रायपुर 8 जुलाई।
छत्तीसगढ़ की साय सरकार ने आज राज्य के परिवहन इतिहास में अब तक के सबसे बड़े “ईवी महा-अभियान” का शंखनाद कर दिया है। प्रदेश को पूरी तरह प्रदूषण मुक्त और देश का सबसे आधुनिक ‘ग्रीन स्टेट’ बनाने के संकल्प के साथ आज मंत्रालय में एक ऐसी ऐतिहासिक बैठक हुई, जो आने वाले समय में छत्तीसगढ़ की सड़कों की सूरत और सीरत दोनों बदलने वाली है।
इस हाई-प्रोफाइल और निर्णायक बैठक की कमान खुद सचिव सह-परिवहन आयुक्त श्री एस. प्रकाश ने संभाली। बैठक में परिवहन, ऊर्जा विभाग के शीर्ष अफसरों, सभी जिलों के आरटीओ/डीटीओ सहित देश की महारत्न तेल कंपनियों (HPCL, BPCL, IOCL, जियो-बीपी), दिग्गज ईवी निर्माताओं और शीर्ष तकनीकी विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया। यह बैठक सिर्फ चर्चा की मेज नहीं थी, बल्कि छत्तीसगढ़ को ‘ईवी हब’ बनाने का मुकम्मल ब्लूप्रिंट थी।

📱 ‘वन स्टेट, वन ऐप’: सिरदर्द खत्म, एक सुपर-ऐप से चार्ज होगा पूरा छत्तीसगढ़!
वर्तमान में ईवी चालकों के सामने सबसे बड़ी मुसीबत यह है कि अलग-अलग कंपनियों के चार्जिंग स्टेशनों के लिए उन्हें मोबाइल में अनगिनत ऐप्स रखने पड़ते हैं। सरकार ने जनता की इस परेशानी को जड़ से खत्म करने का फैसला कर लिया है। अब पूरे छत्तीसगढ़ के लिए सिर्फ एक एकीकृत (Integrated) स्टेट-लेवल सुपर-ऐप लॉन्च होगा।
- चिप्स (CHiPS) का ‘डिजिटल प्रहार’: ऊर्जा विभाग की तकनीकी शाखा ‘चिप्स’ पहले से ही इसके एक दमदार पायलट ऐप पर काम कर रही है, जिसे अब दुनिया के सबसे आधुनिक फीचर्स से लैस किया जा रहा है।
- मिलेगी ‘लाइव’ लोकेशन और स्लॉट बुकिंग: इस सिंगल ऐप के जरिए वाहन चालक को छत्तीसगढ़ के किसी भी कोने में नजदीकी चार्जिंग स्टेशन की लाइव लोकेशन, खाली स्लॉट और तत्काल ऑनलाइन पेमेंट की सुविधा मिलेगी।
- दिल्ली से कनेक्टिविटी: केंद्र सरकार के आगामी यूनिवर्सल ईवी ऐप के साथ भी इसे सिंक किया जाएगा, यानी तकनीक के मामले में छत्तीसगढ़ देश में सबसे आगे होगा।
⚡ फाइलों का दौर खत्म, अब दिखेगा एक्शन: ‘फास्ट-ट्रैक’ मोड पर आरटीओ और डीटीओ
बैठक में केंद्र सरकार की महत्वाकांक्षी ‘पीएम ई-ड्राइव योजना’ और ‘छत्तीसगढ़ ईवी नीति-2022’ के तहत मिलने वाली भारी-भरकम सब्सिडी और सरकारी प्रोत्साहनों का लाभ सीधे जमीन पर उतारने की रणनीति बनी।
सचिव सह-परिवहन आयुक्त के कड़े और सीधे निर्देश:
श्री एस. प्रकाश ने बैठक में बेहद सख्त रुख अपनाते हुए सभी जिलों के RTO और DTO को दो-टूक लहजे में आदेश जारी किए:
- प्राइम लोकेशंस का तत्काल चयन: सभी जिलों में बिना देर किए ऐसे सरकारी व प्रमुख स्थान चिन्हित किए जाएं जहां चार्जिंग स्टेशन तुरंत स्थापित हो सकें।
- एनओसी (NOC) की ‘नो-वेटिंग’ पॉलिसी: चार्जिंग स्टेशन लगाने के लिए सरकारी विभागों की अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) की प्रक्रिया को पूरी तरह से ‘सुपर-फास्ट ट्रैक’ पर डाला जाए। फाइलों के अटकने पर सीधे जिम्मेदारी तय होगी।
⛽ देश की दिग्गज ऑयल कंपनियों ने बिछाया ‘चार्जिंग का महा-जाल’
बैठक में मौजूद HPCL, BPCL, IOCL और जियो-बीपी जैसी दिग्गज कंपनियों ने छत्तीसगढ़ के कोने-कोने को चार्जिंग नेटवर्क से जोड़ने का अपना पूरा प्लान पेश किया। कंपनियों ने भरोसा दिलाया कि वे न केवल पेट्रोल पंपों पर हाई-स्पीड चार्जर इंस्टॉल कर रही हैं, बल्कि नेशनल हाईवेज, राज्य के मुख्य मार्गों, प्रमुख बाजारों और आवासीय सोसायटियों में भी चार्जिंग स्टेशनों का जाल बिछाने के लिए पूरी ताकत झोंक चुकी हैं।
💬 “यह सिर्फ गाड़ियों का बदलाव नहीं, छत्तीसगढ़ के भविष्य का निर्माण है” – श्री एस. प्रकाश
बैठक के समापन पर सचिव सह-परिवहन आयुक्त ने राज्य के नागरिकों को भरोसा देते हुए बेहद दमदार बात कही:
”हमारा लक्ष्य सिर्फ चार्जिंग स्टेशन खड़े करना नहीं है, बल्कि एक ऐसा अभेद्य और सुलभ नेटवर्क बनाना है जहां किसी भी नागरिक को रेंज (बैटरी खत्म होने) की चिंता न रहे। जब चार्जिंग की सुविधा आपके घर के पास और बेहद आसान होगी, तभी लोग डीजल-पेट्रोल के महंगे और प्रदूषणकारी विकल्पों को छोड़ेंगे। यह छत्तीसगढ़ की आबोहवा को शुद्ध करने, पर्यावरण को बचाने और आने वाली पीढ़ी को एक समृद्ध, हरा-भरा ‘हरित छत्तीसगढ़’ सौंपने का हमारा महा-संकल्प है।”
🎯 निष्कर्ष: देश का ‘ईवी लीडर’ बनने की दहलीज पर छत्तीसगढ़
आज का यह ऐतिहासिक फैसला केवल प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के बुनियादी ढांचे को नई ऊंचाई देने वाला मील का पत्थर है। सरकार की बंपर सब्सिडी, ‘वन स्टेट-वन ऐप’ की बेजोड़ सहूलियत और अफसरों को मिले कड़े निर्देशों के बाद अब वह दिन दूर नहीं जब छत्तीसगढ़ के हर शहर, हर गांव और हर हाईवे पर बिना किसी बाधा के इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार दौड़ेगी। छत्तीसगढ़ अब देश की “ग्रीन मोबिलिटी क्रांति” का नेतृत्व करने के लिए पूरी तरह तैयार है!
