नीली क्रांति’ से बदलेगी गांवों की सूरत: मत्स्य पालन बना छत्तीसगढ़ में समृद्धि का नया मंत्र

विशेष संवाददाता
रायपुर 27 जून ।

मत्स्य बीज उत्पादन में देश में 5वें स्थान पर चमका छत्तीसगढ़; सरकारी योजनाओं से खुले स्वरोजगार के द्वार

भारत की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा देने और किसानों की आय को बढ़ाने में ‘नीली क्रांति’ (मत्स्य पालन) गेम चेंजर साबित हो रही है। आज के दौर में मछली पालन सिर्फ भोजन या पारंपरिक व्यवसाय तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और आत्मनिर्भरता का सबसे मजबूत आधार बनकर उभरा है। कम लागत, न्यूनतम समय में बेहतर उत्पादन और बाजार में लगातार बढ़ती मांग के चलते छत्तीसगढ़ के ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और किसानों के बीच यह व्यवसाय तेजी से लोकप्रिय हो रहा है।

मत्स्य क्षेत्र में छत्तीसगढ़ का दबदबा: देश में पांचवां स्थान

राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ ने मछली पालन के क्षेत्र में अपना एक बड़ा मुकाम हासिल किया है। आज छत्तीसगढ़ मत्स्य बीज उत्पादन (Fish Seed Production) में पूरे देश में पांचवें (5वें) स्थान पर और कुल अंतर्देशीय (Inland) मछली उत्पादन में छठे (6ठे) स्थान पर काबिज है। राज्य में मौजूद जल स्रोतों का लगभग 96 प्रतिशत हिस्सा आज मछली पालन के अंतर्गत लाया जा चुका है। छत्तीसगढ़ न केवल मत्स्य बीज उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर हो चुका है, बल्कि अब पड़ोसी राज्यों को भी बड़े पैमाने पर मत्स्य बीज का निर्यात कर रहा है।

मुख्यमंत्री का आह्वान: धान के चक्रव्यूह से निकलें, अपनाएं बहुआयामी खेती

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने प्रदेश के किसानों और ग्रामीण युवाओं से एक बेहद महत्वपूर्ण और दूरदर्शी आह्वान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि किसान अपनी खेती को केवल पारंपरिक धान की फसल तक ही सीमित न रखें। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए किसानों को दलहन, तिलहन, उद्यानिकी, दुग्ध उत्पादन और विशेष रूप से मत्स्य पालन जैसे उच्च आयवर्धक व्यवसायों को अपनाना होगा। सरकार की इस सोच के अनुरूप, भारत सरकार और छत्तीसगढ़ सरकार मिलकर मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं और वित्तीय अनुदान (Subsidy) प्रदान कर रही हैं।

पाकलू मरकाम बने मिसाल: ₹11 लाख के प्रोजेक्ट में मिली ₹6.60 लाख की सब्सिडी

सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर छत्तीसगढ़ के ग्रामीण युवा कैसे अपनी किस्मत बदल रहे हैं, इसकी जीती-जागती मिसाल कोंडागांव जिले के ग्राम पल्ली निवासी युवा किसान श्री पाकलू मरकाम हैं। पाकलू ने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत अपनी निजी भूमि पर तालाब निर्माण कर मछली पालन की शुरुआत की। उन्हें इस योजना के अंतर्गत तालाब निर्माण के लिए 11 लाख रुपये की कुल लागत पर 6 लाख 60 हजार रुपये का बंपर सरकारी अनुदान (subsidy) प्राप्त हुआ।

आज पाकलू के पास 3 बड़े तालाब हैं, जिनमें वे रोहू, कतला, कॉमन कार्प और पंगास जैसी उन्नत प्रजातियों का पालन कर रहे हैं। मछली पालन के साथ-साथ उन्होंने मुर्गी पालन, सूकर पालन और समन्वित कृषि प्रणाली अपनाई है, जिससे वे अब सालाना लगभग 6 लाख रुपये की शुद्ध आय अर्जित कर आत्मनिर्भर बन चुके हैं।

कम पूंजी, सीमित भूमि और असीमित मुनाफा

विशेषज्ञों के अनुसार, मत्स्य पालन व्यवसाय की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे बेहद सीमित भूमि और कम प्रारंभिक पूंजी के साथ शुरू किया जा सकता है। गांवों में मौजूद पारंपरिक तालाबों, जलाशयों, नहरों और छोटे जल स्रोतों का वैज्ञानिक प्रबंधन करके किसान अपनी मुख्य फसल के साथ-साथ एक बड़ी अतिरिक्त आय (Extra Income) सुनिश्चित कर सकते हैं। इसके अलावा, आधुनिक तकनीकों जैसे ‘बायोफ्लॉक’ (Biofloc) और ‘केज कल्चर’ (Cage Culture) के आने से अब कम जगह में भी कई गुना अधिक उत्पादन संभव हो गया है।

‘प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना’ (PMMSY) की मुख्य विशेषताएं

मत्स्य पालन क्षेत्र को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं के तहत मिलने वाले मुख्य लाभ इस प्रकार हैं:

  • भारी वित्तीय सब्सिडी: योजना के तहत सामान्य वर्ग के लाभार्थियों को प्रोजेक्ट लागत का 40 प्रतिशत और महिला, अनुसूचित जाति (SC) व अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग के लाभार्थियों को 60 प्रतिशत तक का भारी अनुदान दिया जाता है।
  • तकनीकी प्रशिक्षण: मत्स्य पालन विभाग द्वारा युवाओं को आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों से मछली पालन का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
  • क्रेडिट कार्ड की सुविधा: किसानों को बिना किसी परेशानी के लोन उपलब्ध कराने के लिए ‘मत्स्य पालन किसान क्रेडिट कार्ड’ (KCC) की सुविधा भी दी जा रही है।
  • सामाजिक सुरक्षा: मत्स्य सहकारी समितियों के सदस्यों को 5 लाख रुपये तक का मुफ्त दुर्घटना बीमा कवर भी प्रदान किया जा रहा है।

ऐसे करें आवेदन और पंजीकरण

मत्स्य पालन व्यवसाय शुरू करने, सब्सिडी पाने या निःशुल्क प्रशिक्षण प्राप्त करने के लिए इच्छुक किसान और युवा इन माध्यमों से संपर्क कर सकते हैं:

  • ऑनलाइन आवेदन: छत्तीसगढ़ मछली पालन विभाग के आधिकारिक पोर्टल Fisheries CG State Portal पर जाकर योजनाओं और प्रशिक्षण के लिए सीधे ऑनलाइन आवेदन (Apply Online) किया जा सकता है।
  • कार्यालय संपर्क: अपने नजदीकी जिले के ‘मत्स्य पालन विभाग’ (Directorate of Fisheries) कार्यालय में जाकर मत्स्य अधिकारियों से सीधे मिलकर फॉर्म प्राप्त कर सकते हैं।
  • हेल्पलाइन नंबर: किसी भी प्रकार की तकनीकी या योजना संबंधी पूछताछ के लिए विभागीय नंबर 0771-2443124 पर संपर्क किया जा सकता है।

‘नीली क्रांति’ के इस दौर में मत्स्य पालन छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों से गरीबी और बेरोजगारी मिटाने का एक अचूक हथियार बन चुका है। सरकारी संबल और किसानों की कड़ी मेहनत के दम पर अब छत्तीसगढ़ के गांव आत्मनिर्भरता की एक नई इबारत लिख रहे हैं।

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