अमित शाह और शिवराज सिंह की समीक्षा के बाद मुख्यमंत्री साय ने दिए कड़े निर्देश- “सूखे की आशंका वाले क्षेत्रों पर रखें पैनी नजर, किसानों को न हो कोई तकलीफ”
रायपुर/नई दिल्ली 5 जुलाई । देश के कुछ हिस्सों में अल-नीनो (El Niño) के असर और कम बारिश की आशंका को देखते हुए केंद्र और राज्य सरकार पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई हैं। नई दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा ली गई हाई-लेवल समीक्षा बैठक के तुरंत बाद छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने राज्य में मोर्चा संभाल लिया है। ‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले छत्तीसगढ़ के किसानों के हितों की रक्षा के लिए मुख्यमंत्री ने कृषि और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों को कड़े और स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए हैं।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने साफ कहा है कि केंद्र सरकार की मंशानुरूप छत्तीसगढ़ का एक भी किसान संकट में नहीं रहना चाहिए। मानसून की हर हलचल और जलाशयों के जलस्तर की रोजाना रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
दिल्ली की बैठक के बड़े फैसले और साय सरकार का एक्शन प्लान:
- जलाशयों और भूजल की चौबीसों घंटे निगरानी: दिल्ली में अमित शाह ने जलाशयों की मॉनिटरिंग के निर्देश दिए, जिस पर अमल करते हुए CM साय ने राज्य के सभी प्रमुख बांधों (जैसे गंगरेल, हसदेव बांगो) और ग्राउंड वाटर लेवल की सख्त निगरानी के आदेश दिए हैं, ताकि सिंचाई के लिए पानी का सही प्रबंधन हो सके।
- कम पानी वाली फसलों पर जोर (मिलेट मिशन को मिलेगी रफ्तार): बैठक में कम पानी वाली फसलों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री साय पहले ही मिलेट्स (मोटे अनाज) और दलहन-तिलहन को बढ़ावा दे रहे हैं। अब कम बारिश की आशंका वाले क्षेत्रों में किसानों को वैकल्पिक फसलों के बीज और तकनीक तुरंत मुहैया कराई जाएगी।
- सूखे से निपटने की एडवांस प्लानिंग: राज्य के जिन ब्लॉक या जिलों में सामान्य से कम वर्षा की स्थिति बन रही है, वहां के लिए कृषि विभाग ‘आकस्मिक योजना’ (Contingency Plan) तैयार रखेगा ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत पहुंचाई जा सके।
”किसान हित सर्वोपरि, हर परिस्थिति से निपटने को तैयार”- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय
मुख्यमंत्री का संकल्प: “हमारी सरकार किसानों की अपनी सरकार है। दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों द्वारा की गई समीक्षा के बाद हम छत्तीसगढ़ में पूरी तरह सतर्क हैं। अल-नीनो या कम बारिश के कारण यदि कोई चुनौती आती है, तो सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। किसानों को खाद, बीज, पानी या बिजली की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी। हमारी पूरी टीम ग्राउंड जीरो पर नजर रखे हुए है।”
छत्तीसगढ़ के संदर्भ में क्यों अहम है यह कदम?
छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था का सबसे बड़ा और मजबूत स्तम्भ किसान ही हैं। खरीफ सीजन में धान की बुआई का काम तेजी से चल रहा है। ऐसे में केंद्र की दूरगामी सोच और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की त्वरित सक्रियता ने किसानों की चिंता को काफी हद तक कम कर दिया है। सरकार का यह तालमेल बस्तर से लेकर सरगुजा तक के अन्नदाताओं के लिए बड़ी राहत लेकर आएगा।
संपादकीय टिप्पणी: दिल्ली से रायपुर तक सरकार की यह तत्परता बताती है कि इस बार संकट आने का इंतजार नहीं किया जा रहा, बल्कि संकट से निपटने की तैयारी पहले ही कर ली गई है। मुख्यमंत्री साय का यह ‘प्रो-एक्टिव’ अंदाज राज्य के किसानों के चेहरे पर सुकून लाने वाला है।
