संवेदनशील सरकार, सशक्त समाधान: रेंगने को मजबूर दिव्यांग को मिला तत्काल सरकारी संबल

धमतरी/रायपुर, 09 मई 2026

सुशासन की संवेदनशीलता: रेंगने को मजबूर जीवन लाल को मिले ‘नए पैर’, सुशासन तिहार में तत्काल मिली ट्राइसाइकिल

छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन’ केवल एक शब्द नहीं, बल्कि अंतिम व्यक्ति के जीवन में आ रहा बदलाव है। धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के ग्राम सिवनीकला में आयोजित ‘सुशासन तिहार’ इसका जीवंत उदाहरण बना, जहाँ दशकों से घुटनों के बल चलने को मजबूर एक दिव्यांग के जीवन में आत्मनिर्भरता की नई सुबह आई।

संघर्ष की मिसाल हैं जीवन लाल

ग्राम सिवनीकला के निवासी जीवन लाल साहू बचपन से ही दोनों पैरों की गंभीर दिव्यांगता से जूझ रहे हैं। शारीरिक अक्षमता ऐसी कि चंद कदमों की दूरी तय करने के लिए भी उन्हें घुटनों के बल रेंगना पड़ता था। लेकिन इस शारीरिक कष्ट ने उनके स्वाभिमान को कभी कम नहीं होने दिया। जीवन लाल न केवल अपने परिवार की दो एकड़ कृषि भूमि की देखरेख करते हैं, बल्कि विपरीत परिस्थितियों में भी मेहनत और ईमानदारी से जीवन यापन कर रहे हैं।

कैंप में हाथों-हाथ हुआ समाधान

जब जीवन लाल को ग्रामीणों के माध्यम से ‘सुशासन तिहार’ के आयोजन की जानकारी मिली, तो वे अपनी उम्मीद लेकर समाज कल्याण विभाग के स्टॉल पर पहुँचे। जिला प्रशासन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए उनके आवेदन पर तत्काल कार्यवाही की। बिना किसी कागजी देरी या दफ्तरों के चक्कर लगाए, शिविर स्थल पर ही उन्हें निशुल्क ट्राइसाइकिल प्रदान की गई।

“यह मशीन नहीं, मेरे नए पैर हैं”

ट्राइसाइकिल पाकर भावुक हुए जीवन लाल ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और जिला प्रशासन का आभार जताते हुए कहा, “अब मुझे खेत जाने या गांव में कहीं भी आने-जाने के लिए दूसरों का मुँह नहीं ताकना पड़ेगा। यह सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि मेरे लिए नए पैर हैं जो मुझे सही मायनों में आत्मनिर्भर बनाएंगे।”

योजनाओं का मिल रहा निरंतर संबल

जीवन लाल का परिवार पहले से ही शासन की विभिन्न जनहितैषी योजनाओं से लाभान्वित हो रहा है। उन्हें हर माह 500 रुपये दिव्यांग पेंशन और राशन कार्ड के माध्यम से 35 किलो चावल मिल रहा है। अब ट्राइसाइकिल मिल जाने से उनकी गतिशीलता की बाधा भी दूर हो गई है।

सुशासन का बढ़ता विश्वास

धमतरी का यह ‘सुशासन तिहार’ इस बात का प्रतीक बन गया है कि जब प्रशासन खुद जनता के द्वार तक पहुँचता है, तो विकास की किरण अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक पहुँचती है। जीवन लाल की कहानी आज प्रदेश के हजारों दिव्यांगजनों के लिए प्रेरणा और सरकार के प्रति अटूट विश्वास का आधार बनी है।

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