रायपुर, 05 मई 2026
छत्तीसगढ़ के मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में आज मंत्रालय (महानदी भवन) में ‘छत्तीसगढ़ प्रतिकात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन एवं योजना प्राधिकरण’ (कैम्पा) की शासी निकाय की नवमीं बैठक संपन्न हुई। इस उच्च स्तरीय बैठक में मुख्य सचिव ने वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कैम्पा मद के कुशल उपयोग और भविष्य की रणनीतियों पर महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए।

नक्सल मुक्त क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे पर जोर
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कैम्पा मद के अंतर्गत वन क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने विशेष रूप से पुल-पुलियों, पहुँच मार्गों और आवश्यक विभागीय भवनों के निर्माण में तेजी लाने को कहा। मुख्य सचिव ने स्पष्ट किया कि जिन क्षेत्रों को नक्सल मुक्त किया गया है, वहां अधोसंरचना विकास कार्यों (Infrastructure Development) को युद्ध स्तर पर चलाया जाए। इसका मुख्य उद्देश्य इन दुर्गम क्षेत्रों में शासन की पहुंच सुनिश्चित करना और विकास की गति को बढ़ाकर आम नागरिकों को मुख्यधारा से जोड़ना है।

आगामी वर्षों की कार्ययोजना और बजट
वन विभाग के अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि वर्ष 2026-27 के लिए 713 करोड़ 73 लाख रुपये की वार्षिक कार्ययोजना तैयार की गई है। इस कार्ययोजना को शासी निकाय द्वारा अनुमोदित कर अंतिम स्वीकृति के लिए भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भेज दिया गया है। बैठक में इसके साथ ही वर्ष 2024-25 और 2025-26 के दौरान किए गए कार्यों की प्रगति की भी विस्तृत समीक्षा की गई।
मानसून से पहले कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा
आगामी मानसून सीजन को देखते हुए मुख्य सचिव ने सख्त हिदायत दी है कि वन क्षेत्रों में चल रहे वनीकरण, मृदा संरक्षण और जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को बारिश शुरू होने से पहले अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि समय पर कार्य पूर्ण होने से न केवल संसाधनों का सही उपयोग होगा, बल्कि मानसून के दौरान वृक्षारोपण की सफलता दर भी बढ़ेगी।
कैम्पा मद के मुख्य कार्य
अधिकारियों ने बताया कि कैम्पा निधि का उपयोग छत्तीसगढ़ में वनों के संरक्षण और संवर्धन के लिए बहुआयामी तरीके से किया जा रहा है, जिसमें शामिल हैं:
- सिंचित और असिंचित क्षेत्रों में व्यापक वृक्षारोपण।
- बांस वनों की पुनर्स्थापना और वनों के घनत्व को बढ़ाने के लिए ‘सिल्वीकल्चरल’ कार्य।
- वन्यप्राणियों के रहवास में सुधार (Habitat Improvement)।
- भू-जल स्तर को बढ़ाने के लिए प्रभावी जल संरक्षण कार्य।
बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा, पीसीसीएफ श्री व्ही. श्रीनिवास राव, श्री अरूण पांडे, प्रमुख सचिव (कृषि) श्रीमती शहला निगार, वित्त सचिव श्री मुकेश बंसल सहित राजस्व, आवास एवं पर्यावरण तथा सूचना प्रौद्योगिकी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
