रायपुर/जशपुर, 23 मई 2026 जशपुर में उद्यानिकी क्रांति: कश्मीर-हिमाचल की तरह महक रहे सेब, नाशपाती से देश भर में बढ़ी छत्तीसगढ़ की पहचान
छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अब देश के नक्शे पर एक प्रमुख उद्यानिकी हब के रूप में उभर रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की पहल पर जिले की अनुकूल जलवायु का लाभ उठाकर किसानों को उद्यानिकी और नगदी फसलों के लिए लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है। इसका परिणाम यह है कि जशपुर में अब सेब, नाशपाती और चाय की खेती से किसानों की किस्मत बदल रही है और उनके जीवन स्तर में बड़ा सुधार आया है।

जशपुर का सेब: स्वाद में कश्मीर और हिमाचल को टक्कर
जशपुर जिले में सेब उत्पादन की शुरुआत वर्ष 2023 में हुई थी। महज तीन वर्षों के भीतर ही इसका दायरा बढ़कर अब लगभग 410 एकड़ तक पहुंच गया है। वर्तमान में जिले के लगभग 410 किसान पूरी लगन के साथ सेब की खेती से जुड़े हैं। रूरल डेव्हलपमेंट एंड डेव्हलपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष श्री राजेश गुप्ता ने बताया कि इन सभी किसानों ने अपनी 1-1 एकड़ जमीन पर सेब के पौधे रोपे हैं।

इस वर्ष जिले के मनोरा व बगीचा विकासखंड सहित शैला, छतौरी, करदना और छिछली जैसी ग्राम पंचायतों में लगे सेब के पेड़ों पर उत्कृष्ट गुणवत्ता और बड़े आकार के फल आए हैं। स्थानीय किसानों का कहना है कि जशपुर में उपजे सेब का स्वाद, मीठापन और गुणवत्ता कश्मीर व हिमाचल प्रदेश के सेबों के समान ही लाजवाब है।
नाशपाती की खेती से हर साल लाखों की कमाई
सेब के साथ-साथ जशपुर में नाशपाती की खेती भी बड़े पैमाने पर की जा रही है। जिले में नाशपाती के बाग लगभग 3,500 एकड़ में फैले हुए हैं, जिससे 3,500 से अधिक किसान जुड़े हैं। जिले के सन्ना, पंडरापाठ, कंवई, महुआ, सोनक्यारी, मनोरा, धवईपाई और गीधा जैसे क्षेत्रों में इसका रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है।
जशपुर की नाशपाती का वार्षिक उत्पादन लगभग 1,75,000 क्विंटल तक पहुंच चुका है। यहां से कड़े नियंत्रण में पैकेजिंग कर नाशपाती को दिल्ली, उत्तर प्रदेश और ओडिशा सहित देश के कई अन्य राज्यों के बाजारों में भेजा जा रहा है। इस नगदी फसल से किसानों को प्रति एकड़ हर साल लगभग एक से डेढ़ लाख रुपये की शानदार आमदनी हो रही है।
चाय के बाद अब नई फसलों से सुनहरी राह
जशपुर में चाय की खेती पहले से ही पारंपरिक रूप से की जा रही है और यहाँ की चाय पत्ती अपनी बेहतरीन सुगंध व उच्च गुणवत्ता के लिए जानी जाती है। अब चाय के साथ सेब और नाशपाती के सफल उत्पादन ने जशपुर को कृषि क्षेत्र में एक नई पहचान दे दी है। इन फसलों के सफल क्रियान्वयन से स्थानीय किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। राज्य सरकार की योजना भविष्य में इन उद्यानिकी फसलों का दायरा और अधिक बढ़ाने की है, ताकि जिले के ज्यादा से ज्यादा किसानों को इसका लाभ मिल सके।
