मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान से छत्तीसगढ़ में जल क्रांति, मानसून की फुहारों से लबालब हुए तालाब और डबरियां

रायपुर, 4 जुलाई।

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल रंग लाई; 15 हजार से अधिक आजीविका डबरियां और 700 नवा तरिया बने ग्रामीण समृद्धि का नया आधार

जल संरक्षण पर खर्च हुए ₹1,600 करोड़, ग्रामीण आजीविका और खेती को मिली नई रफ्तार

छत्तीसगढ़ में मानसून की धुआंधार एंट्री के साथ ही राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी ‘मोर गांव-मोर पानी’ महाअभियान के सकारात्मक और चमत्कारी परिणाम जमीन पर दिखने लगे हैं। पिछले कुछ दिनों से प्रदेश भर में हो रही झमाझम बारिश के कारण अभियान के तहत निर्मित की गई हजारों आजीविका डबरियां, नवा तरिया (नए तालाब) और अन्य जल संरक्षण संरचनाएं तेजी से पानी से लबालब हो रही हैं। इस जल क्रांति से न केवल ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट दूर हो रहा है, बल्कि खेती-किसानी और आजीविका गतिविधियों को भी एक नई संजीवनी मिल गई है।

जल संचयन के साथ खुलेगा कमाई का जरिया

​मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की मंशानुरूप प्रदेश में जल संकट से निपटने और ग्रामीणों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चौतरफा प्रयास किए जा रहे हैं। अभियान के तहत निर्मित 15 हजार से अधिक आजीविका डबरियां इस समय वर्षा जल का प्रभावी संचयन कर रही हैं। इसके साथ ही, ‘नवा तरिया–आय के जरिया’ पहल के अंतर्गत विकसित किए गए 700 से अधिक सामुदायिक तालाब पानी से ऊपर तक भर चुके हैं।

​प्रशासन का मानना है कि इन स्थायी जल स्रोतों के माध्यम से आने वाले दिनों में ग्रामीण क्षेत्रों में मत्स्य पालन (मछली पालन), सिंचाई, फल-सब्जी की बागवानी तथा अन्य आयवर्धक गतिविधियों को भारी बढ़ावा मिलेगा, जिससे ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी।

“हमारा उद्देश्य केवल जल संरचनाओं का निर्माण करना नहीं, बल्कि उन्हें ग्रामीण समृद्धि का स्थायी आधार बनाना है। मानसून की शुरुआत के साथ इन संरचनाओं में पानी भरने से साफ है कि यह अभियान जल संरक्षण के साथ-साथ रोजगार और ग्रामीण विकास को नई गति दे रहा है।”

— राज्य सरकार प्रवक्ता

आंकड़ों की नजर में महाअभियान की सफलता

प्रमुख घटकउपलब्धि / निवेश
कुल निर्मित जल संरचनाएं1 लाख से अधिक
आजीविका डबरियां15,000 से अधिक
नवा तरिया (सामुदायिक तालाब)700 से अधिक
महात्मा गांधी नरेगा के तहत व्यय₹1,600 करोड़ से अधिक
वीबीजी रामजी योजना के तहत कार्य318 अनुमोदित (108 जल संरक्षण से जुड़े)

वीबीजी रामजी योजना’ से मिली जल संवर्धन को रफ्तार

​राज्य सरकार जल संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसी कड़ी में 1 जुलाई से प्रदेश में लागू की गई ‘वीबीजी रामजी योजना’ के अंतर्गत भी जल स्रोतों के विकास कार्यों को तेज कर दिया गया है। इस योजना के तहत कुल 318 कार्यों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से 108 कार्य सीधे तौर पर जल संरक्षण एवं जल संवर्धन से संबंधित हैं। इन कार्यों के पूरा होने से वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सकेगा, जिससे भू-जल स्तर (Groundwater Level) में सुधार होगा और ग्रामीण आजीविका को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।

₹1,600 करोड़ की लागत से संवर रहा ग्रामीण परिवेश

​’मोर गांव–मोर पानी’ अभियान की शुरुआत के बाद से अब तक पूरे छत्तीसगढ़ में एक लाख से अधिक जल संरक्षण और संवर्धन संबंधी ढांचों का निर्माण किया जा रहा है। इन दूरगामी विकास कार्यों पर महात्मा गांधी नरेगा (मनरेगा) के माध्यम से अब तक 1,600 करोड़ रुपये से अधिक की भारी-भरकम राशि खर्च की जा चुकी है।

​मानसून की इस शुरुआती बारिश ने यह साबित कर दिया है कि साय सरकार का यह महाअभियान आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में जल सुरक्षा, कृषि के विस्तार और रोजगार सृजन की दिशा में एक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है।

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