तंगहाली को पछाड़ ‘पशु सखी’ तैलासो ने रची कामयाबी की नई इबारत: ‘बिहान’ के दम पर हर महीने ₹15,000 की कमाई, बच्चों को दे रहीं उच्च शिक्षा

विशेष कवरेज: महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल

रायपुर/अंबिकापुर, 04 जून 2026

​’बिहान’ की ‘पशु सखी’ ने बदली ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर: तंगहाली को पछाड़ तैलासो कमा रहीं ₹15 हजार महीना, अब खेतों में लहराएगी धान और सब्जियों की फसल

​छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) सिर्फ एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण महिलाओं के आर्थिक स्वावलंबन और सामाजिक क्रांति का सबसे बड़ा हथियार बन चुका है। सरगुजा जिले के अंबिकापुर विकासखंड की तैलासो राजवाड़े ने इस क्रांति को धरातल पर सच कर दिखाया है। महादेव स्वयं सहायता समूह और रोशनी ग्राम संगठन से जुड़ी तैलासो आज ‘पशु सखी’ के रूप में क्षेत्र के पशुपालकों के लिए संकटमोचक और अपने परिवार के लिए वित्तीय रीढ़ की हड्डी बन चुकी हैं।

​₹15,000 की मासिक आय: आर्थिक तंगहाली पर आखिरी प्रहार

​एक समय था जब कमजोर आर्थिक स्थिति के कारण तैलासो के परिवार को कदम-कदम पर समझौते और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। लेकिन पिछले दो वर्षों से ‘पशु सखी’ के रूप में काम करते हुए उन्होंने न केवल इस गतिरोध को तोड़ा, बल्कि हर महीने 10 से 15 हजार रुपये की स्थायी आय सुनिश्चित की। आज वे बिना किसी वित्तीय दबाव के अपने तीन बच्चों को उच्च शिक्षा दिला रही हैं—जिसमें बड़ा बेटा 12वीं, दूसरा 10वीं और सबसे छोटा 8वीं कक्षा में पढ़ रहा है।

​पशुधन की रक्षक: गांव-गांव में फैलाया जागरूकता का उजियारा

​तैलासो ने केवल अपनी किस्मत नहीं बदली, बल्कि पूरे संकुल की पशुपालन व्यवस्था को सुधार दिया है। कृषि विज्ञान केंद्र से विशेष तकनीकी प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद, वे बकरियों के स्वास्थ्य प्रबंधन, समय पर टीकाकरण और मौसमी बीमारियों से बचाव के लिए पशुपालकों को जागरूक कर रही हैं। उनके इस वैज्ञानिक दृष्टिकोण के कारण क्षेत्र में पशुओं की मृत्यु दर में भारी कमी आई है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों की आय में भी इजाफा हुआ है।

“बिहान योजना ने मुझे सिर्फ पैसा नहीं, बल्कि समाज में सिर उठाकर जीने का हौसला, सम्मान और आत्मविश्वास दिया है। आज मैं गर्व से कह सकती हूं कि मैं आत्मनिर्भर हूं।”

तैलासो राजवाड़े, पशु सखी (सरगुजा)

​धान की खेती से सब्जी उत्पादन तक: हौसलों की नई उड़ान

​तैलासो की सफलता केवल पशुपालन तक सीमित नहीं है। बिहान योजना से मिले वित्तीय अवसरों और अपनी सूझबूझ का इस्तेमाल कर उन्होंने अपने खेत में बोरवेल (बोर) खुदवाया है। अब वे पारंपरिक धान की खेती को आधुनिक तरीके से कर रही हैं। इतना ही नहीं, उनका अगला लक्ष्य बड़े पैमाने पर सब्जी उत्पादन शुरू करना है, जिससे उनकी मासिक आय दोगुनी होने की उम्मीद है।

​व्यवस्था को सुझाव: “मिले और बेहतर संसाधन, तो रचेंगे नया इतिहास”

​अपनी सफलता के लिए प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए तैलासो ने प्रशासन के सामने एक विजनरी (दूरदर्शी) प्रस्ताव भी रखा है। उनका कहना है कि यदि मैदानी स्तर पर काम कर रहीं सभी पशु सखियों को नियमित उन्नत प्रशिक्षण और अत्याधुनिक टीकाकरण संसाधन उपलब्ध करा दिए जाएं, तो ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन को एक संगठित उद्योग का रूप दिया जा सकता है।

समाचार विश्लेषण (News Analysis): क्यों खास है तैलासो की यह सफलता?

  • महिला सशक्तिकरण का रोल मॉडल: पुरुष प्रधान माने जाने वाले कृषि और पशुपालन क्षेत्र में एक महिला का तकनीकी विशेषज्ञ (पशु सखी) के रूप में उभरना रूढ़ियों को तोड़ता है।
  • रूरल इकॉनमी को बूस्ट: इस तरह के जमीनी प्रयास सीधे तौर पर ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) को मजबूत करते हैं, जिससे शहरों की ओर पलायन रुकता है।
  • शिक्षा में निवेश: महिला की आय का सीधा असर बच्चों की बेहतर शिक्षा पर दिख रहा है, जो आने वाली पीढ़ी के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है।

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