वनांचल बीजापुर का वैश्विक उदय: चेरपाल PHC को मिला राष्ट्रीय गुणवत्ता पदक (NQAS), देश के सर्वश्रेष्ठ अस्पतालों में शुमार

  • दशकों का पिछड़ापन धोकर चेरपाल ने रचा इतिहास; दिल्ली की NHSRC टीम भी रह गई दंग
  • नक्सल प्रभावित क्षेत्र में स्वास्थ्य क्रांति: 48 घंटे के कड़े इम्तिहान में हर कसौटी पर सौ फीसदी खरा उतरा अस्पताल
  • अब स्थानीय आदिवासियों को नहीं भटकना पड़ेगा बड़े शहरों की ओर; मुफ़्त मिलेगा कॉर्पोरेट स्तर का इलाज

विशेष ग्राउंड रिपोर्ट

रायपुर/बीजापुर, 06 जुलाई 2026

​छत्तीसगढ़ के अंतिम छोर पर बसे, घने जंगलों और भौगोलिक चुनौतियों से घिरे बीजापुर जिले से एक ऐसी खबर आई है, जिसने पूरे देश का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिला मुख्यालय से कुछ ही दूरी पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) चेरपाल ने राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानक (NQAS) का बेहद कड़ा और प्रतिष्ठित सर्टिफिकेट हासिल कर लिया है।

​यह सिर्फ एक सरकारी प्रमाण पत्र नहीं है, बल्कि यह इस बात का जीवंत दस्तावेज है कि अगर इरादे मजबूत हों, तो बंदूक की गूंज वाले इलाके में भी मानवता और सेवा की सबसे खूबसूरत इबारत लिखी जा सकती है। सुदूर वनांचल का यह अस्पताल अब देश के बड़े-बड़े महानगरों के कॉर्पोरेट अस्पतालों को टक्कर दे रहा है।

​## दशकों की सुध-बुध और दो दिनों का कड़ा इम्तिहान

​केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, नई दिल्ली की राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणाली संसाधन केंद्र (NHSRC) की एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ टीम ने बीते 03 और 04 जुलाई 2026 को इस दूरस्थ केंद्र का ऐतिहासिक और विस्तृत बाह्य मूल्यांकन किया।

​अस्पताल के भीतर कदम रखते ही दिल्ली से आए डॉक्टरों की टीम हैरान रह गई। दो दिनों तक चले इस गहन निरीक्षण में अस्पताल के चप्पे-चप्पे को परखा गया:

  1. संक्रमण मुक्त प्रसव कक्ष (Advanced Labour Room): प्रसूति माताओं के लिए सुरक्षित और पूरी तरह से संक्रमण-मुक्त वातावरण, जहाँ आधुनिक तकनीकों से प्रसव कराया जा रहा है।
  2. हाई-टेक प्रयोगशाला (Hi-Tech Lab): जहाँ मिनटों में खून, मलेरिया, टायफायड सहित दर्जनों गंभीर बीमारियों की जांच रिपोर्ट तैयार होती है।
  3. मरीज-अनुकूल ओपीडी और आईपीडी: मरीजों के बैठने की उत्तम व्यवस्था, डिजिटल पर्ची काउंटर, और साफ-सुथरे वार्ड जहां हर बिस्तर पर स्वच्छता की गारंटी है।
  4. सटीक दवा प्रबंधन (Drug Management): एक्सपायरी दवाओं से मुक्त और हर जरूरतमंद के लिए 24 घंटे मुफ्त जीवन रक्षक दवाओं का स्टॉक।

​## पर्दे के पीछे के नायक: मितानिन से लेकर CMHO तक का अटूट संगम

​इस ऐतिहासिक छलांग की कहानी किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि एक अभूतपूर्व ‘टीमवर्क’ की है। मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के रणनीतिक मार्गदर्शन और खंड चिकित्सा अधिकारी (BMO) के आक्रामक मैदानी नेतृत्व ने इस व्यवस्था को बदला।

​इस यज्ञ में आहुति देने वाले असली नायक हैं—दिन-रात दौड़ने वाले चिकित्सा अधिकारी, मरीजों को मां जैसा दुलार देने वालीं स्टाफ नर्सें, दवाओं का हिसाब रखने वाले फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, और गांवों के कोने-कोने से मरीजों को अस्पताल तक लाने वालीं सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी (CHO), ग्रामीण स्वास्थ्य अधिकारी (RHO) और मितानिन बहनें। इन सभी ने मिलकर मूल्यांकन दल के सामने वह रिकॉर्ड और व्यवस्थाएं पेश कीं, जिन्हें देखकर दिल्ली की टीम ने भी मुक्त कंठ से सराहना की।

बड़ा बदलाव: आंकड़ों और हकीकत की जुबानी

  • शून्य संक्रमण नीति: अस्पताल में संक्रमण दर को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप न्यूनतम स्तर पर लाया गया।
  • भरोसे की वापसी: पिछले कुछ महीनों में इस सरकारी केंद्र में मरीजों की आमद (Footfall) में 200% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है।
  • शत-प्रतिशत संस्थागत प्रसव: चेरपाल और आसपास के गांवों में अब घर पर प्रसव बीते दिनों की बात हो गई है, जिससे मातृ-शिशु मृत्यु दर में भारी गिरावट आई है।

​## ग्रामीणों के लिए वरदान: अब ‘चेरपाल’ ही है उनका ‘मेदान्ता और अपोलो’

​इस राष्ट्रीय मान्यता का सबसे बड़ा असर बीजापुर के उन गरीब और आदिवासी परिवारों पर पड़ेगा, जो इलाज के अभाव में दम तोड़ देते थे या जिन्हें कर्ज लेकर बड़े शहरों (जगदलपुर, रायपुर) का रुख करना पड़ता था।

​NQAS का तमगा मिलने का सीधा मतलब है कि अब चेरपाल PHC में इलाज की गुणवत्ता की गारंटी सीधे भारत सरकार दे रही है। यहां मिलने वाली सुविधाएं, स्वच्छता, डॉक्टरों का व्यवहार और दवाओं का स्तर अब किसी भी नामी प्राइवेट अस्पताल से कम नहीं होगा। इससे जनता का सरकारी तंत्र पर विश्वास कई गुना बढ़ गया है।

​## सुझावों का स्वागत: रुकेंगे नहीं, सफर अभी जारी है

​स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि यह सफलता अंतिम पड़ाव नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। दिल्ली की टीम ने अस्पताल को और अधिक आधुनिक बनाने के लिए जो कुछ व्यावहारिक सुझाव दिए हैं, उन पर युद्ध स्तर पर काम शुरू कर दिया गया है। बहुत जल्द इस अस्पताल में कुछ और नई विंग और आधुनिक मशीनें जोड़ी जाएंगी।

संपादकीय टिप्पणी: बीजापुर का यह मॉडल पूरे देश के लिए नजीर

चेरपाल PHC की यह कामयाबी छत्तीसगढ़ के पूरे स्वास्थ्य महकमे का सीना चौड़ा करने वाली है। यह इस बात का करारा जवाब है कि विकास की बयार अगर सही नीयत से चलाई जाए, तो वह घने जंगलों को चीरकर भी अपना रास्ता बना लेती है। बीजापुर का यह ‘चेरपाल मॉडल’ आज देश के हर उस जिले के लिए एक केस स्टडी (Case Study) है जो संसाधनों की कमी का रोना रोते हैं। सलाम है बीजापुर के इन स्वास्थ्य योद्धाओं को!

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