तस्वीर देख पसीजा सीएम का दिल: छुट्टी के दिन भी दौड़ा अमला, 24 घंटे में दिव्यांग के द्वार पहुंची सरकार

सुशासन की मिसाल: घिसटते हाथों को मिला ट्राइसाइकिल का सहारा; धरमजयगढ़ के कमोसिनडांड गांव में रविवार को प्रशासन ने पेश की संवेदनशीलता की सबसे बड़ी नजीर

रायपुर/रायगढ़, 12 जुलाई।

जब सत्ता का शीर्ष संवेदनशील हो और प्रशासनिक मशीनरी में जनता के प्रति जवाबदेही हो, तो व्यवस्था कैसे ‘सजग प्रहरी’ की तरह काम करती है, इसकी एक बेमिसाल और ऐतिहासिक नजीर छत्तीसगढ़ में देखने को मिली है। रायगढ़ जिले के सुदूर, दुर्गम और पहाड़ी ग्राम कमोसिनडांड (धरमजयगढ़) निवासी जन्म से दिव्यांग गणेश राम यादव के संघर्ष की एक मार्मिक तस्वीर पर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का दिल पसीज गया। सीएम ने तत्काल संज्ञान लेते हुए सीधे निर्देश जारी किए और नतीजा यह हुआ कि ‘संडे’ के शासकीय अवकाश के बावजूद महज 24 घंटे के भीतर दिव्यांग के सूने आंगन में सरकारी गाड़ी से न सिर्फ ट्राइसाइकिल पहुंची, बल्कि सुशासन का साक्षात भरोसा भी पहुंचा।

फर्श पर रेंगते हाथों को मिला आत्मनिर्भरता का पहिया

​दरअसल, सोशल मीडिया और मीडिया के माध्यम से धरमजयगढ़ के सुदूर अंचल से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई थी। आर्थिक तंगी और बेबसी के कारण जन्मजात दिव्यांग गणेश राम यादव चंद कदमों की दूरी तय करने के लिए भी पथरीली राहों पर अपने हाथों के बल घिसटने (रेंगने) को मजबूर थे। इस बेबसी ने उनके स्वाभिमान और शरीर दोनों को जख्म दिए थे। दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण अस्पताल, बैंक या राशन दुकान जाना उनके लिए किसी एवरेस्ट फतह करने जैसा था। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की नजर जैसे ही इस मार्मिक खबर पर पड़ी, उन्होंने जिला प्रशासन को बिना एक पल गंवाए एक्शन मोड में आने को कहा।

संडे की छुट्टी बेअसर, गरीब के चौखट पर पहुंची व्यवस्था

​मुख्यमंत्री के कड़े और संवेदनशील रुख का असर यह हुआ कि समाज कल्याण विभाग और जिला प्रशासन के लिए रविवार की छुट्टी का कोई मायने नहीं रहा। अमला तत्काल सक्रिय हुआ, जनपद पंचायत धरमजयगढ़ से ट्राइसाइकिल उठाई गई और अफसर सीधे कमोसिनडांड गांव के लिए रवाना हो गए। जब प्रशासनिक टीम गणेश राम के घर पहुंची, तो वे किसी काम से बाहर गए थे। अफसरों ने बिना देर किए उनके बड़े भाई विचित्र यादव, भाभी और वार्ड पंच की मौजूदगी में पूरे सम्मान के साथ वह ट्राइसाइकिल सौंपी।

एक छत के नीचे तीन दिव्यांग, साय सरकार बनी संकटमोचक

​यह मामला सिर्फ एक ट्राइसाइकिल तक सीमित नहीं है, बल्कि इस परिवार की पूरी कहानी बेहद भावुक करने वाली है। गणेश राम की भाभी श्रीमती चंद्रवती ने प्रशासनिक टीम को बताया कि उनके पति विचित्र यादव और देवर गणेश राम दोनों जन्म से दिव्यांग हैं, और वे स्वयं भी दिव्यांगता की शिकार हैं। ऐसे संकटग्रस्त परिवार के लिए साय सरकार की योजनाएं संजीवनी का काम कर रही हैं:

योजना का नाममिलने वाला लाभ
दिव्यांग पेंशन योजनादोनों भाइयों को हर महीने बिना किसी रुकावट के नियमित पेंशन मिल रही है।
राशन कार्ड योजनादुर्गम क्षेत्र होने के बाद भी हर महीने समय पर खाद्यान्न की उपलब्धता।
महतारी वंदन योजनापरिवार की महिलाओं के खातों में हर महीने आ रही राशि से मिला बड़ा आर्थिक संबल।

“अब मेरा भाई सीना तानकर चलेगा…”

​ट्राइसाइकिल को छूते ही बड़े भाई विचित्र यादव की आंखें डबडबा आईं। उन्होंने रुंधे गले से मुख्यमंत्री का आभार जताते हुए कहा, “वर्षों से मेरा भाई सड़कों पर घिसटकर चलता था, जिससे हाथ छिल जाते थे और दिल रोता था। आज मुख्यमंत्री जी भगवान बनकर आए हैं। अब मेरा भाई किसी पर निर्भर नहीं रहेगा, वह सम्मान से जिएगा और खुद अपने काम करेगा।”

संपादकीय टिप्पणी: यही है जनता की सरकार

​धरमजयगढ़ के इस सुदूर अंचल में महज 24 घंटे के भीतर हुई इस त्वरित कार्रवाई ने ग्रामीणों के भीतर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली के प्रति अटूट विश्वास जगा दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि कागजी फाइलों और दफ्तरों के चक्कर काटने के दौर को पीछे छोड़, छुट्टी के दिन खुद चलकर गरीब के घर पहुंचने वाली यह सरकार वाकई ‘जनता की अपनी सरकार’ है। यह सुशासन का वह नया छत्तीसगढ़ मॉडल है, जहां अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति की हर कराह सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंचती है और उसका समाधान भी पलक झपकते होता है।

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