तूता में नहीं चलेगा बुलडोजर: सोशल मीडिया की खबरों पर NRDA का बड़ा यू-टर्न; सिर्फ ‘कारण बताओ’ नोटिस, ‘टेबल टॉक’ से निकलेगा समाधान

विशेष संवाददाता | रायपुर, 4 जुलाई

बुलडोजर पॉलिटिक्स और अफवाहों पर NRDA का बड़ा यू-टर्न: ग्राम तूता में विस्थापन की कोई योजना नहीं, सिर्फ ‘कारण बताओ’ नोटिस

सोशल मीडिया पर चल रही खबरें निकलीं बेबुनियाद; एनआरडीए ने कहा- ‘ग्राम पंचायत की शिकायतों पर हुई थी प्राथमिक स्क्रूटनी, बिना आम सहमति नहीं उजाड़ा जाएगा कोई आशियाना’

नवा रायपुर के ग्राम तूता में अतिक्रमण हटाए जाने की खबरों को लेकर पिछले कुछ दिनों से जारी असमंजस और सोशल मीडिया पर उबल रहे आक्रोश पर आखिरकार नवा रायपुर अटल नगर विकास प्राधिकरण (NRDA) ने पूरी तरह विराम लगा दिया है। प्राधिकरण ने आज एक बेहद महत्वपूर्ण और स्पष्ट आधिकारिक बयान जारी करते हुए साफ कर दिया है कि वर्तमान में ग्राम तूता में विस्थापन या बेदखली की कोई भी कार्रवाई प्रस्तावित नहीं है। एनआरडीए ने सोशल मीडिया और अन्य अनौपचारिक माध्यमों पर चल रही तोड़फोड़ की खबरों को पूरी तरह भ्रामक और तथ्यों से परे बताया है।

कार्रवाई नहीं, यह सिर्फ एक वैधानिक नोटिस: NRDA

​प्राधिकरण के शीर्ष अधिकारियों के अनुसार, ग्राम तूता के सार्वजनिक क्षेत्रों में अतिक्रमण को लेकर लगातार शिकायतें मिल रही थीं। कानून व्यवस्था और नियमों के पालन के तहत, एनआरडीए की टीम ने मौके पर जाकर विधिवत स्थलीय निरीक्षण (Physical Inspection) किया था। इसी जांच रिपोर्ट के आधार पर संबंधित पक्षों को केवल ‘कारण बताओ नोटिस’ (Show Cause Notice) जारी किया गया है। यह प्रशासनिक प्रक्रिया का एक हिस्सा है, ताकि प्रभावित पक्ष अपना कानूनी पक्ष रख सकें। इसे विस्थापन या डिमोलिशन (तोड़फोड़) की कार्रवाई समझना जल्दबाजी और गलत है।

सीईओ की टेबल पर हुआ बड़ा फैसला; अब ‘डायलॉग’ से निकलेगा हल

​इस पूरे मामले में उस वक्त एक बड़ा मोड़ आया, जब 2 जुलाई को ग्राम तूता के जनप्रतिनिधियों और विभिन्न समाजों के प्रमुख पदाधिकारियों के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने एनआरडीए के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (CEO) से मुलाकात की। बंद कमरे में हुई इस मैराथन बैठक में टकराव के बजाय बातचीत का रास्ता चुना गया।

बैठक में इन तीन प्रमुख बिंदुओं पर सहमति बनी है:

  1. महापंचायत/सर्वदलीय बैठक: सबसे पहले गाँव में सभी पक्षों, ग्रामीणों और समाज प्रमुखों की एक संयुक्त बैठक आयोजित की जाएगी।
  2. आम सहमति का प्रयास: इस बैठक के जरिए पूरे मामले में ग्रामीणों के बीच एक सर्वमान्य आम सहमति (Consensus) बनाने का प्रयास होगा।
  3. फाइनल टेबल टॉक: ग्रामीणों की आम सहमति बनने के बाद, उनका प्रतिनिधिमंडल दोबारा प्राधिकरण के आला अफसरों के साथ बैठेगा और लोकहित को ध्यान में रखते हुए अंतिम समाधान निकाला जाएगा।

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