धमतरी, राजनांदगांव, जांजगीर और बस्तर में लगेंगे नए उद्योग, युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के द्वार
छत्तीसगढ़ में औद्योगिक क्रांति: चार नए जिलों में स्थापित होंगे अत्याधुनिक मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर

रायपुर, 29 जुलाई:
छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास, आर्थिक सुदृढ़ीकरण और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक कदम उठाया है। मुख्य सचिव श्री विकासशील की अध्यक्षता में मंत्रालय (महानदी भवन) में आयोजित ‘उद्योग एवं वाणिज्य विभाग’ के अंतर्गत औद्योगिक विकास योजना की उच्चस्तरीय राज्य स्तरीय समिति की बैठक में प्रदेश के चार अलग-अलग जिलों में चार नए औद्योगिक पार्क (मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर) विकसित करने के प्रस्ताव को औपचारिक और अंतिम मंजूरी दे दी गई है।
इस महत्वपूर्ण निर्णय से राज्य के पिछड़े और औद्योगिक रूप से उभरते अंचलों में तीव्र विकास का मार्ग प्रशस्त होगा तथा स्थानीय स्तर पर स्वरोजगार और उद्योगों के विस्तार को अभूतपूर्व गति मिलेगी।
इन चार प्रमुख जिलों में आकार लेंगे नए औद्योगिक पार्क
समिति की इस दूसरी विस्तृत बैठक में राज्य के विभिन्न क्षेत्रों की भौगोलिक स्थिति, कच्चे माल की उपलब्धता और लॉजिस्टिक्स को ध्यान में रखते हुए चार जिलों में क्लस्टर स्थापित करने पर मुहर लगाई गई:
- राजनांदगांव जिला (पटेवा): यहाँ स्पेशल मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना की जाएगी, जो विशिष्ट उत्पादों और आधुनिक तकनीकों पर आधारित उद्योगों को बढ़ावा देगा।
- धमतरी जिला (धूम्रपाली): यहाँ मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर बनेगा, जिससे कृषि, वानिकी और अन्य स्थानीय उत्पादों पर आधारित कई छोटे-बड़े उद्योगों को एक ही छत के नीचे बढ़ावा मिलेगा।
- जांजगीर-चांपा जिला (सलखान): यहाँ मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर विकसित होगा, जो इस क्षेत्र के खनिज और ऊर्जा संसाधनों के दोहन के साथ-साथ विविध औद्योगिक गतिविधियों का केंद्र बनेगा।
- बस्तर जिला (नियानार): बस्तर जैसे आकांक्षी और ऊर्जावान क्षेत्र में मल्टी सेक्टर मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर की स्थापना से स्थानीय हस्तशिल्प, लघु वनोपज और खनिज आधारित उद्योगों को राष्ट्रीय स्तर पर एक नई पहचान और बाजार मिलेगा।
केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त और महत्वाकांक्षी पहल
यह पूरी परियोजना केंद्र सरकार की बहुआयामी और महत्वाकांक्षी औद्योगिक विकास योजना का हिस्सा है, जिसे छत्तीसगढ़ सरकार अपनी राज्य की औद्योगिक विकास नीति के अंतर्गत बेहद प्रभावी और पारदर्शी तरीके से लागू कर रही है।
इन परियोजनाओं के माध्यम से राज्य सरकार का मुख्य उद्देश्य प्रदेश में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (व्यापार सुगमता) को बढ़ावा देना है ताकि देश-विदेश के बड़े निवेशक छत्तीसगढ़ की ओर आकर्षित हों। इन पार्कों में निवेशकों को विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचा (सड़क, बिजली, पानी, जल निकासी और अपशिष्ट प्रबंधन) उपलब्ध कराया जाएगा।
शीर्ष अधिकारियों की मौजूदगी ने तय की समयबद्ध क्रियान्वयन की रूपरेखा
परियोजना के सुचारू संचालन और समयबद्ध क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए गठित राज्य स्तरीय समिति की इस बैठक में प्रदेश के कई वरिष्ठ और नीति-निर्माता प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक में शामिल प्रमुख अधिकारी निम्नलिखित हैं:
- डॉ. रोहित यादव (सचिव, वित्त विभाग)
- श्री अंकित आनंद (सचिव, आवास एवं पर्यावरण विभाग)
- श्री रजत कुमार (सचिव, वाणिज्य एवं उद्योग विभाग)
- डॉ. सारांश मित्तर (सचिव, ऊर्जा विभाग)
- सुश्री इफ्फत आरा (विशेष सचिव, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग)
इसके साथ ही अन्य संबंधित विभागों के उच्चाधिकारी भी बैठक में मौजूद रहे, जिन्होंने इन क्लस्टर्स के लिए भूमि आवंटन, पर्यावरणीय स्वीकृतियों और वित्तीय प्रबंधन से जुड़े तमाम पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया।
युवाओं के लिए खुलेंगे रोजगार के लाखों द्वार
विशेषज्ञों का मानना है कि इन चारों मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर्स के धरातल पर उतरने से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से हजारों-लाखों युवाओं के लिए रोजगार और स्वरोजगार के रास्ते खुलेंगे। स्थानीय स्तर पर हुनरमंद युवाओं को पलायन करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, बल्कि वे अपने ही गृह जिले में बेहतर आजीविका प्राप्त कर सकेंगे। यह कदम छत्तीसगढ़ को देश के अग्रणी औद्योगिक राज्यों की श्रेणी में खड़ा करने में मील का पत्थर साबित होगा।
