रायपुर/ग्राम सरोधी:
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित ‘सुशासन तिहार’ केवल सरकारी उपलब्धियों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में आ रहे बदलावों का गवाह भी बन रहा है। रायपुर जिले के ग्राम सरोधी में आयोजित मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की विशेष चौपाल में उस वक्त एक भावुक और प्रेरक पल आया, जब ‘स्वच्छता दीदी’ मनीषा मरकाम ने अपनी संघर्ष से सफलता तक की दास्तां साझा की।
सीमित संसाधनों से आत्मनिर्भरता का सफर
ग्राम सरोधी की निवासी श्रीमती मनीषा मरकाम एक साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं। पति श्री रंजीत मरकाम और तीन बेटों के साथ उनका जीवन मुख्य रूप से खेती और मजदूरी पर टिका था। मनीषा बताती हैं कि एक समय ऐसा था जब बच्चों की पढ़ाई और घर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती हुआ करता था। लेकिन आज, सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन ने उनके संघर्ष को आत्मविश्वास में बदल दिया है।
दोहरी आय से मिला आर्थिक संबल
मनीषा पिछले दो वर्षों से ‘स्वच्छता दीदी’ के रूप में गांव को साफ-सुथरा रखने में अपना योगदान दे रही हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिमाह 1000 रुपए की आय प्राप्त होती है। सोने पर सुहागा तब हुआ जब प्रदेश सरकार की ‘महतारी वंदन योजना’ शुरू हुई। मनीषा कहती हैं, “महीने के एक हजार स्वच्छता कार्य से और एक हजार महतारी वंदन योजना से—इन दो हजार रुपयों ने मेरे घर की तस्वीर बदल दी है। अब मुझे बच्चों की कॉपी-किताब या छोटे खर्चों के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता।”
उज्ज्वला और स्व-सहायता समूह का साथ
आर्थिक सहायता के साथ-साथ मनीषा के जीवन में तकनीक और सामूहिकता ने भी प्रवेश किया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मिले मुफ्त गैस कनेक्शन ने उन्हें धुएं से मुक्ति दी और रसोई के काम को आसान बनाया। इसके अलावा, वे “जय मां बंजारी महिला स्व सहायता समूह” से जुड़कर अन्य महिलाओं के साथ मिलकर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने सराहा मनीषा का जज्बा
चौपाल के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मनीषा की बातों को बड़े ध्यान से सुना। मनीषा ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ये योजनाएं केवल पैसे का हस्तांतरण नहीं हैं, बल्कि यह गरीब परिवारों को मिलने वाला वह सम्मान है जो उन्हें बेहतर भविष्य की उम्मीद देता है।
निष्कर्ष: सुशासन का दिख रहा असर
मनीषा मरकाम की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब सरकारी नीतियां सही नीयत के साथ धरातल पर उतरती हैं, तो वे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं। सरोधी की चौपाल यह संदेश दे गई कि सशक्त महिला ही सशक्त समाज और विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है।
रायपुर/ग्राम सरोधी 5 मई :
छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा आयोजित ‘सुशासन तिहार’ केवल सरकारी उपलब्धियों का लेखा-जोखा नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन में आ रहे बदलावों का गवाह भी बन रहा है। रायपुर जिले के ग्राम सरोधी में आयोजित मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की विशेष चौपाल में उस वक्त एक भावुक और प्रेरक पल आया, जब ‘स्वच्छता दीदी’ मनीषा मरकाम ने अपनी संघर्ष से सफलता तक की दास्तां साझा की।

सीमित संसाधनों से आत्मनिर्भरता का सफर
ग्राम सरोधी की निवासी श्रीमती मनीषा मरकाम एक साधारण पृष्ठभूमि से आती हैं। पति श्री रंजीत मरकाम और तीन बेटों के साथ उनका जीवन मुख्य रूप से खेती और मजदूरी पर टिका था। मनीषा बताती हैं कि एक समय ऐसा था जब बच्चों की पढ़ाई और घर की रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करना एक बड़ी चुनौती हुआ करता था। लेकिन आज, सरकारी योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन ने उनके संघर्ष को आत्मविश्वास में बदल दिया है।
दोहरी आय से मिला आर्थिक संबल
मनीषा पिछले दो वर्षों से ‘स्वच्छता दीदी’ के रूप में गांव को साफ-सुथरा रखने में अपना योगदान दे रही हैं। इस कार्य से उन्हें प्रतिमाह 1000 रुपए की आय प्राप्त होती है। सोने पर सुहागा तब हुआ जब प्रदेश सरकार की ‘महतारी वंदन योजना’ शुरू हुई। मनीषा कहती हैं, “महीने के एक हजार स्वच्छता कार्य से और एक हजार महतारी वंदन योजना से—इन दो हजार रुपयों ने मेरे घर की तस्वीर बदल दी है। अब मुझे बच्चों की कॉपी-किताब या छोटे खर्चों के लिए किसी के आगे हाथ नहीं फैलाना पड़ता।”
उज्ज्वला और स्व-सहायता समूह का साथ
आर्थिक सहायता के साथ-साथ मनीषा के जीवन में तकनीक और सामूहिकता ने भी प्रवेश किया है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत मिले मुफ्त गैस कनेक्शन ने उन्हें धुएं से मुक्ति दी और रसोई के काम को आसान बनाया। इसके अलावा, वे “जय मां बंजारी महिला स्व सहायता समूह” से जुड़कर अन्य महिलाओं के साथ मिलकर स्वरोजगार की दिशा में कदम बढ़ा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने सराहा मनीषा का जज्बा
चौपाल के दौरान मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने मनीषा की बातों को बड़े ध्यान से सुना। मनीषा ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि ये योजनाएं केवल पैसे का हस्तांतरण नहीं हैं, बल्कि यह गरीब परिवारों को मिलने वाला वह सम्मान है जो उन्हें बेहतर भविष्य की उम्मीद देता है।
मनीषा मरकाम की कहानी इस बात का जीवंत उदाहरण है कि जब सरकारी नीतियां सही नीयत के साथ धरातल पर उतरती हैं, तो वे समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचती हैं। सरोधी की चौपाल यह संदेश दे गई कि सशक्त महिला ही सशक्त समाज और विकसित छत्तीसगढ़ की नींव है।
