भ्रामक खबरों और डीपफेक से निपटेंगे चुनाव अधिकारी, थमेगा फर्जी सूचनाओं का बाजार

नई दिल्ली/रायपुर, 4 जुलाई 4 जुलाई ।

IIIDEM नई दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय सम्मेलन में छत्तीसगढ़ के सभी 33 जिलों के PROs सहित देश भर के 260+ अधिकारी हुए शामिल

डिजिटल युग में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और डीपफेक के बढ़ते खतरों के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने कमर कस ली है। चुनाव प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी और सुरक्षित रखने के लिए नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (IIIDEM) में मीडिया एवं संचार अधिकारियों के लिए ‘दूसरे एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया।

​शुक्रवार (3 जुलाई) को हुए इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में देश के 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 260 से अधिक मीडिया नोडल अधिकारियों, सोशल मीडिया विशेषज्ञों और जनसंपर्क अधिकारियों ने हिस्सा लिया। छत्तीसगढ़ के लिए यह सम्मेलन बेहद खास रहा, क्योंकि इसमें राज्य के सहायक मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी और अपर संचालक (जनसंपर्क विभाग) के साथ-साथ प्रदेश के सभी 33 जिलों के जिला जनसंपर्क अधिकारियों (PROs) ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई।

​मुख्य चुनाव आयुक्त का कड़ा संदेश: “फर्जी खबरों पर लगाएं अंकुश”

​सम्मेलन को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने साफ किया कि भारत निर्वाचन आयोग की हर कार्रवाई संविधान, कानून और पारदर्शिता के दायरे में होती है। उन्होंने अधिकारियों को सोशल मीडिया पर तैरने वाली भ्रामक और फर्जी सूचनाओं (Fake News) के प्रति बेहद सतर्क रहने की हिदायत दी।

​”सोशल मीडिया पर फैलने वाले भ्रम को रोकने का एकमात्र तरीका है- तथ्यात्मक और सही जानकारी का तेजी से प्रसार करना। अधिकारी इसमें अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।”

श्री ज्ञानेश कुमार, मुख्य चुनाव आयुक्त

​सीईसी ने हालिया विधानसभा चुनावों में हुए रिकॉर्ड मतदान का जिक्र करते हुए कहा कि यह इस बात का सबूत है कि भारतीय मतदाताओं का देश की लोकतांत्रिक और निर्वाचन प्रणाली पर अटूट भरोसा है।

​AI और डीपफेक की चुनौती से निपटना बड़ी प्राथमिकता: डॉ. विवेक जोशी

​चुनाव आयुक्त डॉ. विवेक जोशी ने अपने संबोधन में डिजिटल दुनिया की नई चुनौतियों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज के दौर में एआई (AI), डीपफेक और मैनिपुलेटेड (भ्रामक) डिजिटल कंटेंट चुनाव की निष्पक्षता के लिए बड़ी चुनौती हैं।

  • गाइडलाइंस का कड़ाई से पालन: डॉ. जोशी ने अधिकारियों से आयोग के दिशा-निर्देशों के अनुरूप इन डिजिटल खतरों का डटकर मुकाबला करने का आह्वान किया।
  • युवाओं पर फोकस: उन्होंने चुनावी साक्षरता क्लबों (Electoral Literacy Clubs) को और मजबूत करने पर जोर दिया ताकि देश के युवा मतदाताओं को सीधे निर्वाचन प्रक्रिया से जोड़ा जा सके।

​इन खास विषयों पर हुआ तकनीकी मंथन

​दिनभर चले इस सम्मेलन में अधिकारियों को चुनावी मैनेजमेंट के आधुनिक गुर सिखाए गए। इसके तहत कई व्यावहारिक और तकनीकी सत्र आयोजित किए गए:

  • वोटर लिस्ट और मतगणना: मतदाता सूची प्रबंधन से लेकर मतदान और मतगणना प्रक्रिया की बारीकियाँ।
  • टेक और कानून: ईसीआईनेट (ECINet) का उपयोग, संवैधानिक और विधिक प्रावधान।
  • मीडिया मैनेजमेंट: असरदार प्रेस विज्ञप्ति लेखन, सोशल मीडिया का सटीक उपयोग और क्राइसिस मैनेजमेंट।
  • प्रैक्टिकल डेमो: प्रतिभागियों को समूहों में बांटकर निर्वाचन प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रदर्शन कराया गया। साथ ही वहां लगी प्रदर्शनी और मीडिया कॉर्नर का अवलोकन भी कराया गया।

अनुभवों का आदान-प्रदान: कार्यक्रम के अंत में हाल ही में चुनाव संपन्न कराने वाले राज्यों के अधिकारियों ने अपने जमीनी अनुभव और ‘बेस्ट प्रैक्टिसेज’ साझा किए। सम्मेलन का समापन भारत निर्वाचन आयोग के शीर्ष अधिकारियों और प्रतिभागियों के बीच एक जीवंत प्रश्नोत्तर (Q&A) सत्र के साथ हुआ।

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