​’साय’ का सुशासन, लापरवाही पर कड़ा एक्शन: प्रसूता की जान से खिलवाड़ करने वाले DD अस्पताल का OT-ICU सील, लाइसेंस भी निरस्त!

जीपीएम/रायपुर, 4 जुलाई।

सख्त संदेश: साय सरकार का बड़ा एक्शन; प्रसूता की जान से खिलवाड़ करने वाले डी.डी. अस्पताल का ‘ओटी और आईसीयू’ सील

…तो बख्शे नहीं जाएंगे लापरवाही के गुनहगार! कलेक्टर ने तत्काल प्रभाव से अस्पताल का लाइसेंस भी किया सस्पेंड

कड़ा प्रहार: आयुष्मान योजना में अवैध वसूली और बिना डॉक्टरों के गंभीर मरीजों के इलाज का भंडाफोड़, स्वास्थ्य महकमे में हड़कंप

छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के ‘सुशासन’ और ‘जवाबदेह प्रशासन’ की धमक अब साफ दिखाई देने लगी है। जनता के स्वास्थ्य और जिंदगी को दांव पर लगाने वाले निजी अस्पतालों के खिलाफ सरकार ने अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का ट्रेलर दिखा दिया है। गौरेला-पेंड्रा-मरवाही (GPM) जिले के सेमरा स्थित डी.डी. अस्पताल में प्रसूता के इलाज में बरती गई खौफनाक लापरवाही के बाद, जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी और कड़क दंडात्मक कार्रवाई की है।

​कलेक्टर एवं पर्यवेक्षी प्राधिकारी डॉ. संतोष कुमार देवांगन ने ‘छत्तीसगढ़ राज्य उपचर्यागृह एवं रोगोपचार संबंधी स्थापनाएं अनुज्ञापन अधिनियम, 2020’ के तहत हंटर चलाते हुए अस्पताल के ऑपरेशन थियेटर (OT) और आईसीयू (ICU) को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया है। इसके साथ ही अस्पताल के लाइसेंस को भी अस्थायी रूप से निरस्त (सस्पेंड) कर दिया गया है।

🔴 ग्राउंड रिपोर्ट: आखिर क्यों सुलग उठा था जनता का आक्रोश?

​यह पूरा मामला 22 जून 2026 का है, जब जिला अस्पताल से गंभीर हालत में सिम्स बिलासपुर रेफर की गई प्रसूता ज्योति सोनवानी के इलाज में डी.डी. अस्पताल ने भारी लापरवाही बरती। पीड़िता की जान खतरे में डालने की इस घटना के बाद परिजनों और आम नागरिकों का गुस्सा फूट पड़ा। जनता की चीख-पुकार को गंभीरता से लेते हुए जिला प्रशासन ने आनन-फानन में स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच टीम गठित कर अस्पताल पर धावा बोला।

🚨 जांच में खुली पोल: ‘भगवान’ के घर में चल रहा था मौत का खेल!

​मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) और सिविल सर्जन की अगुवाई में जब जांच टीम ने अस्पताल के दस्तावेजों और व्यवस्थाओं को खंगाला, तो होश उड़ाने वाली कड़वी सच्चाई सामने आई:

गंभीर अनियमितताजांच टीम की चौंकाने वाली रिपोर्ट
विशेषज्ञों का अकालएक्लेम्प्सिया जैसी जानलेवा बीमारी से पीड़ित प्रसूता का इलाज किया जा रहा था, लेकिन अस्पताल में न तो कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) थी और न ही एनेस्थेटिस्ट।
राम भरोसे मरीजक्रिटिकल केयर और ऑपरेशन के बाद मरीजों की देखभाल (Post-Operative Care) के लिए कोई प्रशिक्षित नर्सिंग स्टाफ या वेंटिलेटर/लाइफ सपोर्ट जैसे जरूरी संसाधन ही नहीं थे।
आयुष्मान में ‘डाका’गरीबों के मुफ्त इलाज के लिए बनी ‘आयुष्मान भारत योजना’ के लाभार्थियों की लाचारी का फायदा उठाकर अस्पताल प्रबंधन उनसे अतिरिक्त पैसों की अवैध वसूली कर रहा था।
एक और शिकारजांच के दौरान यह भी खुलासा हुआ कि ज्योति सोनवानी के अलावा एक अन्य गंभीर प्रसूता के इलाज में भी इसी तरह की आपराधिक लापरवाही की गई थी।

झूठे दावों की खुली कलई, SP को भेजी गई रिपोर्ट

​प्रशासन ने कार्रवाई से पहले अस्पताल प्रबंधन को ‘कारण बताओ नोटिस’ जारी कर सुधरने का मौका दिया था। लेकिन शातिर प्रबंधन ने जो जवाब दाखिल किया, वह जांच में पूरी तरह झूठा और मनगढ़ंत साबित हुआ। नियमों की सरेआम धज्जियां उड़ाने वाले इस अस्पताल को सबक सिखाते हुए कलेक्टर ने सीधे तालाबंदी का आदेश जारी कर दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए आदेश की कॉपी स्वास्थ्य विभाग के आला अफसरों सहित पुलिस अधीक्षक (SP) को भी भेज दी गई है, जिससे प्रबंधन पर आपराधिक केस दर्ज होने का रास्ता भी साफ हो गया है।

⚡ ‘साय’ सरकार की दो टूक: जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले सीधे नपेंगे

​इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि छत्तीसगढ़ में अब रसूखदारों की मनमानी नहीं चलेगी। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का प्रशासन पूरी पारदर्शिता और कड़ाई के साथ काम कर रहा है। सरकार का यह एक्शन प्रदेश के उन सभी निजी अस्पतालों के लिए एक सख्त चेतावनी है जो इलाज के नाम पर सिर्फ दुकानदारी चला रहे हैं। शासन ने स्पष्ट संदेश दे दिया है—“मरीजों की सुरक्षा सर्वोपरि है; जहां लापरवाही मिलेगी, वहां सिर्फ और सिर्फ कानूनी चाबुक चलेगा।”

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