्य घर योजना से जुड़ाव

योजना के तहत छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड (CSPDCL) और जिला प्रशासनों के सहयोग से 12 जिलों के 13 संकुल स्तरीय संघों (CLF) को सीधे ‘प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना’ के अधिकृत विक्रेता (Vendor) के रूप में पंजीकृत कर लिया गया है।
सौर ऊर्जा प्रणाली को अधिक से अधिक घरों तक पहुंचाने के लिए स्व-सहायता समूहों से जुड़े परिवारों को आसान किश्तों पर ऋण (Loan) भी उपलब्ध कराया जा रहा है। यह वित्तीय मॉडल स्वच्छ ऊर्जा के साथ-साथ महिला उद्यमों को एक टिकाऊ व्यवसाय दे रहा है।

नेतृत्व का विजन: लाभार्थी से उद्यमी तक का सफर

यह योजना मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की उस व्यापक सोच का परिणाम है, जिसमें वे लगातार स्व-सहायता समूहों के माध्यम से महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करने पर जोर देते रहे हैं। वहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री विजय शर्मा का मानना है कि सामुदायिक संस्थाएं ही सतत ग्रामीण विकास का असली आधार हैं।
पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के सचिव श्री भीम सिंह ने इस बदलाव को रेखांकित करते हुए कहा, “अब तक अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका केवल लाभार्थी तक सीमित थी। ड्वीप्टि योजना ने इस रूढ़िवादी सोच को तोड़ा है। यह पहल प्रधानमंत्री के ‘लखपति दीदी’ विजन को साकार करने की दिशा में मील का पत्थर है।”

कबीरधाम बना रोल मॉडल: धरातल पर उतरी योजना

द्वीप्ति योजना केवल कागजों तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीन पर इसके शानदार परिणाम दिखने लगे हैं। कबीरधाम इस पहल को सफलतापूर्वक लागू करने वाले शुरुआती जिलों में अग्रणी बनकर उभरा है।

  • पहली टीम तैयार: CSPDCL-RAPM और जिला पंचायत कबीरधाम (बिहान) के सहयोग से ‘वंदे मातरम् क्लस्टर लेवल फेडरेशन, कवर्धा’ को अधिकृत सोलर वेंडर बनाया गया है। टाटा (Tata) के तकनीकी सहयोग से 35 महिलाओं को विशेष प्रशिक्षण देकर जिले की पहली ‘सोलर दीदी’ टीम तैयार कर ली गई है।
  • पहला प्लांट स्थापित: योजना का पहला रूफटॉप सोलर संयंत्र कबीरधाम जिले के समनापुर गांव में स्थापित किया गया है।

🗣️ “आजीविका का नया रास्ता खुल गया है”
“इस कार्य ने हमारे लिए आजीविका का नया रास्ता खोला है। हमें गर्व है कि अब स्व-सहायता समूहों की महिलाएं स्वयं सोलर सिस्टम स्थापित कर रही हैं। इससे यह विश्वास बढ़ा है कि यह अनेक ग्रामीण महिलाओं के लिए स्थायी आय का मजबूत माध्यम बन सकता है।”
— श्रीमती अंजनी पटेल (प्रशिक्षित सोलर दीदी एवं सदस्य, माता भवानी स्व-सहायता समूह, समनापुर)

कबीरधाम कलेक्टर श्री गोपाल वर्मा ने इसे आजीविका संवर्धन और अक्षय ऊर्जा का सबसे सफल मॉडल बताया। वहीं, जिला पंचायत सीईओ श्री अभिषेक अग्रवाल ने जानकारी दी कि अब तक कबीरधाम जिले में रूफटॉप सोलर सिस्टम लगाने के 40 से अधिक ऑर्डर प्राप्त हो चुके हैं और कई संयंत्र सफलता से स्थापित भी कर दिए गए हैं।

📊 एक नजर में ‘द्वीप्ति’ योजना के अगले 5 वर्षों के महा-लक्ष्य

लक्ष्य का क्षेत्रनिर्धारित आंकड़ेप्रभाव
महिला उद्यम5,000ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं के स्वामित्त्व वाले नए व्यवसाय।
हरित रोजगार50,000गांव-गांव में ग्रीन जॉब्स (तकनीशियन, रखरखाव) का सृजन।
स्वच्छ ऊर्जा पहुंच5 लाख परिवारलाखों घरों को सस्ती और निर्बाध सौर बिजली।
संस्थान कवरेज10,000 संस्थानसरकारी और निजी संस्थानों का सौर ऊर्जा से विद्युतीकरण।
निष्कर्ष: द्वीप्ति योजना सिर्फ एक सरकारी नीति नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण का वह सूर्योदय है, जिसकी रोशनी आने वाले समय में पूरे देश को राह दिखाएगी। आसान वित्तीय व्यवस्था और प्रशिक्षित ‘सोलर दीदी’ का यह मॉडल अब पूरे राज्य में व्यापक स्तर पर लागू होने के लिए तैयार है।

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