रायपुर/नई दिल्ली 27। छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज: बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में ‘लार्ज डायमीटर ड्रिलिंग’ को मंजूरी
छत्तीसगढ़ की रत्नगर्भा धरती से अब बहुत जल्द हीरों की चमक पूरी दुनिया में बिखरने वाली है। राज्य की खनिज संपदा को वैश्विक स्तर पर एक नई और मजबूत पहचान दिलाने की दिशा में केंद्र और राज्य सरकार ने मिलकर एक बेहद ऐतिहासिक कदम उठाया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (NCL) के निदेशक मंडल (Board of Directors) की नई दिल्ली में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक में महासमुंद जिले के प्रसिद्ध बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले और सबसे महत्वपूर्ण चरण को हरी झंडी दे दी गई है। बोर्ड ने इस ब्लॉक में बड़े व्यास (Large Diameter) की ड्रिलिंग शुरू करने के प्रस्ताव को औपचारिक मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद छत्तीसगढ़ में व्यावसायिक स्तर पर हीरा खनन (Commercial Diamond Mining) का रास्ता पूरी तरह साफ होता नजर आ रहा है।

किम्बरलाइट पाइप की होगी जांच, हीरे के भंडार का लगेगा सटीक पता
इस परियोजना का मुख्य उद्देश्य क्षेत्र में छिपे हीरों के वास्तविक और वैज्ञानिक भंडार का सटीक आकलन करना है। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, हीरा मुख्य रूप से ‘किम्बरलाइट चट्टानों’ या ‘किम्बरलाइट पाइप’ में पाया जाता है। एनसीएल के निदेशक मंडल ने बैठक में अब तक हुई प्रगति की विस्तृत समीक्षा की। बोर्ड ने कड़े निर्देश दिए हैं कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस (Prospecting License) की तय समय-सीमा के भीतर सभी तकनीकी और वैज्ञानिक कार्य अनिवार्य रूप से पूरे किए जाएं।

लार्ज डायमीटर ड्रिलिंग के माध्यम से जमीन की गहराइयों से किम्बरलाइट चट्टानों के बड़े सैंपल निकाले जाएंगे। इन सैंपलों की अत्याधुनिक लैब में जांच कर यह पता लगाया जाएगा कि प्रति टन चट्टान में कितने कैरेट हीरा मौजूद है। इस वैज्ञानिक डेटा के आधार पर एक विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (Feasibility Report) तैयार की जाएगी, जिसके बाद व्यावसायिक खदान विकसित करने का अंतिम फैसला लिया जाएगा।
बैठक में देश और राज्य के शीर्ष अधिकारी रहे मौजूद
नई दिल्ली में आयोजित इस बेहद संवेदनशील और महत्वपूर्ण बैठक में खनिज और प्रशासनिक क्षेत्र के कई दिग्गज शामिल हुए। बैठक में मुख्य रूप से निम्नलिखित शीर्ष अधिकारी उपस्थित रहे:
- श्री अमिताभ मुखर्जी (निदेशक मंडल सदस्य)
- श्री आशीष चटर्जी (निदेशक मंडल सदस्य)
- श्री सौरभ सिंह (अध्यक्ष, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम)
- श्री पी. दयानंद (सचिव, खनिज साधन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन)
- श्री रजत बंसल (प्रबंध संचालक, छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन)
- श्री उपेंद्र कुमार (निदेशक मंडल सदस्य)
- श्री विनय कुमार (निदेशक मंडल सदस्य)
छत्तीसगढ़ की आर्थिकी और रोजगार के लिए गेमचेंजर फैसला
विशेषज्ञों का मानना है कि महासमुंद का बलौदा-बेलमुंडी ब्लॉक आने वाले समय में देश का सबसे बड़ा हीरा उत्पादक क्षेत्र बन सकता है। यदि यहां व्यावसायिक खनन शुरू होता है, तो इसके कई दूरगामी फायदे होंगे:
- राजस्व में भारी बढ़ोतरी: छत्तीसगढ़ सरकार के खजाने में रॉयल्टी के रूप में भारी राजस्व आएगा।
- स्थानीय रोजगार: महासमुंद और आसपास के क्षेत्रों में हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसरों का सृजन होगा।
- औद्योगिक विकास: राज्य में जेम्स एंड ज्वेलरी और हीरा तराशने (Diamond Cutting & Polishing) जैसे नए उद्योगों के लिए रास्ते खुलेंगे।
- वैश्विक पहचान: मध्य प्रदेश के पन्ना के बाद छत्तीसगढ़ भारत का दूसरा सबसे प्रमुख हीरा खनन केंद्र बनकर उभरेगा।
एनसीएल बोर्ड का यह फैसला छत्तीसगढ़ के औद्योगिक और आर्थिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। अब सबकी नजरें लार्ज डायमीटर ड्रिलिंग के नतीजों और उसके बाद आने वाली व्यवहार्यता रिपोर्ट पर टिकी हैं।
