सरगुजा के वनांचल में अब नहीं रहेगी प्यास: CM के निर्देश पर 113 नए हैंडपंपों का काम युद्ध स्तर पर शुरू

अम्बिकापुर 7 मई । सरगुजा जिले के दूरस्थ पहाड़ी और वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति ‘पहाड़ी कोरवा’ परिवारों के लिए पेयजल का संकट अब बीते दिनों की बात होने वाली है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की संवेदनशीलता और सख्त निर्देशों के बाद प्रशासन ने जिले की सुदूर बसाहटों में 113 नए हैंडपंप और बोरवेल खनन की योजना को धरातल पर उतार दिया है।

मुख्यमंत्री की प्राथमिकता: ‘अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे सुविधा’

पिछले दिनों सरगुजा प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने जिले में पेयजल की समस्या को लेकर चिंता व्यक्त की थी। उन्होंने जिला कलेक्टर को स्पष्ट निर्देश दिए थे कि वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले नागरिकों को बुनियादी सुविधाओं, विशेषकर पीने के साफ पानी के लिए परेशान न होना पड़े। मुख्यमंत्री ने कहा था कि शासन की योजनाओं का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

कलेक्टर की त्वरित कार्रवाई: एक माह की समय-सीमा निर्धारित

मुख्यमंत्री के निर्देशों का पालन करते हुए सरगुजा कलेक्टर एवं जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) के अध्यक्ष श्री अजीत वसंत ने संबंधित विभागों की आपात बैठक ली। कलेक्टर ने अधिकारियों को कड़ा निर्देश देते हुए कहा कि सभी 113 हैंडपंपों और बोरवेलों की खुदाई का कार्य आगामी एक माह के भीतर अनिवार्य रूप से पूर्ण कर लिया जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्य में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

कहाँ कितने लगेंगे हैंडपंप? (विकासखंड वार विवरण)

प्रशासन द्वारा कराए गए स्थलीय सर्वे के आधार पर डीएमएफ मद से स्वीकृत 113 कार्यों का वितरण इस प्रकार है:

  • लुण्ड्रा: 34 (सर्वाधिक कार्य)
  • लखनपुर: 22
  • मैनपाट: 20
  • सीतापुर: 16
  • अम्बिकापुर: 11
  • बतौली: 06
  • उदयपुर: 04

ग्रामीणों को मिलेगी झरिया और नालों के पानी से मुक्ति

जिले के इन सुदूर क्षेत्रों में अब तक ग्रामीण पेयजल के लिए पारंपरिक झरिया (छोटे गड्ढे), नालों या काफी दूर स्थित कुओं पर निर्भर थे। गर्मी के दिनों में यह संकट और गहरा हो जाता था। 113 नए बोरवेल होने से न केवल ग्रामीणों को घर के पास साफ पानी मिलेगा, बल्कि जलजनित बीमारियों के खतरे में भी कमी आएगी।

स्थानीय निवासियों ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। प्रशासन के इस त्वरित निर्णय से पहाड़ी कोरवा बसाहटों में ख़ुशी की लहर है और लोग अब अपने घरों के समीप ही नल लगने का इंतजार कर रहे हैं।


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