चिरायु योजना का महा-चमत्कार: मौत के मुंह से मासूम को खींच लाई साय सरकार! धमतरी के 10 वर्षीय त्रिशांत का हुआ सफल और पूर्णतः निःशुल्क हृदय ऑपरेशन
रायपुर/धमतरी 12 जुलाई :
कहते हैं कि अगर सही समय पर सही मदद मिल जाए, तो किसी के जीवन की डूबती कश्ती को भी किनारा मिल जाता है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशीलता और राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (RBSK) के अंतर्गत संचालित ‘चिरायु योजना’ धमतरी जिले के ग्राम सिंधौरीखुर्द निवासी 10 वर्षीय स्कूली छात्र त्रिशांत यादव के लिए साक्षात वरदान साबित हुई है। चिरायु टीम की सतर्कता और चीते जैसी फुर्ती ने न सिर्फ एक मासूम को जन्मजात गंभीर बीमारी के चंगुल से छुड़ाया, बल्कि एक गरीब परिवार को जीवनभर का असहनीय दर्द और वित्तीय कर्ज झेलने से भी बचा लिया।

लाखों रुपये की कीमत वाला यह जटिल और संवेदनशील हार्ट ऑपरेशन पूरी तरह निःशुल्क (Zero Cost) संपन्न हुआ है, जिसने सरकारी स्वास्थ्य तंत्र के प्रति जनता के भरोसे को एक नई ऊंचाई दी है।
🏫 स्कूल में रुटीन चेकअप… और सामने आ गया ‘साइलेंट किलर’
धमतरी जिले के कुरूद विकासखंड के सिंधौरीखुर्द का रहने वाला चौथी कक्षा का छात्र त्रिशांत रोज की तरह सामान्य बच्चों की तरह हंसता-खेलता स्कूल जाता था। मजदूरी कर परिवार का पेट पालने वाले उसके माता-पिता को दूर-दूर तक अंदाजा नहीं था कि उनके लाडले के सीने के भीतर जन्मजात हृदय रोग (Congenital Heart Disease – CHD) जैसी जानलेवा बीमारी चुपके से पनप रही है।
तभी स्कूलों में चल रहे नियमित स्वास्थ्य परीक्षण अभियान के तहत चिरायु टीम कुरूद त्रिशांत के स्कूल पहुंची। परीक्षण के दौरान डॉक्टरों ने त्रिशांत के दिल की धड़कनों में एक भयानक असमानता महसूस की। टीम ने खतरे की घंटी को भांपते हुए बिना एक पल गंवाए परिजनों से संपर्क किया और उन्हें तुरंत उच्च स्तरीय जांच की सलाह दी।
⚡ धमतरी से रायपुर MMI: पलक झपकते ही हुआ ‘मिशन मोड’ में एक्शन
चिरायु टीम की संवेदनशीलता यहीं खत्म नहीं हुई, बल्कि असली परीक्षा यहीं से शुरू हुई। परिजनों की सहमति लेकर बच्चे को तुरंत जिला अस्पताल धमतरी भेजा गया, जहाँ विशेषज्ञ डॉक्टरों ने गहन जांच के बाद पुष्टि की कि त्रिशांत के दिल में जन्मजात छेद है और जल्द से जल्द ऑपरेशन जरूरी है।
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) के कुशल मार्गदर्शन में चिरायु टीम ने किसी प्राइवेट वीआईपी ट्रीटमेंट से भी तेज रफ्तार में सारी कागजी प्रक्रियाओं और रेफरल को मिनटों में पूरा किया। बच्चे को बिना किसी रुकावट के रायपुर के प्रतिष्ठित एमएमआई (MMI) हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। बीते 8 जुलाई 2026 को विशेषज्ञ सर्जन्स की टीम ने त्रिशांत के दिल का सफल ऑपरेशन किया। आज वह पूरी तरह स्वस्थ है और डॉक्टरों की निगरानी में तेजी से सामान्य जीवन की ओर लौट रहा है।
🛡️ पहचान से लेकर घर वापसी तक: चिरायु के 5 अचूक ‘सुरक्षा चक्र’
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ‘चिरायु टीम’ की कार्यप्रणाली केवल एक चिकित्सीय प्रक्रिया नहीं, बल्कि कर्तव्यनिष्ठा का एक जीवंत सफरनामा है। इस पूरे मिशन को टीम ने इन 5 चरणों में अमलीजामा पहनाया:
[चरण 1: सटीक पहचान] 🔍 स्कूलों में कैंप के दौरान छिपे हुए लक्षणों को सतर्कता से पकड़ना।
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[चरण 2: आत्मीय काउंसिलिंग] 🤝 घबराए परिजनों को ढांढस बंधाना और इलाज के लिए मानसिक रूप से तैयार करना।
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[चरण 3: पेपरलेस रेफरल] 📑 धमतरी से रायपुर तक कागजी कार्रवाई और एम्बुलेंस का जिम्मा खुद उठाना।
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[चरण 4: फ्री वर्ल्ड-क्लास सर्जरी] 🏥 8 जुलाई 2026 को रायपुर में टॉप सर्जन्स द्वारा शत-प्रतिशत मुफ़्त ऑपरेशन।
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[चरण 5: सतत फॉलो-अप] 🩺 डिस्चार्ज के बाद भी पूर्ण रूप से स्वस्थ होने तक लगातार सेहत की मॉनिटरिंग।
😭 भावुक हुए माता-पिता: “हमारी औकात नहीं थी, सरकार ने हमारे घर की खुशियां लौटा दीं”
त्रिशांत के माता-पिता अपने लाडले को खेलता-कूदता देख अपने आंसू रोक नहीं पाए। आंखों में खुशी के आंसू लिए उन्होंने कहा:
”हार्ट की बीमारी का नाम सुनकर ही हमारे पैर तले जमीन खिसक गई थी। हम ठहरे गरीब लोग, इतना महंगा इलाज हमारे बूते से बाहर था। अगर चिरायु की टीम स्कूल न आती, तो हमें कभी पता ही नहीं चलता और हम अपने बच्चे को खो देते। हम मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय जी और स्वास्थ्य विभाग को हाथ जोड़कर कोटि-कोटि धन्यवाद देते हैं, जिन्होंने हमारे बच्चे को नया जीवन दिया और हमारे घर की खुशियां लौटा दीं।”
🎯 स्वस्थ भविष्य की गारंटी है ‘आरबीएसके’
धमतरी जिले में चिरायु टीम का यह समर्पित प्रयास इस बात का जिंदा सुबूत है कि राज्य सरकार की स्वास्थ्य योजनाएं सिर्फ फाइलों या विज्ञापनों तक सीमित नहीं हैं। जन्मजात विकारों से जूझ रहे गरीब बच्चों के लिए यह कार्यक्रम एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर रहा है, जो छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के सुरक्षित कल की एक बेहद मजबूत बुनियाद रख रहा है।
संपादकीय टिप्पणी: जब व्यवस्था ‘संवेदना’ बन जाए
त्रिशांत यादव की यह कहानी महज़ एक चिकित्सीय सफलता नहीं है, बल्कि इस बात का जीवंत दस्तावेज़ है कि जब सरकारी तंत्र में ‘प्रोफेशनलिज्म’ के साथ ‘मानवीय संवेदना’ का समावेश होता है, तो परिणाम कितने युगांतकारी हो सकते हैं। अक्सर सरकारी योजनाओं को लेकर आम जनता के मन में लालफीताशाही और लेती-देती की एक धुंधली तस्वीर होती है। लेकिन धमतरी से रायपुर तक ‘चिरायु योजना’ ने जिस रफ़्तार और आत्मीयता से काम किया, उसने यह साबित कर दिया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सूबे का स्वास्थ्य ढांचा अब केवल कागजी आंकड़ों को दुरुस्त करने में नहीं, बल्कि सीधे अंतिम व्यक्ति की जिंदगी बचाने में यकीन रखता है।
एक गरीब मां-बाप के लिए अपने 10 साल के बच्चे के दिल की बीमारी का पता चलना किसी आसमानी बिजली गिरने जैसा होता है। ऐसे वक्त में चिरायु टीम का स्कूल में मुस्तैद होना, बीमारी को समय पर पकड़ना, और फिर धमतरी से रायपुर तक की पूरी कागजी औपचारिकताएं खुद संभालकर ‘जीरो-कॉस्ट’ पर वर्ल्ड-क्लास सर्जरी कराना—यही सुशासन (Good Governance) की असली परिभाषा है। यह घटना बताती है कि ‘आरबीएसके’ (RBSK) जैसी योजनाएं छत्तीसगढ़ के नौनिहालों के लिए महज एक जांच अभियान नहीं, बल्कि उनके महफूज मुस्तकबिल की एक अभेद्य गारंटी हैं।
