माओवाद के गढ़ में स्वास्थ्य की नई किरण: तर्रेम आयुष्मान आरोग्य मंदिर को मिला राष्ट्रीय ‘NQAS’ प्रमाण-पत्र

रायपुर/बीजापुर 5 मई | बीजापुर जिले का उसूर विकासखंड, जो कभी अपनी संवेदनशीलता और माओवादी प्रभाव के कारण विकास की मुख्यधारा से कटा हुआ था, आज अपनी स्वास्थ्य सुविधाओं के दम पर देश के मानचित्र पर चमक रहा है। तर्रेम स्थित ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ ने अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के लिए केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा प्रतिष्ठित राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) प्रमाणन हासिल कर एक नई मिसाल पेश की है।

88.19% अंकों के साथ मिली सफलता

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की टीम द्वारा 16 फरवरी 2026 को वर्चुअल माध्यम से तर्रेम स्वास्थ्य केंद्र का कड़ा मूल्यांकन किया गया था। इस दौरान टीकाकरण, सुरक्षित प्रसव, संक्रामक व गैर-संक्रामक बीमारियों का उपचार जैसी 12 प्रमुख सेवाओं की बारीकी से जांच की गई। केंद्र ने अपनी सेवाओं और प्रबंधन के दम पर 88.19 प्रतिशत का शानदार स्कोर हासिल किया। मूल्यांकन के दौरान सीएचओ और आरएचओ सहित समस्त स्टाफ ने राष्ट्रीय कार्यक्रमों और ग्रामीण सेवाओं पर अपनी दक्षता साबित की।

पिछड़ेपन की बेड़ियाँ काटकर बढ़ाया ग्रामीणों का भरोसा

जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर दूर स्थित तर्रेम में स्वास्थ्य सुविधाओं का पहुँचना किसी चुनौती से कम नहीं था। राज्य सरकार की प्रभावी नीतियों के कारण आज यहाँ की ओपीडी में रोजाना 25 से 30 मरीज पहुँच रहे हैं। अस्पताल में केवल सामान्य उपचार ही नहीं, बल्कि:

  • सुरक्षित प्रसव: अब ग्रामीणों को प्रसव के लिए मिलों दूर भटकने की जरूरत नहीं है।
  • लैब जांच: अत्याधुनिक लैब सुविधाएं स्थानीय स्तर पर ही उपलब्ध हैं।
  • आपातकालीन सेवा: 102 और 108 एम्बुलेंस सेवाओं का प्रभावी संचालन हो रहा है।
  • आयुष्मान योजना: शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं का सीधा लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुँच रहा है।

सामूहिक प्रयासों का परिणाम

यह गौरवपूर्ण उपलब्धि कलेक्टर श्री संबित मिश्रा के मार्गदर्शन और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. बीआर पुजारी के कुशल नेतृत्व का परिणाम है। इस सफलता में जिला कार्यक्रम प्रबंधक श्री वरुण साहू, डॉ. उमेश ठाकुर, नर्सिंग ऑफिसर मानसी ताटपल्ली और सेक्टर प्रभारी डॉ. शिवा गौरी सहित पूरी ब्लॉक टीम, सीएचओ, आरएचओ और मितानिनों का विशेष योगदान रहा।
तर्रेम को मिला यह ‘NQAS’ प्रमाणन केवल एक सर्टिफिकेट नहीं, बल्कि इस बात का प्रमाण है कि यदि इच्छाशक्ति हो तो अतिसंवेदनशील क्षेत्रों में भी विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान की जा सकती हैं। कभी गोलियों की गूँज के लिए पहचाना जाने वाला यह क्षेत्र आज सुरक्षित भविष्य और बेहतर स्वास्थ्य की मुस्कान बिखेर रहा है।

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