छत्तीसगढ़ में सिंचाई प्रोजेक्ट्स भरेंगे रफ्तार: मुख्य सचिव सख्त, तय समय में काम पूरा करने के निर्देश

रायपुर, 09 मई 2026:

छत्तीसगढ़ में सिंचाई परियोजनाओं को मिलेगी रफ्तार; मुख्य सचिव ने दिए निर्माण कार्यों में गति लाने के सख्त निर्देश

छत्तीसगढ़ के किसानों को सिंचाई का अधिक से अधिक लाभ दिलाने और राज्य की जल संपदा का बेहतर प्रबंधन करने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। मुख्य सचिव श्री विकासशील ने मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित ‘छत्तीसगढ़ सिंचाई परियोजना मंडल’ की कार्यकारिणी समिति की बैठक में राज्य की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजनाओं की विस्तृत समीक्षा की। बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को दो-टूक शब्दों में कहा कि परियोजनाओं में हो रही देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और कार्यों में तेजी लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जाएं।

प्रक्रियाओं को समय-सीमा में पूरा करने का अल्टीमेटम
मुख्य सचिव ने विशेष रूप से भू-अर्जन (Land Acquisition) और फारेस्ट क्लीयरेंस (Forest Clearance) जैसे मामलों पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि इन प्रशासनिक प्रक्रियाओं को एक निश्चित समय-सीमा के भीतर पूर्ण किया जाए। श्री विकासशील ने कहा कि जब तक कागजी औपचारिकताएं समय पर पूरी नहीं होंगी, तब तक मैदानी स्तर पर काम शुरू करना संभव नहीं होगा, जिससे अंततः किसान लाभ से वंचित रह जाते हैं।

प्रमुख परियोजनाओं की रूपरेखा और लाभ:

  1. पैरी-कोडार लिंक नहर (गरियाबंद):
    सिकासार जलाशय से कोडार जलाशय तक पाइपलाइन लिंक नहर का निर्माण किया जाएगा। यह परियोजना महानदी की सहायक पैरी नदी के अतिरिक्त जल का सदुपयोग करने के उद्देश्य से तैयार की गई है। इससे न केवल पेयजल और औद्योगिक कार्यों की आपूर्ति होगी, बल्कि गरियाबंद और महासमुंद जिले के 25 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में नई सिंचाई क्षमता विकसित होगी।
  2. मोहमेला-सिरपुर बैराज (रायपुर):
    रायपुर जिले के आरंग विकासखंड में महानदी पर यह बैराज प्रस्तावित है। इससे 1800 हेक्टेयर क्षेत्र में ‘उद्वहन सिंचाई’ (Lift Irrigation) सुनिश्चित होगी। सिंचाई के अलावा, यह स्थल पर्यटन और नौका विहार के केंद्र के रूप में भी विकसित होगा, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ेगा।
  3. मटनार बहुउद्देशीय परियोजना (बस्तर):
    इंद्रावती नदी पर आधारित यह योजना बस्तर के विकास के लिए ‘गेम चेंजर’ मानी जा रही है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि उद्वहन प्रणाली (Lift System) पर आधारित होने के कारण इसमें किसी भी प्रकार के विस्थापन या पुनर्वास की आवश्यकता नहीं होगी, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और जंगलों को नुकसान नहीं पहुंचेगा।
  4. देउरगांव उद्वहन बैराज (बस्तर):
    जगदलपुर के पास इंद्रावती नदी पर बनने वाला यह बैराज बस्तर संभाग के आर्थिक और सामाजिक ढांचे को मजबूती प्रदान करेगा।

  1. मुख्य सचिव के इन सख्त निर्देशों से उम्मीद जगी है कि बरसों से लंबित सिंचाई परियोजनाएं अब धरातल पर उतरेंगी। इस बैठक में जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और कार्यकारिणी समिति के सदस्य उपस्थित थे, जिन्हें स्पष्ट किया गया कि लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी।

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