खास बातें:
- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की बड़ी पहल: पारंपरिक कला को आधुनिक बाजार से जोड़कर ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बदलने का महाअभियान।
- हाईटेक ट्रेनिंग: पारंपरिक टोकरी बनाने वाले हाथ अब बनाएंगे लग्जरी सोफा, पलंग और फैंसी इंटीरियर आइटम।
- मिशन “लखपति दीदी”: 150 से अधिक जनजातीय परिवारों और बिहान समूह की महिलाओं को हर साल लाख रुपये से ज्यादा कमाने योग्य बनाने का लक्ष्य।
रायपुर / जशपुर 12 जुलाई ।
छत्तीसगढ़ के जंगलों में उगने वाला साधारण बांस अब सिर्फ ग्रामीण आजीविका का साधन नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चमकने वाला एक प्रीमियम ब्रांड बनने जा रहा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और पारंपरिक कला को एक नई ऊंचाई देने के लिए “जशक्राफ्ट” (JashCraft) ब्रांड की नींव रखी है। जशपुर जिला प्रशासन की यह अनूठी पहल छत्तीसगढ़ के हस्तशिल्प इतिहास में एक मील का पत्थर साबित होने जा रही है।

इस दूरदर्शी योजना के तहत सदियों पुराने बांस शिल्प को आधुनिक तकनीक, ग्लोबल डिजाइन और सीधे नेशनल मार्केट से जोड़कर आदिवासियों के जीवन में आर्थिक क्रांति लाने का शंखनाद कर दिया गया है।
लोकल टू ग्लोबल: गुजरात के सूरत से आए एक्सपर्ट्स, झोलांगा बना हुनर का ‘पावरहाउस’
जशपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत झोलांगा में इन दिनों एक अद्भुत बदलाव की तस्वीर देखने को मिल रही है। यहाँ 29 जून से शुरू हुआ एक माह का आवासीय बांस हस्तशिल्प प्रशिक्षण शिविर सिर्फ एक सरकारी ट्रेनिंग नहीं, बल्कि स्थानीय महिलाओं के सपनों को नए पंख देने का केंद्र बन चुका है।
- इंटरनेशनल लेवल की ट्रेनिंग: स्थानीय कारीगरों को आज के दौर के कॉर्पोरेट और अर्बन मार्केट की मांग के अनुसार तैयार करने के लिए गुजरात के सूरत से आए डिजाइन और तकनीकी विशेषज्ञों को तैनात किया गया है।
- मशीनों का जादू: पारंपरिक औजारों की जगह अब महिलाएं आधुनिक और हाईटेक मशीनों का उपयोग कर रही हैं, जिससे उत्पादों की फिनिशिंग और गुणवत्ता विश्वस्तरीय हो गई है।
- पहला मोर्चा: इस अभियान से जशपुर और मनोरा विकासखंड के लगभग 150 परिवारों की तकदीर बदलेगी। फिलहाल, पहले बैच में 46 महिलाएं दिन-रात इस हुनर को आत्मसात कर रही हैं।

अब ड्राइंग रूम्स की शोभा बढ़ाएंगे ये उत्पाद
कल तक जो हाथ सिर्फ साधारण सूपा या टोकरी बनाना जानते थे, वे आज सूरत के डिजाइनर्स की देखरेख में बेहद आकर्षक और महंगे उत्पाद तैयार कर रहे हैं:
- लग्जरी फर्नीचर: बांस से बने सोफा सेट, मॉडर्न बेड (पलंग), और डाइनिंग टेबल।
- प्रीमियम डेकोर: फैंसी ट्रे, कॉर्पोरेट गिफ्टिंग के लिए गुलदस्ते, डिजाइनर माचिया, कलात्मक चटाई और होम-डेकोर की सामग्रियां।
’बिहान’ का साथ और कड़क फाइनेशियल सपोर्ट: खत्म होगी बिचौलियों की मनमानी
जशपुर और मनोरा क्षेत्र में करीब 250 परिवार सालों से बांस शिल्प पर निर्भर हैं, लेकिन सही बाजार न मिलने के कारण वे आर्थिक तंगी से जूझते थे। अब सरकार ने इनके पीछे पूरी ताकत झोंक दी है।
चक्रव्यूह की तरह मजबूत फाइनेंशियल सपोर्ट: ‘बिहान’ योजना के तहत महिला स्व-सहायता समूहों को चक्रवीय निधि (Revolving Fund), सामुदायिक निवेश निधि (CIF), सीधे बैंक लिंकेज और प्रधानमंत्री मुद्रा लोन जैसी सुविधाओं से लैस कर दिया गया है। यानी अब पैसों की कमी के कारण किसी भी कारीगर का काम नहीं रुकेगा।
’जशक्राफ्ट’ की धमक: देश के बड़े महानगरों में सजेगा छत्तीसगढ़ का हुनर
प्रशासन सिर्फ सामान बनवा नहीं रहा, बल्कि उसकी बिक्री के लिए देश के बड़े डिजाइन और मार्केटिंग एक्सपर्ट्स को हायर किया गया है। ‘जशक्राफ्ट’ ब्रांड के तहत तैयार इन उत्पादों को सीधे:
- राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर की प्रदर्शनियों (Exhibitions) में भेजा जा रहा है।
- बड़े शहरों के आलीशान रूरल मार्ट्स और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से जोड़ा जा रहा है। इससे बिचौलियों का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा और मेहनत की कमाई का एक-एक पैसा सीधे ग्रामीण महिलाओं के बैंक खातों में पहुंचेगा।
’लखपति दीदी’ बनने की ओर अग्रसर ग्रामीण महिलाएं
जशक्राफ्ट सिर्फ एक ब्रांड नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर भारत और समृद्ध छत्तीसगढ़ का जीता-जागता उदाहरण है। यह पहल जनजातीय परिवारों की आय में रिकॉर्ड वृद्धि करने और स्थानीय स्तर पर बंपर रोजगार पैदा करने की दिशा में मील का पत्थर है।
जिला प्रशासन ने संकल्प लिया है कि आगामी वर्ष तक इस हस्तशिल्प से जुड़ी हर एक महिला को “लखपति दीदी” की श्रेणी में खड़ा किया जाएगा। वह दिन दूर नहीं जब महानगरों के फाइव-स्टार होटलों और आलीशान बंगलों में जशपुर के जंगलों से निकला ‘जशक्राफ्ट’ अपनी खूबसूरती बिखेरता नजर आएगा।
