कबाड़ से ‘क्रांति’: बिलासपुर रेल डिपो का देश हिला देने वाला आविष्कार, अब बिना बादलों के ही बोगियों पर होगी ‘आफत की बारिश’!

भारतीय रेलवे की सबसे पुरानी बीमारी का बिलासपुर ने खोजा ‘देसी इलाज’; अब सफर में नहीं टपकेगी छत, न भीगेगी सीटें

सुपर-हाईटेक ‘रेन वाटर इन्ग्रेस टेस्ट बेंच’ तैयार; वंदे भारत जैसी वीआईपी ट्रेनों का भी सेकेंडों में होगा ‘वॉटरप्रूफ टेस्ट’

बिलासपुर, 9 जुलाई।

जब इरादे फौलादी हों और सोच लीक से हटकर, तो रेलवे यार्ड में पड़ा कबाड़ भी देश के लिए ‘वरदान’ बन जाता है। ऐसा ही एक अविश्वसनीय और ऐतिहासिक कारनामा कर दिखाया है दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के बिलासपुर कोचिंग डिपो के जांबाज इंजीनियरों और कर्मचारियों ने। बरसों से मानसून के दौरान ट्रेनों की छतों और खिड़कियों से पानी रिसने (लीकेज) की जो समस्या रेल यात्रियों और प्रशासन के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बनी हुई थी, उसे बिलासपुर डिपो ने एक झटके में हमेशा के लिए दफन कर दिया है।

​डिपो की टीम ने पूरी तरह स्वदेशी और आत्मनिर्भर तकनीक से ‘रेन वाटर इन्ग्रेस टेस्ट बेंच’ का निर्माण किया है। यह कोई मामूली मशीन नहीं है, बल्कि यह चलती धूप में भी ट्रेन के भीतर ‘कृत्रिम चक्रवात और मूसलाधार बारिश’ का हूबहू माहौल पैदा कर देती है, ताकि बोगियों की मजबूती को परखा जा सके।

मास्टरस्ट्रोक: कबाड़ को बना दिया सुरक्षा का ‘ब्रह्मास्त्र’

​इस अविष्कार की सबसे गजब बात यह है कि इसके लिए रेलवे ने कोई करोड़ों का बजट पास नहीं कराया, न ही किसी विदेशी कंपनी से हाथ मिलाया। बिलासपुर के होनहारों ने ‘वेस्ट से बेस्ट’ का ऐसा उदाहरण पेश किया है जिसे देखकर देश दंग है।

  • ​यार्ड में सालों से पड़े बेकार स्क्रैप (कबाड़) को गलाकर, काटकर और जोड़कर इस भव्य मशीन का ढांचा खड़ा किया गया।
  • ​बाजार से सिर्फ नाममात्र के कुछ इलेक्ट्रॉनिक और प्रेशर पुर्जे खरीदे गए।
  • ​नतीजा? रेलवे के करोड़ों रुपये बच गए और देश को मिल गया एक ऐसा सिस्टम जो विदेशों में लाखों डॉलर खर्च करके भी नहीं मिलता।

ऑपरेशन ‘आर्टिफिशियल मानसून’: कैसे सेकेंडों में पकड़ा जाता है लीकेज?

​यह मशीन किसी ‘जादू’ की तरह काम करती है। ट्रेन जैसे ही यार्ड में मेंटेनेंस के लिए आती है, यह पोर्टेबल टेस्ट बेंच उसे घेर लेती है।

[हाई-प्रेशर वाटर पंप] ──► [वैज्ञानिक कोण से बौछारें] ──► [चक्रवाती बारिश का दबाव]

[कोच पूरी तरह सुरक्षित और वॉटरप्रूफ] ◄── [लीकेज का तुरंत खात्मा] ◄─┘

इसके जरिए बोगी की छत, खिड़कियों के कांच, साइड पैनल और रबर बीडिंग पर हर उस एंगल से पानी की भीषण बौछारें मारी जाती हैं, जहां से मानसून में पानी घुसने का खतरा 100% होता है। यदि बोगी में बाल बराबर भी दरार या लीकेज होगी, तो यह मशीन उसे तुरंत पकड़ लेगी और ट्रेन के प्लेटफॉर्म पर लगने से पहले ही उसे पूरी तरह वेल्ड या सील कर दिया जाएगा।

बिलासपुर के इस ‘महा-नवाचार’ से बदलेगी भारतीय रेल की तस्वीर

  • अब 365 दिन मानसून: पहले लीकेज का पता तभी चलता था जब आसमान से पानी बरसता था। अब कड़कड़ाती धूप और ठंड में भी ‘रेन टेस्ट’ मुमकिन होगा।
  • ‘वंदे भारत’ भी इसके आगे नतमस्तक: इस मशीन का डिजाइन इतना लचीला (पोर्टेबल) है कि इससे सामान्य ट्रेनों से लेकर देश की सबसे प्रीमियम और हाई-स्पीड ‘वंदे भारत’ के कोचों का भी टेस्ट पलक झपकते ही किया जा सकता है।
  • करोड़ों की संपत्ति की सुरक्षा: समय रहते पानी का रिसाव रुकने से बोगियों के भीतर की आलीशान सीटें, बिजली के तार, पंखे और लाइटिंग खराब होने से बचेंगे, जिससे रेलवे का मेंटेनेंस खर्च जीरो हो जाएगा।

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