बस्तर की ‘सल्फी’ अब नए अवतार में: युवा नवाचारक हर्षवर्धन ने बढ़ाई शेल्फ लाइफ, मिला ‘न्यू इनोवेशन अवार्ड’
रायपुर/जगदलपुर 7 मई । बस्तर की पारंपरिक संस्कृति और खान-पान का अभिन्न हिस्सा मानी जाने वाली “सल्फी” अब केवल एक स्थानीय पेय तक सीमित नहीं रहेगी। रायपुर के युवा नवाचारक हर्षवर्धन बाजपेयी ने आधुनिक विज्ञान और नवाचार के मेल से सल्फी को एक स्वास्थ्यवर्धक ‘प्राकृतिक ड्रिंक’ के रूप में नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ी सफलता हासिल की है।

इनोवेशन महाकुंभ में मिली सराहना
हाल ही में शहीद महेंद्र कर्मा विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित “इनोवेशन महाकुंभ 1.0” में हर्षवर्धन के इस अनूठे प्रयोग को विशेषज्ञों और आगंतुकों की विशेष सराहना मिली। उनके इस प्रोजेक्ट को स्टार्टअप श्रेणी के तहत “न्यू इनोवेशन अवार्ड” में तृतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

क्या है हर्षवर्धन का नवाचार?
हर्षवर्धन अपने स्टार्टअप “बस्तर इंडिजीनियस नेक्टर एग्रीकल्चर्स” के माध्यम से सल्फी की सबसे बड़ी चुनौती—इसकी कम शेल्फ लाइफ—पर काम कर रहे हैं। सल्फी का रस पेड़ से निकलने के कुछ ही घंटों बाद प्राकृतिक रूप से किण्वित (ferment) होने लगता है, जिससे यह मादक पेय में बदल जाता है और खराब होने लगता है।
हर्षवर्धन ने वैज्ञानिक विधियों का उपयोग कर इस फर्मेंटेशन प्रक्रिया की अवधि को नियंत्रित करने का तरीका खोज निकाला है। इस तकनीक से:
- सल्फी के प्राकृतिक स्वाद और पोषक गुणों को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकेगा।
- यह पेय खराब हुए बिना दूरस्थ बाजारों तक पहुँच सकेगा।
- इसे एक मादक पेय की जगह एक ‘हेल्थ ड्रिंक’ के रूप में प्रमोट किया जा सकेगा।
बस्तर की अर्थव्यवस्था को मिलेगा बल
इस शोध का मुख्य उद्देश्य सल्फी को पारंपरिक दायरे से बाहर निकालकर एक ब्रांड के रूप में स्थापित करना है। हर्षवर्धन का मानना है कि यदि सल्फी की शेल्फ लाइफ बढ़ जाती है, तो इससे बस्तर के जनजातीय समुदायों को उनकी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
7 मई 2026 को मिली यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ के पारंपरिक ज्ञान और आधुनिक तकनीक के सफल संगम का उदाहरण है। हर्षवर्धन के इस प्रयास से उम्मीद जागी है कि बस्तर का यह “प्राकृतिक कल्पवृक्ष रस” जल्द ही बोतलबंद होकर देश-दुनिया के बड़े सुपरमार्केट्स के शेल्फ पर अपनी जगह बनाएगा।
