​’विकसित छत्तीसगढ़’ का महासंकल्प: चिंतन शिविर 3.0 में बना सुशासन और तकनीक का ‘मास्टरप्लान’

रायपुर, 6 जुलाई।

​* मुख्यमंत्री साय का बड़ा बयान- “सिर्फ कागजों या चर्चाओं में नहीं, धरातल पर नतीजे दे रही है सरकार”

​* देश के दिग्गज नीति-विशेषज्ञों और मंत्रियों के 2-दिवसीय मंथन से निकला 2047 का विज़न

​* बस्तर को ग्लोबल टूरिज्म मैप पर लाने और ‘डिस्ट्रिक्ट जीडीपी’ से छोटे शहरों की सूरत बदलने पर मुहर

रायपुर, 6 जुलाई।

छत्तीसगढ़ को देश का सबसे अग्रणी और सुशासित राज्य बनाने के संकल्प के साथ आयोजित दो दिवसीय हाई-प्रोफाइल ‘चिंतन शिविर 3.0’ का सोमवार को शानदार और नीतिगत समापन हो गया। सुशासन एवं अभिसरण विभाग तथा भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) रायपुर के संयुक्त तत्वावधान में हुए इस महामंथन में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, पूरी कैबिनेट और देश के शीर्ष नीति विशेषज्ञों ने राज्य के विकास का ऐसा अभेद्य रोडमैप तैयार किया है, जो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की दशा और दिशा बदल देगा।

​समापन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने दोटूक शब्दों में कहा कि यह चिंतन शिविर केवल बौद्धिक विमर्श या विचारों के आदान-प्रदान का मंच नहीं है, बल्कि यह प्रशासनिक व्यवस्था को पूरी तरह से बदलने और ठोस सुधारों को लागू करने का सबसे प्रभावी माध्यम बन चुका है। उन्होंने साफ किया कि उनकी सरकार आधुनिक, पारदर्शी, पूरी तरह से तकनीक-संचालित और जनता की हर आकांक्षा के प्रति जवाबदेह प्रशासन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

​🚀 विचार से परिणाम तक: साय सरकार के 3 गेम-चेंजर कदम

​मुख्यमंत्री ने विपक्ष और जनता के सामने पिछले दो शिविरों से निकले जमीनी बदलावों का रिपोर्ट कार्ड भी पेश किया:

  • ई-ऑफिस क्रांति: मंत्रालय में फाइलों के लटकने का दौर खत्म; अब निपटारा तेज, पारदर्शी और समयबद्ध।
  • सीएम हेल्पलाइन 1076: आम आदमी की शिकायतों का सीधे और त्वरित समाधान, बिचौलियों का अंत।
  • सेवा सेतु पोर्टल: 36 विभागों की 520 से अधिक सरकारी सेवाएं अब सीधे जनता की उंगलियों पर (ऑनलाइन) उपलब्ध।

​🏔️ अंतरराष्ट्रीय पर्यटन का नया गढ़ बनेगा बस्तर

​शिविर के सबसे महत्वपूर्ण सत्र ‘सतत समृद्धि के इंजन के रूप में पर्यटन’ में वरिष्ठ आईएएस और वैश्विक पर्यटन नीति विशेषज्ञ श्री सुमन बिल्ला ने छत्तीसगढ़ को देश का नंबर-1 ‘हाई-वैल्यू, लो-इम्पैक्ट’ टूरिज्म डेस्टिनेशन बनाने का प्लान रखा।

  • ग्लोबल मैप पर बस्तर: केंद्र और राज्य के अभूतपूर्व समन्वय से बस्तर की नक्सल प्रभावित छवि को बदलकर उसे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया जाएगा।
  • औद्योगिक नीति का बूस्टर: छत्तीसगढ़ की नई औद्योगिक नीति को इस तरह डिजाइन किया जाएगा कि पर्यटन क्षेत्र में देश-विदेश से भारी-भरकम निवेश आए।

​📊 ‘डिस्ट्रिक्ट जीडीपी’: आर्थिक विकास का नया विकेंद्रीकृत मॉडल

​लोकसभा सदस्य श्री शशांक मणि त्रिपाठी ने ‘सबका प्रयास से विकासपरक राजनीति’ सत्र में एक क्रांतिकारी दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि “जिला ही विकास का वास्तविक केंद्र (District is the Fulcrum of Growth) होना चाहिए।”

  • ​हर जिले के पास अब अपनी स्थानीय क्षमता के आधार पर विकास की रणनीति होगी।
  • ​राज्य में पहली बार ‘डिस्ट्रिक्ट जीडीपी’ (District GDP) आधारित नियोजन लागू करने पर बल दिया गया, जो टियर-2 और टियर-3 (छोटे और मध्यम) शहरों में उद्यमिता, स्थानीय नवाचार और रोजगार की बाढ़ ला देगा।

​🤖 एआई और 5जी से चलेगा डिजिटल गवर्नेंस

​नीति आयोग के सदस्य प्रो. अभय करंदीकर ने छत्तीसगढ़ के लिए ‘फ्यूचरिस्टिक गवर्नेंस’ का खाका खींचा। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, 5G, ड्रोन और ब्लॉकचेन तकनीक के जरिए छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक ढांचे को देश में सबसे आधुनिक और भ्रष्टाचार-मुक्त बनाया जा सकता है। इससे न केवल पारदर्शिता आएगी, बल्कि युवाओं के लिए नए तकनीकी रोजगार भी पैदा होंगे।

​🌾 प्राकृतिक खेती और मूल्य संवर्धन से समृद्ध होंगे किसान

​’कृषि से समृद्धि’ सत्र में देश के जाने-माने कृषि अर्थशास्त्री डॉ. रमेश चंद और कृषि विशेषज्ञ टी. विजय कुमार ने राज्य की रीढ़ यानी किसानों की आय को सीधे तौर पर बढ़ाने का व्यावहारिक मॉडल दिया। विशेषज्ञों ने ‘क्लाइमेट-रेसिलिएंट’ (जलवायु-अनुकूल) खेती, फसल विविधीकरण, बड़े पैमाने पर प्राकृतिक खेती और उपज के मूल्य संवर्धन (Value Addition) के साथ सीधे वैश्विक बाजारों से जोड़ने की रणनीति बताई।

​💡 संवेदनशीलता और सुशासन की सीख

​शिविर की शुरुआत में प्रसिद्ध आध्यात्मिक चिंतक गौर गोपाल दास ने नेताओं और अधिकारियों को ‘मूल्य-आधारित नेतृत्व’ का मंत्र दिया, जबकि समापन सत्र में डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सुशासन मॉडल को राज्य में शत-प्रतिशत उतारने की रूपरेखा रखी।

संपादकीय टिप्पणी:

मंत्रिमंडल के गहन समूह-मंथन और देश के सर्वश्रेष्ठ नीतिगत दिमागों के इस ऐतिहासिक समागम से साफ है कि ‘चिंतन शिविर 3.0’ महज एक आयोजन नहीं, बल्कि ‘विकसित भारत 2047’ के राष्ट्रीय महायज्ञ में ‘विकसित छत्तीसगढ़’ की आहुति सुनिश्चित करने वाला एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। यहाँ लिए गए निर्णय बहुत जल्द सरकारी आदेशों और नीतियों के रूप में धरातल पर दिखाई देंगे।

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