– बजट खपाने की पुरानी परिपाटी का अंत, अब ‘रिजल्ट ओरिएंटेड गवर्नेंस’ से तय होगी अफसरों और विभागों की जवाबदेही
– राज्य और जिलों में 442 कड़े मानकों का अभेद्य चक्रव्यूह; डेटा की हेराफेरी और कागजी दावों पर लगेगी पूर्ण लगाम
– ‘बस्तर अंजोर’ का क्रांतिकारी 3+4 मॉडल: बिना नया रुपया मांगे, प्रशासनिक इच्छाशक्ति से देश का नंबर वन जनजातीय हब बनेगा बस्तर

विशेष ब्यूरो
रायपुर, 8 जुलाई।
छत्तीसगढ़ की विकास यात्रा में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने आज शासन और प्रशासन की पूरी सोच को बदलते हुए दो अत्यंत युगांतकारी और विजनरी पहलों—‘छत्तीसगढ़ एस.डी.जी. (सतत विकास लक्ष्य) 2.0 फ्रेमवर्क’ और ‘बस्तर अंजोर’ महा-अभियान का शंखनाद कर दिया है। मंत्रालय महानदी भवन में पूरी कैबिनेट और सूबे के शीर्ष नौकरशाहों की मौजूदगी में हुआ यह आयोजन केवल सरकारी किताबों का विमोचन नहीं, बल्कि ‘विकसित छत्तीसगढ़ @2047’ के महा-संकल्प को साकार करने का अचूक रोडमैप है।

मुख्यमंत्री श्री साय ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में संदेश दे दिया है कि अब योजनाएं सचिवालय के कमरों से नहीं, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति की आंखों की उम्मीदों से आंकी जाएंगी।
”अंतिम व्यक्ति की खुशहाली ही हमारी नीति का लिटमस टेस्ट” — मुख्यमंत्री
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस ऐतिहासिक अवसर पर राज्य की भावी प्रशासनिक दिशा तय करते हुए कहा:
”हमारी सरकार व्यवस्था बदलने आई है, केवल दिन काटने नहीं। ‘विकसित छत्तीसगढ़ @2047’ का लक्ष्य कोई कोरा नारा नहीं, हमारा नीतिगत संकल्प है। एस.डी.जी. 2.0 फ्रेमवर्क के जरिए हम राज्य में ‘साक्ष्य-आधारित सुशासन’ (Evidence-based Governance) लागू कर रहे हैं। अब हर विभाग के कामकाज का एक्स-रे होगा। जनता के पैसे की एक-एक पाई का हिसाब जमीन पर दिखने वाले ठोस बदलाव से देना होगा।”
एक्स-रे जैसी मॉनिटरिंग: कड़े और वैज्ञानिक पैमानों पर कसे जाएंगे विभाग
सरकारी आंकड़ों की बाजीगरी और फाइलों के ढर्रे को तोड़ते हुए राज्य सरकार ने मॉनिटरिंग सिस्टम को पूरी तरह से ‘डिजिटल और साइंटिफिक’ रूप दे दिया है:
- राज्य स्तर पर अभूतपूर्व विस्तार: राज्य की तरक्की को मापने वाले संकेतकों (Indicators) की संख्या 275 से बढ़ाकर सीधे 343 कर दी गई है। अब भुखमरी उन्मूलन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, लैंगिक समानता, शुद्ध पेयजल और बुनियादी ढांचे जैसे हर गंभीर विषय पर सरकार की सीधी और पैनी नजर होगी।
- ग्राउंड लेवल पर कड़ी जवाबदेही: जिला स्तर के संकेतकों को 82 से बढ़ाकर 99 किया गया है। इसके जरिए सीधे जिला कलेक्टरों की कार्यप्रणाली और उनकी परफॉर्मेंस रेटिंग तय की जाएगी।
- मेटाडेटा हैंडबुक: पारदर्शिता का नया हथियार: डेटा के प्रमाणीकरण के लिए जारी इस हैंडबुक के बाद, आंकड़ों में हेरफेर की गुंजाइश खत्म हो गई है। गणना की पद्धति को अंतरराष्ट्रीय मानकों पर लॉक कर दिया गया है, जिससे डेटा 100% विश्वसनीय होगा।
विशेष संपादकीय: ‘फाइलों के जाल’ से ‘जमीन के उजाले’ तक छत्तीसगढ़ का नया प्रस्थान
छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में 8 जुलाई 2026 की तारीख को एक ‘पैराडाइम शिफ्ट’ (बड़ा वैचारिक बदलाव) के रूप में याद किया जाएगा। अमूमन सरकारें अपनी सफलता का ढिंढोरा इस बात से पीटती हैं कि उन्होंने किस योजना में कितने हजार करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया या ‘खपा’ दिया। लेकिन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज जिस ‘एसडीजी 2.0 फ्रेमवर्क’ और ‘बस्तर अंजोर’ योजना की नींव रखी है, वह बजट खपाने की पुरानी परिपाटी पर करारा प्रहार है। यह ‘इनपुट गवर्नेंस’ (पैसा कितना लगा) से ‘आउटकम गवर्नेंस’ (जमीन पर बदलाव कितना आया) की ओर एक साहसिक कदम है।
प्रशासनिक हलकों में यह जगजाहिर है कि नीतियां कितनी भी शानदार हों, अगर उनकी मॉनिटरिंग का पैमाना ढीला हो, तो वे फाइलों के मलबे में दब जाती हैं। साय सरकार ने राज्य स्तर पर 343 और जिला स्तर पर 99 संकेतकों का जो अभेद्य चक्रव्यूह तैयार किया है, वह दरअसल नौकरशाही के लिए एक कड़ा ‘परफॉर्मेंस ऑडिट’ है। मेटाडेटा हैंडबुक लाकर सरकार ने आंकड़ों की बाजीगरी का रास्ता हमेशा के लिए बंद कर दिया है। अब कोई भी विभाग हवा-हवाई दावों से मुख्यमंत्री या जनता को गुमराह नहीं कर सकेगा।
इस पूरे विजन का सबसे क्रांतिकारी अध्याय है—‘बस्तर अंजोर’। बस्तर का नाम आते ही दशकों से दिल्ली और रायपुर के गलियारों में केवल सुरक्षा बलों की तैनाती और विशेष पैकेजों की बातें होती रही हैं। लेकिन ‘बस्तर अंजोर’ ने एक बिल्कुल नया दर्शन दिया है—अभिसरण (Convergence) का दर्शन।
नीति आयोग के उपाध्यक्ष द्वारा प्रस्तुत ‘3+4 मॉडल’ प्रशासनिक समझदारी की एक अनूठी मिसाल है। यह मॉडल कहता है कि बस्तर को बदलने के लिए नए बजट या नए दफ्तरों की जरूरत नहीं है, बल्कि जरूरत है पहले से चल रही योजनाओं के बीच की ‘दीवारों’ को गिराने की। जब जिला स्तर की जमीनी ताकतें जैसे ‘नियद नेल्लानार 2.0’, ‘बस्तर मुन्ने’ और ‘स्वस्थ बस्तर’ आपस में हाथ मिलाएंगी और उनका तालमेल ‘विकसित छत्तीसगढ़ @2047’ और ‘एसडीजी 2030’ जैसे बड़े लक्ष्यों से होगा, तो जो ऊर्जा पैदा होगी, वह बस्तर के सुदूर जंगलों तक सुशासन का उजाला पहुंचाएगी।
यह पहल केवल बस्तर को माओवाद के साए से बाहर निकालने की कोशिश नहीं है, बल्कि इसे देश के सबसे विकसित जनजातीय हब के रूप में री-ब्रांड करने का एक गंभीर रोडमैप है। ‘बस्तर अंजोर’ की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि जमीनी स्तर पर प्रशासनिक मशीनरी इस ‘अभिसरण’ को कितनी ईमानदारी से लागू करती है। लेकिन एक बात साफ है—मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने छत्तीसगढ़ की तरक्की के लिए जो लकीर खींची है, वह बहुत लंबी, वैज्ञानिक और दूरगामी है। छत्तीसगढ़ अब सिर्फ चल नहीं रहा है, वह एक सुनियोजित रफ्तार से दौड़ने के लिए तैयार है।
’बस्तर अंजोर’ का गेम-चेेंजर ‘3+4’ अभिसरण मॉडल
’बस्तर अंजोर’ की सबसे बड़ी ताकत इसकी वित्तीय समझदारी है। इसमें बिना किसी अतिरिक्त वित्तीय भार के, विभागों के बीच की दूरियों को मिटाकर, जिला स्तर की 3 बड़ी स्थानीय ताकतों को 4 राष्ट्रीय-प्रांतीय विजनरी फ्रेमवर्क के साथ एकीकृत कर दिया गया है:
| जिला स्तर की 3 बुनियादी ताकतें (Local Axis) | समन्वय के 4 राष्ट्रीय एवं प्रांतीय फ्रेमवर्क (Vision Axis) |
|---|---|
| 1. नियद नेल्लानार 2.0 (अधोसंरचना विकास) | 1. सतत विकास लक्ष्य (SDG) 2030 |
| 2. बस्तर मुन्ने (शिक्षा एवं आजीविका) | 2. विकसित छत्तीसगढ़ @2047 |
| 3. स्वस्थ बस्तर (कुपोषण व स्वास्थ्य मुक्ति) | 3. केंद्र सरकार का आकांक्षी जिला कार्यक्रम |
| | 4. आकांक्षी विकासखंड कार्यक्रम |
इच्छाशक्ति की सामूहिक हुंकार
इस ऐतिहासिक विमोचन के साक्षी बने उप मुख्यमंत्री श्री अरुण साव और उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित कैबिनेट के सभी मंत्रियों ने इसे छत्तीसगढ़ के विकास का ‘मैग्नाकार्टा’ (अधिकार पत्र) बताया। प्रशासनिक मशीनरी को मुस्तैद करते हुए मुख्य सचिव श्री विकास शील और मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव श्री subodh कुमार सिंह को मुख्यमंत्री ने दोटूक निर्देश दिए हैं कि इस फ्रेमवर्क का क्रियान्वयन आज और अभी से जमीनी स्तर पर दिखना शुरू हो जाना चाहिए।
