रायपुर, 07 मई 2026: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने केंद्र सरकार द्वारा ‘वंदे मातरम्’ को राष्ट्रीय गान (जन-गण-मन) के समान वैधानिक संरक्षण देने के ऐतिहासिक निर्णय का पुरजोर स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने इसे भारतीय सांस्कृतिक अस्मिता की जीत और राष्ट्रभक्ति की भावना को नया संबल देने वाला कदम करार दिया है।

सांस्कृतिक चेतना और गौरव का संगम
मुख्यमंत्री श्री साय ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम, 1971 (Prevention of Insults to National Honour Act, 1971) में संशोधन के प्रस्ताव को मंजूरी देकर करोड़ों भारतीयों की भावनाओं को शब्द दिए हैं। उन्होंने कहा, “वंदे मातरम् केवल एक गीत नहीं, बल्कि हमारे स्वतंत्रता संग्राम की वह अग्नि है जिसने गुलामी की कड़ियों को तोड़ने की शक्ति दी थी।”
अब अपमान पड़ेगा भारी
इस संशोधन के बाद, ‘वंदे मातरम्’ को भी वही कानूनी सुरक्षा प्राप्त होगी जो अब तक राष्ट्रगान ‘जन-गण-मन’ को प्राप्त थी। इसका अर्थ है कि अब वंदे मातरम् का अपमान करना, उसे गाने से रोकना या उसके प्रति अनादर प्रदर्शित करना कानूनी अपराध की श्रेणी में आएगा और दोषियों के विरुद्ध दंडात्मक कार्रवाई की जा सकेगी।
- राष्ट्र की आत्मा का सम्मान: मुख्यमंत्री ने कहा कि वंदे मातरम् को वैधानिक संरक्षण देना राष्ट्र की आत्मा को सम्मान देने जैसा है। यह गीत हमारी सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रवाद का आधार स्तंभ है।
- ऐतिहासिक भूल का सुधार: श्री साय ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए कहा कि लंबे समय से यह मांग उठ रही थी कि जिस गीत ने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोया, उसे भी सर्वोच्च सम्मान और सुरक्षा मिले।
- नया भारत, सशक्त गौरव: उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की परिकल्पना साकार हो रही है, जहाँ देश के प्रतीकों और गौरवशाली विरासत को अक्षुण्ण बनाए रखने के लिए निर्णायक कदम उठाए जा रहे हैं।
छत्तीसगढ़ में हर्ष का माहौल
मुख्यमंत्री ने इस निर्णय के लिए राज्य की जनता की ओर से केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास जताया कि इस निर्णय से युवा पीढ़ी के भीतर राष्ट्रभक्ति का संचार होगा और वे अपनी जड़ों व स्वाधीनता संग्राम के बलिदानों के प्रति अधिक जागरूक होंगे।
यह निर्णय न केवल कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित करता है, बल्कि भारतीय लोकतंत्र में ‘वंदे मातरम्’ की उस गरिमा को पुनर्स्थापित करता है, जो इसे ऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की रचना के समय से ही प्राप्त है।
