विशेष ग्राउंड रिपोर्ट: ‘पीएम जनमन’ की सुरक्षित छत और ‘महतारी वंदन’ के सम्मान ने कैसे बदली छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर बैठी एक आदिवासी महिला की तकदीर

मुख्य ब्यूरो | रायपुर, 6 जुलाई 2026
जब सरकार की नीतियां केवल कागजी वादों और फाइलों के फेर से बाहर निकलकर समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की चौखट तक पहुंचती हैं, तो वे महज प्रशासनिक आंकड़े नहीं रहतीं। वे एक गरीब के आंसुओं को पोंछकर उसके जीवन में स्वाभिमान और तरक्की का नया अध्याय लिख देती हैं। छत्तीसगढ़ के गौरेला-पेंड्रा-मरवाही जिले के सुदूर ग्राम पंडरीपानी की श्रीमती सरिता बैगा का जीवन आज देश और प्रदेश के लिए सुशासन का एक ऐसा ही जीवंत और प्रेरक दस्तावेज बन चुका है।
केंद्र की ‘पीएम जनमन आवास योजना’ और राज्य की ‘महतारी वंदन योजना’ के महा-समन्वय (कन्वर्जेंस) ने इस विशेष पिछड़ी जनजाति (PVTG) परिवार को न सिर्फ एक पक्की छत दी है, बल्कि उन्हें आर्थिक तंगी के अंतहीन चक्रव्यूह से भी हमेशा के लिए आजाद कर दिया है।
बीता कल: जब बादलों की गड़गड़ाहट छीन लेती थी रातों की नींद
सरिता बैगा का अतीत एक ऐसी दास्तान था, जिसे याद कर आज भी उनकी आंखें नम हो जाती हैं। पूरा परिवार एक जर्जर, कच्ची खपरैल की झोपड़ी में रहने को अभिशप्त था। मानसून की आहट होते ही इस परिवार की सांसें अटक जाती थीं। टपकती छत, सीलन भरी दीवारें, कीचड़ से सना फर्श और बच्चों को जहरीले जीव-जंतुओं से बचाने की रात-दिन की जद्दोजहद—यही उनकी जिंदगी थी। हर साल बारिश से पहले कर्ज लेकर खपरैल बदलना और झोपड़ी की मरम्मत कराना उनकी नियति बन चुकी थी, जिससे वे कभी कर्ज के दलदल से बाहर नहीं आ पा रही थीं।
बदलाव का शंखनाद: मुख्यमंत्री की दृढ़ इच्छाशक्ति और मैदानी तत्परता
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में ‘सबका साथ, सबका विकास’ का संकल्प जब धरातल पर उतरा, तो सरिता बैगा के दिन भी बहुर गए। ‘पीएम जनमन आवास योजना’ के तहत उनके नाम पर एक सर्वसुविधायुक्त पक्के मकान की स्वीकृति मिली।
इस सपने को सच करने में ग्रामीण विकास विभाग, जनपद पंचायत गौरेला और ग्राम पंचायत के मैदानी अमले ने मिशन मोड पर काम किया। नतीजा आज सबके सामने है। सरिता का परिवार अब एक बेहद मजबूत और सुरक्षित पक्के घर में रह रहा है। अब बारिश का मौसम उनके लिए खौफ नहीं, बल्कि चाय की चुस्कियों के साथ सुकून और खुशियां लेकर आता है। उनके बच्चे अब कंदील या ढिबरी के धुएं में नहीं, बल्कि एक सुरक्षित और उजले माहौल में अपने सुनहरे भविष्य की पढ़ाई कर रहे हैं।
महतारी वंदन: सम्मान और आर्थिक आजादी की नई उड़ान
सिर पर पक्की छत मिलने के बाद, सरिता के जीवन की दूसरी सबसे बड़ी ताकत बनी राज्य सरकार की ‘महतारी वंदन योजना’। इस योजना के तहत हर महीने उनके बैंक खाते में सीधे पहुंचने वाली सम्मान राशि ने उन्हें घर के पुरुषों या साहूकारों पर निर्भर रहने की मजबूरी से मुक्त कर दिया है।
- घरेलू मोर्चे पर मजबूती: बच्चों की छोटी-मोटी जरूरतें, कॉपियां, दवाइयां और पोषण के लिए अब सरिता को सोचना नहीं पड़ता।
- सशक्तिकरण की मिसाल: इस राशि ने सरिता के भीतर यह आत्मविश्वास जगाया है कि वे भी अपने परिवार की रीढ़ बन सकती हैं। यह केवल वित्तीय सहायता नहीं, बल्कि एक महिला के श्रम और सम्मान की पहचान है।
“सरकार ने हमारे आंसुओं को मुस्कान में बदल दिया”
अपने नए पक्के घर के मुख्य द्वार पर हाथ रखे भावुक खड़ी सरिता बैगा कहती हैं— “हमने तो पीढ़ियों से सिर्फ अभाव ही देखा था। कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि हमारा भी ऐसा सुंदर पक्का घर होगा, जहां पानी नहीं टपकेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय जी और सरकार ने हमारे आंसुओं को मुस्कान में बदल दिया है। इस सरकार ने हमें सिर्फ घर नहीं, जीने का गौरव दिया है।”
संपादकीय दृष्टिकोण: वोटबैंक की राजनीति से ऊपर उठकर ‘अंत्योदय’ का असल मॉडल
ग्राम पंडरीपानी में सरिता बैगा के जीवन में आया यह क्रांतिकारी बदलाव छत्तीसगढ़ सरकार के ‘अंत्योदय’ (अंतिम व्यक्ति का उदय) के संकल्प का सबसे बड़ा प्रमाण है। योजनाओं का यह ‘डबल इंजन’ मॉडल यह साबित करता है कि जब प्रशासनिक पारदर्शिता, मैदानी अमले की सक्रियता और नेतृत्व की साफ नीयत एक साथ मिल जाएं, तो देश के सबसे दुर्गम इलाकों में रहने वाले आदिवासियों के जीवन स्तर को भी मुख्यधारा के समकक्ष लाया जा सकता है। यह समाचार इस बात की तस्दीक करता है कि बदलते छत्तीसगढ़ की बुनियाद अब मजबूत हो चुकी है।
