पश्चिम एशिया संकट के बीच छत्तीसगढ़ में खाद-बीज का संकट नहीं, डीएपी की कमी से निपटने के लिए सरकार के पास पुख्ता ‘प्लान-बी’

विशेष संवाददाता, रायपुर 2 जून ।पश्चिम एशिया संकट के बीच छत्तीसगढ़ में खाद-बीज का संकट नहीं, डीएपी की कमी से निपटने के लिए सरकार के पास पुख्ता ‘प्लान-बी’
पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) में जारी युद्ध और तनावपूर्ण भू-राजनीतिक स्थितियों के बीच छत्तीसगढ़ के किसानों के लिए राहत भरी खबर है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य के किसानों को आश्वस्त किया है कि अंतरराष्ट्रीय उथल-पुथल के बावजूद प्रदेश में खाद और बीज की कोई किल्लत नहीं होने दी जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार ने खरीफ सीजन के लिए अग्रिम तैयारियां पूरी कर ली हैं।

डीएपी की मामूली कमी संभव, ‘प्लान-बी’ तैयार

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने प्रदेश की स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा, “जिस तरह से पश्चिम एशिया में युद्ध की स्थिति बनी हुई है, उससे बीज और खाद को लेकर राज्य में कोई बड़ी समस्या नहीं है।” हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि वैश्विक परिस्थितियों के कारण विशेष रूप से डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) की आपूर्ति में थोड़ी कमी देखने को मिल सकती है।

इस संभावित कमी से निपटने के लिए कृषि विभाग ने ‘प्लान-बी’ के तहत मजबूत वैकल्पिक व्यवस्था कर ली है। मुख्यमंत्री ने किसानों से अपील की है कि वे डीएपी के पारंपरिक विकल्प के तौर पर बाजार और सहकारी समितियों में उपलब्ध अन्य खाद का उपयोग करें, जो फसल के लिए उतने ही फायदेमंद हैं।

सरकार के पास ये ४ मजबूत विकल्प उपलब्ध:

मुख्यमंत्री ने बताया कि डीएपी की जगह किसान निम्नलिखित उन्नत और वैज्ञानिक विकल्पों का आसानी से उपयोग कर सकते हैं:

  • एनपीके (NPK): नाइट्रोजन, फॉस्फेट और पोटाश से भरपूर यह खाद फसलों के समग्र विकास के लिए सर्वोत्तम है।
  • एसएसपी (SSP – सिंगल सुपर फॉस्फेट): यह फॉस्फेट की कमी को पूरा करने के साथ-साथ मिट्टी को सल्फर भी प्रदान करता है।
  • नैनो यूरिया और नैनो डीएपी: तरल (लिक्विड) रूप में उपलब्ध यह आधुनिक तकनीक कम लागत में अधिक पैदावार देती है और पर्यावरण के अनुकूल है।

किसानों को नहीं होगी कोई परेशानी

मुख्यमंत्री ने कृषि विभाग के आला अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि सोसायटियों और सोसायटियों के माध्यम से किसानों तक खाद-बीज की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। मुख्यमंत्री साय ने दृढ़ता से कहा, “छत्तीसगढ़ के अन्नदाताओं को किसी भी प्रकार से खाद और बीज की कमी नहीं होने दी जाएगी। हमारी सरकार किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।” कृषि विशेषज्ञों का भी मानना है कि नैनो डीएपी और एसएसपी का कॉम्बो उपयोग पारंपरिक डीएपी से बेहतर परिणाम दे सकता है।

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