दहशत के गढ़ में देशभक्ति की गूंज: सुकमा में वॉलीबॉल खेलकर मुख्यधारा से जुड़े 113 सरेंडर नक्सली

विशेष संवाददाता, रायपुर
02 जून 2026.सुकमा में बंदूकों की जगह गूंज रहे भारत माता के नारे, वॉलीबॉल खेलकर मुख्यधारा से जुड़े 113 आत्मसमर्पित नक्सली

नक्सलवाद के दंश को पीछे छोड़ छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला अब बदलाव की एक नई और बेहद खूबसूरत इबारत लिख रहा है। जिला प्रशासन द्वारा संचालित जिला पुनर्वास केंद्र में रह रहे 113 आत्मसमर्पित युवाओं के जीवन में वास्तव में एक नया सवेरा आ चुका है। कभी जंगलों में भटकने और हाथों में घातक हथियार थामने वाले ये युवा अब न सिर्फ समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं, बल्कि पुनर्वास केंद्र के परिसर में पहली बार इनके द्वारा लगाए गए ‘भारत माता की जय’ के नारे सुकमा के बदलते और सुरक्षित होते भविष्य की गवाही दे रहे हैं।

अनुशासित दिनचर्या और शिक्षा पर जोर

पुनर्वास केंद्र में इन युवाओं की दिनचर्या अब पूरी तरह अनुशासित, सुरक्षित और रचनात्मक हो चुकी है। सुबह उठकर बागवानी (गार्डनिंग) और साफ-सफाई करने के बाद सभी युवा मिल-जुलकर नाश्ता और भोजन तैयार करते हैं। प्रशासन ने इनके बौद्धिक विकास के लिए दो विशेष शिक्षकों की नियुक्ति की है। ये शिक्षक इन्हें प्रतिदिन सुबह-शाम अक्षर ज्ञान, बुनियादी गणित और अंग्रेजी सिखा रहे हैं ताकि वे समाज के साथ कदम से कदम मिलाकर चल सकें।

एक ही छत के नीचे बन रहे सरकारी दस्तावेज

इन युवाओं को समाज का वैध और सम्मानित हिस्सा बनाने के लिए प्रशासन युद्धस्तर पर काम कर रहा है। कलेक्ट्रेट के ‘सिंगल विंडो रूम’ के माध्यम से इन सभी आत्मसमर्पितों के आधार कार्ड, राशन कार्ड, आयुष्मान कार्ड, श्रम कार्ड और वोटर आईडी जैसे महत्वपूर्ण शासकीय दस्तावेज प्राथमिकता के आधार पर बनाए जा रहे हैं। इसके साथ ही इन्हें भविष्य में आत्मनिर्भर बनाने के लिए विशेष कौशल प्रशिक्षण (स्किल ट्रेनिंग) भी दी जा रही है।

हथियार छोड़ थामी वॉलीबॉल, मैदान में बिखेरा जलवा

प्रशासन की इस मानवीय पहल का सबसे खूबसूरत रंग खेल और मनोरंजन के मैदान में देखने को मिल रहा है। छत्तीसगढ़ सरकार की मंशा के अनुरूप, जब इन पूर्व नक्सलियों से उनके मनोरंजन और खेल की पसंद पूछी गई, तो सबसे ज्यादा रुझान वॉलीबॉल के प्रति दिखा। इसके बाद प्रशासन ने केंद्र में खेल प्रतियोगिता की शुरुआत की, जिसमें युवक-युवतियों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

कभी अत्याधुनिक हथियार संभालने वाले इन हाथों में जब वॉलीबॉल आई, तो मैदान पर उनकी खेल प्रतिभा और किक देखकर हर कोई हैरान रह गया। ओयाम जोगा, वेको हुंगा और सोड़ी सोमड़ी जैसे युवा अब खेल के मैदान में अपना जौहर दिखाकर बेहद खुश और उत्साहित हैं।

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