रायपुर 5 मई 2026/ मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय सुशासन तिहार 2026 के तहत प्रदेशभर में योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन की निरंतर निगरानी कर रहे हैं। इसी क्रम में सोमवार 4 मई को कबीरधाम जिले के पंडरिया विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत लोखान के समीप ग्राम कुई में विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) बाहुल्य ग्राम कमराखोल में बैगा परिवारों के बीच जाकर शासन की योजनाओं के क्रियान्वयन का करीब से अवलोकन किया।

पक्के घर में सम्मान का अहसास: हितग्राहियों से आत्मीय संवाद
मुख्यमंत्री श्री साय ने पीएम जनमन योजना के तहत निर्मित पक्के मकानों का निरीक्षण किया और हितग्राही श्री शिव कुमार मरावी एवं श्रीमती चैती बाई मरावी के घर के भीतर जाकर उनसे आत्मीय बातचीत की। अपने बीच प्रदेश के मुखिया को देख परिवार भाव-विभोर हो उठा और पारंपरिक ‘बिरनमाला’ पहनाकर उनका स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने सहज मुस्कान के साथ पूछा— “पक्का घर में बने लागथे कि नहीं?” इस पर हितग्राही ने भावुक होकर जवाब दिया— “मुड़ी उप्पर छत होय ले ही घर असन लगथे।” यह संवाद केवल शब्द नहीं, बल्कि शासन की योजनाओं से जीवन में आए बदलाव का जीवंत प्रमाण बन गया।

निरीक्षण के साथ मार्गदर्शन: शिक्षा पर दिया विशेष जोर
मुख्यमंत्री श्री साय निरीक्षण के दौरान पंचायत प्रतिनिधि श्री झिमलाल मरावी के घर भी पहुंचे, जहां उन्होंने आवास योजना के क्रियान्वयन की जानकारी लेने के साथ परिवार की सामाजिक-आर्थिक स्थिति का भी जायजा लिया। उन्होंने विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा पर जोर देते हुए कहा कि वनांचल की नई पीढ़ी को सशक्त बनाने के लिए शिक्षा को निरंतर जारी रखना आवश्यक है।
सादगी और संवेदनशीलता से भाव-विभोर हुए ग्रामीण
मुख्यमंत्री की सादगी और बिना किसी प्रोटोकॉल के अपने बीच उपस्थिति ने ग्रामीणों को गहराई से प्रभावित किया। बैगा परिवारों ने पारंपरिक तरीके से बांस की टोकरी में चार फल और पत्तों के दोने में कच्चे आम भेंट कर उनका अभिनंदन किया। यह दृश्य शासन और जनजातीय समाज के बीच आत्मीय जुड़ाव का प्रतीक बन गया।
कमराखोल: योजनाओं से बदलती तस्वीर
उल्लेखनीय है कि ग्राम पंचायत लोखान के आश्रित ग्राम कमराखोल में कुल 53 परिवार निवासरत हैं, जिनकी जनसंख्या लगभग 200 है। इनमें 43 परिवार बैगा जनजाति के हैं। गांव में 23 वनाधिकार पट्टाधारक हैं और पीएम जनमन योजना के अंतर्गत 37 आवास स्वीकृत किए गए हैं, जिनमें से 36 पूर्ण हो चुके हैं। ग्राम में एक आंगनबाड़ी केंद्र और एक प्राथमिक स्कूल संचालित है। यहां के ग्रामीणों की आजीविका मुख्यतः लघु वनोपज—तेंदूपत्ता, महुआ, चार, चिरौंजी एवं अन्य वनोपजों पर आधारित है।
सुशासन का जमीनी स्वरूप
कमराखोल का यह दौरा स्पष्ट करता है कि मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की कार्यशैली केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित नहीं, बल्कि उनके प्रभाव को जमीनी स्तर पर महसूस करने और आमजन से सीधे संवाद स्थापित करने पर केंद्रित है। सुशासन तिहार 2026 के माध्यम से शासन की यही संवेदनशीलता और जवाबदेही प्रदेश के दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों तक पहुंच रही है।
