‘वैष्णो देवी शक्ति स्वसहायता समूह’ ने पेश की स्वावलंबन की मिसाल; क्लिनिकल व घरेलू उत्पादों से स्थानीय बाजार में बनाई धाक
विशेष संवाददाता | रायपुर/बिलासपुर, 26 जुलाई 2026
कभी घर की चारदीवारी और चूल्हे-चौके तक सीमित रहने वाली ग्रामीण महिलाओं ने अपने बुलंद हौसलों और कड़ी मेहनत से किस्मत की लकीरें खुद लिखना शुरू कर दिया है। छत्तीसगढ़ शासन की संवेदनशील पहल ’बिहान योजना’ और ’राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM)’ ने इन महिलाओं के सपनों को पंख दिए हैं। इसी जमीनी क्रांति का एक जीवंत उदाहरण बिलासपुर जिले के मस्तुरी विकासखंड स्थित ग्राम कछार में देखने को मिल रहा है, जहाँ ‘वैष्णो देवी शक्ति महिला स्वसहायता समूह’ की सदस्य आज न केवल आर्थिक रूप से सशक्त हो रही हैं, बल्कि पूरे अंचल के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी हैं।

🧪 हुनर को मिला बाजार: क्लिनिकल और घरेलू उत्पादों का निर्माण
समूह की अध्यक्ष श्रीमती अपूर्वा तिवारी के कुशल नेतृत्व में समूह की महिलाओं ने लीक से हटकर काम करने का बीड़ा उठाया है। यह समूह केवल पारंपरिक उत्पादों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसने बाजार की मांग को समझते हुए:
- क्लिनिकल सामग्री (जैसे सैनिटाइजर, फिनाइल, लिक्विड सोप आदि)
- दैनिक घरेलू उपयोग की वस्तुएं
तैयार करना शुरू किया। उत्पादों की उत्कृष्ट गुणवत्ता, शुद्धता और स्वच्छता के कड़े मानकों का पालन करने के कारण स्थानीय बाजार में इनके बनाए सामानों की भारी मांग है। गुणवत्ता की वजह से ग्राहकों का भरोसा बढ़ा है और महिलाओं को नियमित रूप से बेहतर मुनाफा मिल रहा है।
📈 ‘बिहान’ योजना बनी प्रगति की ढाल
महिलाओं को इस मुकाम तक पहुँचाने में राज्य सरकार की ‘बिहान’ योजना का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। योजना के माध्यम से महिलाओं को:
- व्यावसायिक प्रशिक्षण: निर्माण और पैकेजिंग की बारीकियां सिखाई गईं।
- वित्तीय सहायता: शुरुआत के लिए आसान किश्तों पर कार्यशील पूंजी उपलब्ध कराई गई।
- विपणन व बाजार से जुड़ाव: स्थानीय हाट-बाजारों, राजकीय मेलों और विभिन्न प्रदर्शनियों में स्टॉल लगाने का अवसर दिया गया।
इस संगठित मार्गदर्शन के चलते महिलाओं का हुनर एक सफल व्यवसाय में बदल गया। आज वे खुद अपने उत्पादों का विपणन कर रही हैं, जिससे बिचौलियों की भूमिका खत्म हो गई है और पूरा लाभ सीधे समूह की जेब में आ रहा है।
💬 “अब हम सिर्फ गृहिणी नहीं, सफल व्यवसायी भी हैं”
“पहले हमारी पहचान केवल घरेलू जिम्मेदारियों तक सीमित थी। आर्थिक तंगी के कारण छोटे-छोटे खर्चों के लिए भी दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता था। लेकिन ‘बिहान’ योजना और एनआरएलएम के सहयोग ने हमारी जिंदगी बदल दी। आज हम उत्पाद बनाने से लेकर उनके विपणन तक का सारा काम खुद संभालती हैं। इससे परिवार की आय में इजाफा तो हुआ ही है, समाज में हमारी एक नई और सम्मानजनक पहचान भी बनी है।”
— श्रीमती अपूर्वा तिवारी, अध्यक्ष, वैष्णो देवी शक्ति महिला स्वसहायता समूह🌟 परिवर्तन की नई बयार: आर्थिक मजबूती से सामाजिक सम्मान तक
वैष्णो देवी शक्ति समूह की सफलता केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है, इसका सामाजिक प्रभाव गहरा और स्थायी है:
- परिवार में निर्णायक भूमिका: आर्थिक रूप से सक्षम होने के बाद महिलाएं अब बच्चों की शिक्षा और परिवार के स्वास्थ्य पर खुलकर खर्च कर पा रही हैं।
- आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि: खुद का व्यवसाय संभालने से महिलाओं के भीतर का हिचकिचाहट खत्म हुआ है।
- अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा: इस समूह को देखकर गांव की अन्य महिलाएं भी स्वसहायता समूहों से जुड़कर स्वरोजगार अपनाने के लिए आगे आ रही हैं।
📝 संक्षेप में: एक नज़र सफलता के सफर पर
प्रमुख बिंदु विवरण स्थान ग्राम कछार, मस्तुरी विकासखंड, जिला बिलासपुर समूह का नाम वैष्णो देवी शक्ति महिला स्वसहायता समूह नेतृत्व श्रीमती अपूर्वा तिवारी (अध्यक्ष) प्रमुख उत्पाद क्लिनिकल एवं दैनिक उपयोग के घरेलू उत्पाद सहायक योजनाएं बिहान योजना एवं राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) मुख्य प्रभाव नियमित आय, आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक सशक्तिकरण वैष्णो देवी शक्ति महिला स्वसहायता समूह की यह प्रेरक कहानी इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि यदि शासन की योजनाओं का धरातल पर सही और प्रभावी क्रियान्वयन हो, तो ग्रामीण भारत की तस्वीर पूरी तरह बदल सकती है। यह पहल ग्रामीण महिलाओं को न केवल आर्थिक स्वतंत्रता दे रही है, बल्कि एक उज्ज्वल और सशक्त भविष्य की ओर मजबूती से आगे बढ़ा रही है।
