रायपुर/नारायणपुर, 07 मई 2026
छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़, जिसे दशकों तक इसके दुर्गम भूगोल और ‘अनजान’ रास्तों के कारण विकास की कतार में अंतिम माना जाता था, अब डिजिटल युग की नई इबारत लिख रहा है। नारायणपुर जिले के ओरछा विकासखंड स्थित सुदूर वनांचल ग्राम ताहकाडोंड में मोबाइल टावर की स्थापना के साथ ही सदियों से पसरा संचार का सन्नाटा टूट गया है। यह उपलब्धि केवल एक टावर की स्थापना नहीं, बल्कि घने जंगलों और ऊंचे पहाड़ों के बीच रहने वाले ग्रामीणों के लिए ‘डिजिटल आजादी’ का शंखनाद है।

पहाड़ों की मशक्कत से मिली मुक्ति
कुछ समय पहले तक ताहकाडोंड और आसपास के ग्रामीणों की स्थिति ऐसी थी कि उन्हें अपने परिजनों से दो मिनट बात करने के लिए भी मीलों दूर ऊंचे पहाड़ों या ऊंचे पेड़ों का सहारा लेना पड़ता था। नेटवर्क की तलाश में घंटों की चढ़ाई एक सामान्य दिनचर्या थी। लेकिन अब, गांव की चौपालों और घरों के आंगन में मोबाइल के नेटवर्क बार पूरे नजर आते हैं। अब ग्रामीण घर बैठे न केवल अपनों का हाल-चाल जान रहे हैं, बल्कि वीडियो कॉल के जरिए दुनिया को देख भी रहे हैं।

विकास की मुख्यधारा से सीधा जुड़ाव
मोबाइल टावर की स्थापना ने शासन की योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं की राह आसान कर दी है:
- शिक्षा: क्षेत्र के छात्र अब ऑनलाइन शिक्षण सामग्री और डिजिटल संसाधनों तक पहुंच पा रहे हैं।
- स्वास्थ्य: आपातकालीन स्थिति में एम्बुलेंस (108) या महतारी एक्सप्रेस को कॉल करना अब संभव हो गया है, जिससे कीमती जान बचाई जा सकेगी।
- बैंकिंग और सरकारी सेवा: डीबीटी (Direct Benefit Transfer) के संदेश अब सीधे ग्रामीणों के फोन पर पहुंच रहे हैं, जिससे उन्हें बैंक के चक्कर नहीं काटने पड़ते।
प्रशासन और तकनीक का साझा संकल्प
दुर्गम पहाड़ियों और घने जंगलों के बीच टावर के लिए भारी मशीनरी और सामग्री पहुंचाना एक बड़ी चुनौती थी। राज्य सरकार और जिला प्रशासन के दृढ़ संकल्प ने ‘नो सिग्नल’ वाले इस क्षेत्र को ‘फुल कनेक्टिविटी’ जोन में बदल दिया है। सुरक्षा बलों के सहयोग और तकनीकी टीम की मेहनत ने अबूझमाड़ के इस हिस्से में विकास का नया द्वार खोल दिया है।
ग्रामीणों में उत्साह की लहर
गांव के बुजुर्गों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि उनके जीते-जी ताहकाडोंड जैसी जगह पर मोबाइल की घंटी गूंजेगी। युवाओं के लिए यह तकनीक एक नए भविष्य की शुरुआत है, जहाँ वे कृषि, बाजार और शिक्षा की जानकारी उंगलियों पर पा सकेंगे।
ताहकाडोंड में आया यह बदलाव बस्तर की बदलती तस्वीर का जीवंत प्रमाण है। ‘अबूझ’ कहे जाने वाले इस अंचल का अब डिजिटल दुनिया से सीधा जुड़ना यह साफ करता है कि तकनीक जब इरादों के साथ मिलती है, तो वह दुर्गम से दुर्गम बाधा को पार कर विकास की नई राह बना लेती है।
