रायपुर, 4 जुलाई। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व वाली सरकार ने वन्यजीव तस्करों और शिकारियों के खिलाफ अपनी नीति साफ कर दी है। राज्य में ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत वन विभाग और छत्तीसगढ़ राज्य वन विकास निगम ने मिलकर अवैध शिकारियों के खिलाफ एक बड़ा और बेहद आक्रामक अभियान छेड़ रखा है।
इसी कड़ी में कवर्धा परियोजना मंडल ने एक बड़ी और सनसनीखेज कामयाबी हासिल की है। टीम ने एक नर चीतल के अवैध शिकार के मामले में तत्परता दिखाते हुए 7 आरोपियों को रंगे हाथों गिरफ्तार कर सीधे जेल की सलाखों के पीछे पहुंचा दिया है।

🚨 मुखबिर की सटीक सूचना: जाल बिछाकर बैठे शिकारियों को घेरा
यह पूरी कामयाबी वन विकास निगम के बोड़ला परियोजना परिक्षेत्र के भलपहरी बीट स्थित जंगलों में मिली। जानकारी के अनुसार, बेखौफ शिकारियों ने जंगल के भीतर जाल बिछाकर लगभग 3 वर्ष के एक मासूम नर चीतल को अपना शिकार बनाया था। शिकारी इतने दुस्साहसी थे कि वे चीतल को मारने के बाद जंगल में ही उसका मांस पकाकर आपस में बांटने की तैयारी में डूबे हुए थे।
तभी मुखबिर के अचूक तंत्र ने वन विकास निगम को इसकी भनक दे दी। सूचना मिलते ही निगम की टीम हरकत में आई और बिना एक पल गंवाए बेहद योजनाबद्ध तरीके से पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी। टीम ने ऐसी सटीक दबिश दी कि शिकारियों को भागने तक का मौका नहीं मिला और सातों आरोपी रंगे हाथों धर दबोचे गए।
🍖 कुल्हाड़ी, फंदे और खून से सना थैला… मौके से भारी जब्ती
वन अमले ने जब मौके की तलाशी ली, तो वहां का नजारा देखकर उनके भी होश उड़ गए। कार्रवाई के दौरान आरोपियों के कब्जे से भारी मात्रा में शिकार की सामग्री और सबूत जब्त किए गए, जिनमें शामिल हैं:
- पका हुआ मांस: लगभग 500 ग्राम पका हुआ चीतल का मांस।
- शिकार के औजार: 3 कुल्हाड़ियां, स्टील के तार और लकड़ी से बने घातक फंदे।
- अन्य सामग्री: नायलॉन की रस्सी और खून से सना एक थैला।
पकड़े गए सभी 7 आरोपियों के खिलाफ वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की विभिन्न संगीन धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। कोर्ट में पेशी के बाद न्यायालय ने सभी को जेल भेज दिया है।
👁️ अभेद्य बना सूचना तंत्र: सघन गश्त से थर-थर कांप रहे शिकारी
छत्तीसगढ़ के संवेदनशील और घने जंगलों में अब शिकारियों के लिए पैर रखना भी मुमकिन नहीं होगा। वन विभाग और वन विकास निगम ने संवेदनशील क्षेत्रों में नियमित गश्त, अत्याधुनिक निगरानी व्यवस्था और मजबूत सूचना तंत्र का ऐसा चक्रव्यूह तैयार किया है, जिसने वन्यजीव अपराधियों की कमर तोड़ दी है। विभाग की इसी चौतरफा सतर्कता और क्विक-रिस्पॉन्स का नतीजा है कि आज शिकारी अपनी हरकतों को अंजाम देने से पहले ही दबोचे जा रहे हैं।
💬 “प्रकृति और वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाया, तो भुगतनी होगी कठोर सजा”
”हमारी सरकार प्राकृतिक संसाधनों और वन्यजीवों के संरक्षण के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। वन्यजीवों का अवैध शिकार करने या छत्तीसगढ़ की समृद्ध प्राकृतिक संपदा को नुकसान पहुंचाने वाले किसी भी अपराधी को बख्शा नहीं जाएगा। कानून के तहत उनके खिलाफ सबसे कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जा रही है।”
— श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़
📞 वन मंत्री केदार कश्यप की जनता से अपील: “बनें वन्यजीवों की ढाल”
इस बड़ी कार्रवाई के बाद वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने विभागीय अधिकारियों को आधुनिक निगरानी और गश्त और तेज करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश की जनता से एक भावुक और जिम्मेदार अपील की है:
”प्रदेश की समृद्ध वन्यजीव संपदा और जैव विविधता को बचाना सिर्फ सरकार की नहीं, हम सबकी जिम्मेदारी है। यदि आपको कहीं भी अवैध शिकार, फंदे लगाने या किसी भी वन अपराध की भनक लगे, तो बिना डरे तत्काल वन विभाग को इसकी सूचना दें। आपकी एक सही सूचना बेजुबान वन्यजीवों की जान बचा सकती है।”
