बस्तर का ‘दंश’ मिटाकर ‘देवा’ को मिला सम्मान: साय सरकार की पुनर्वास नीति ने बारूद के ढेर पर खिलाया उम्मीद का कमल

कलेक्टर दफ्तर की चौखट चूमेगा नक्सल पीड़ित का बेटा; अरनपुर के देवा मंडावी को सरकारी नौकरी, सातवें वेतनमान के साथ मिली ‘जिंदगी और गरिमा’

विशेष खोजी रिपोर्ट: रायपुर/दंतेवाड़ा, 7 जुलाई।

जो बस्तर कभी बंदूकों की गड़गड़ाहट और अपनों को खोने की चीखों के लिए जाना जाता था, आज उसी बस्तर की माटी से उम्मीद और न्याय की एक नई इबारत लिखी जा रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के अडिग इरादों और संवेदनशील नेतृत्व का ही असर है कि “छत्तीसगढ़ नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति-2025” कागजी फाइलों से बाहर निकलकर बस्तर के आदिवासियों के आंसू पोंछ रही है। इस नीति ने दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा के एक ऐसे ही पीड़ित युवा देवा मंडावी की जिंदगी की तकदीर और तस्वीर को हमेशा-हमेशा के लिए बदल दिया है।

अंधेरे को चीरकर कलेक्टोरेट तक पहुंचा देवा

​दंतेवाड़ा का कुआकोण्डा विकासखंड और वहां का ग्राम धुरवापारा (अरनपुर)… यह वो इलाका है जिसने दशकों तक नक्सलवाद का सबसे खौफनाक चेहरा देखा है। इसी गांव के देवा मंडावी ने बचपन से सिर्फ खौफ और अभाव देखा, क्योंकि उनके पिता स्वर्गीय बुधरा मंडावी नक्सल हिंसा की बलि चढ़ गए थे। पिता का साया उठने के बाद परिवार जिस तंगहाली और अनिश्चितता के दौर से गुजर रहा था, उसे साय सरकार की संवेदनशीलता ने थाम लिया।

​जिला स्तरीय पुनर्वास समिति की पुरजोर सिफारिश और दंतेवाड़ा कलेक्टर की त्वरित हरी झंडी के बाद देवा मंडावी को कलेक्टर कार्यालय (भू-अभिलेख शाखा), जिला दक्षिण बस्तर दंतेवाड़ा में भृत्य (चतुर्थ श्रेणी) के पद पर नियुक्त कर दिया गया है। जो हाथ कभी बेबसी में कांपते थे, वे अब शासकीय फाइलों पर मुहर लगाएंगे।

केवल रोजगार नहीं, सम्मान का पूर्ण पैकेज

​गृह (सी-अनुभाग) विभाग द्वारा 28 मार्च 2025 को जारी ऐतिहासिक अधिसूचना के तहत हुई यह नियुक्ति देवा के परिवार के लिए एक आर्थिक कवच की तरह है:

  • सम्मानजनक आय: सातवें वेतन आयोग के तहत वेतन मैट्रिक्स लेवल-01 का नियमित वेतन।
  • शासकीय सुरक्षा: शत-प्रतिशत महंगाई भत्ता और शासन के नियमानुसार मिलने वाली अन्य सभी जरूरी सुविधाएं।
  • स्थायित्व: अब देवा का भविष्य सुरक्षित है और उनका परिवार समाज में सिर उठाकर जी सकेगा।

क्यों मील का पत्थर है साय सरकार का यह फैसला?

पहलूबदलाव का नया स्वरूप
जख्मों पर मरहमहिंसा से पीड़ित परिवारों को यह अहसास कराना कि ‘सरकार उनके साथ खड़ी है’।
नक्सलवाद पर चोटबारूद की ताकत को रोजगार, कलम और गरिमा की ताकत से कुचलना।
मुख्यधारा में वापसीबस्तर के युवाओं को भटकने से बचाकर देश के विकास से सीधे जोड़ना।

बंदूक के शोर पर भारी पड़ी जनकल्याण की सोच

​यह सिर्फ एक नौकरी का आदेश नहीं, बल्कि बस्तर के आदिवासियों का लोकतंत्र पर दोबारा विश्वास बहाल करने का महा-अभियान है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने यह साबित कर दिया है कि उनकी सरकार केवल बस्तर की सुरक्षा पर ही नहीं, बल्कि वहां के आदिवासियों के स्वाभिमान और पुनर्वास पर भी उतनी ही शिद्दत से काम कर रही है। देवा मंडावी की यह शासकीय नियुक्ति बस्तर के कोने-कोने में यह संदेश देगी कि हिंसा का रास्ता सिर्फ विनाश लाता है, जबकि शासन की मुख्यधारा से जुड़ने पर ही वास्तविक तरक्की और सम्मान मिलता है। यह बस्तर के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत है।

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