नवा रायपुर 23 मई । रायपुर, दुर्ग और रायगढ़ जिलों में ‘स्मार्ट पैक्स’ और ‘मल्टी-सुपर मार्केट’ मॉडल से चमकेगी सहकारिता: नवा रायपुर की कार्यशाला में बनी बड़ी योजना
केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय द्वारा नवा रायपुर में आयोजित पूर्वी क्षेत्र के छह राज्यों की क्षेत्रीय कार्यशाला में छत्तीसगढ़ के आर्थिक रूप से समृद्ध और औद्योगिक जिलों के लिए विशेष सहकारिता रोडमैप तैयार किया गया है। केंद्रीय सहकारिता सचिव डॉ. आशीष कुमार भूटानी की अध्यक्षता में हुई इस उच्च स्तरीय बैठक में छत्तीसगढ़ के रायपुर, दुर्ग और रायगढ़ जैसे प्रमुख जिलों की सहकारी समितियों (पैक्स) को अत्याधुनिक ‘बिजनेस हब’ के रूप में बदलने का निर्णय लिया गया है।

कार्यशाला में इन तीन विशिष्ट जिलों की भौगोलिक और आर्थिक स्थिति को देखते हुए सहकारिता आधारित योजनाओं के विस्तार पर विशेष रणनीति बनाई गई:

रायपुर, दुर्ग और रायगढ़ जिलों के लिए विशेष सहकारिता योजनाएं:
- दुर्ग और रायपुर में ‘स्मार्ट पैक्स’ और सहकारी सुपर मार्केट:
रायपुर और दुर्ग जैसे घनी आबादी और शहरी प्रभाव वाले जिलों में पैक्स समितियों को केवल खाद-बीज केंद्र न रखकर ‘सहकारी मल्टी-सुपर मार्केट’ के रूप में विकसित किया जाएगा। इसके तहत दुर्ग के पाटन, धमधा और रायपुर के आरंग व अभनपुर जैसे बड़े विकासखंडों की समितियों में दैनिक उपभोग की वस्तुएं, पैकेज्ड डेयरी उत्पाद और जैविक उत्पाद एक ही छत के नीचे मिलेंगे। - रायगढ़ में ‘लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग’ कॉरिडोर:
औद्योगिक और कृषि दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण रायगढ़ जिले में विश्व की सबसे बड़ी सहकारी अनाज भंडारण योजना के तहत बड़े लॉजिस्टिक्स हब और आधुनिक साइलो (Silo) गोदाम बनाए जाएंगे। रायगढ़ की पैक्स समितियों को सीधे मिलर्स और राष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जाएगा, जिससे यहाँ के धान और दलहन-तिलहन उत्पादक किसानों को उनकी उपज का अधिकतम मूल्य मिल सके। - महानदी बेसिन (रायपुर-दुर्ग) में मत्स्य पालन और ‘मिल्क रूट’ का विस्तार:
रायपुर और दुर्ग जिलों में बहने वाली नदियों और जलाशयों के पास स्थित समितियों में मत्स्य पालन सहकारी समितियों (FFCS) को अत्याधुनिक तकनीक से लैस किया जाएगा। नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) के सहयोग से रायपुर और दुर्ग के ग्रामीण इलाकों को नए ‘मिल्क रूट’ (दुग्ध संकलन मार्ग) से जोड़ा जाएगा, जिससे अमूल और देवभोग जैसी डेयरियों को सीधे दूध की आपूर्ति हो सकेगी। - रायगढ़ और रायपुर में ‘कॉमन सर्विस सेंटर’ (CSC) और डिजिटल बैंकिंग:
इन जिलों की सभी पैक्स समितियों को शत-प्रतिशत कंप्यूटरीकृत कर डिजिटल बैंकिंग सेवा (Micro-ATM) से लैस किया जा रहा है। रायगढ़ के दूरस्थ अंचलों और रायपुर के ग्रामीण क्षेत्रों के किसानों को अब पैसा निकालने या सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए जिला मुख्यालय नहीं जाना पड़ेगा। पैक्स समितियां ही अब ‘गांव के बैंक’ के रूप में काम करेंगी।
औद्योगिक जिलों में ग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि रायपुर, दुर्ग और रायगढ़ जैसे जिलों में औद्योगिक विकास के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को संतुलित करना बेहद जरूरी है। पैक्स समितियों के इस बिजनेस डायवर्सिफिकेशन (व्यावसायिक विस्तार) से इन जिलों के ग्रामीण युवाओं को खाद-बीज प्रबंधन, डेटा एंट्री, वेयरहाउसिंग और कोल्ड स्टोरेज संचालन जैसे क्षेत्रों में सीधे स्थानीय रोजगार मिलेगा। इससे कृषि क्षेत्र आत्मनिर्भर बनेगा और शहरी क्षेत्रों पर जनसंख्या का दबाव भी कम होगा।
