छत्तीसगढ़ में ‘बीयर क्रांति’: अब मुंबई-बेंगलुरु की तर्ज पर मिलेगी ताजी ‘फ्लेवर्ड क्राफ्ट बीयर’

रायपुर 27 जून,

🔴 छत्तीसगढ़ में भी दिखेगा मुंबई-बेंगलुरु जैसा ट्रेंड: अब मिलेगी विभिन्न फ्लेवर्स वाली ‘फ्रेश क्राफ्ट बीयर’, सरकार ने ‘माइक्रो ब्रुअरी’ नीति को दी हरी झंडी

बड़ी खबर: ₹10 लाख होगी सालाना लाइसेंस फीस, होटल-टूरिज्म इंडस्ट्री को पंख लगने की उम्मीद; बिना प्रिजर्वेटिव्स के सीधे प्लांट से ग्लास में परोसी जाएगी ताजी बीयर
छत्तीसगढ़ के शौकीनों और होटल-रेस्टोरेंट (हॉस्पिटैलिटी) उद्योग से जुड़े कारोबारियों के लिए एक बड़ी और ऐतिहासिक खबर है। राज्य सरकार ने प्रदेश में पर्यटन, व्यापार और राजस्व को बढ़ावा देने के उद्देश्य से ‘माइक्रो ब्रुअरी’ (सीमित मात्रा में स्थानीय स्तर पर बीयर बनाने वाले संयंत्र) स्थापित करने के प्रस्ताव को आधिकारिक मंजूरी दे दी है। शासन के इस बड़े नीतिगत फैसले के बाद अब छत्तीसगढ़ में भी लोगों को लेमन, ऑरेंज, एप्पल, बेरी, व्हीट और हनी जैसे कई रसीले और अनोखे प्राकृतिक फ्लेवर्स वाली बिल्कुल ताजी ‘क्राफ्ट बीयर’ मिल सकेगी।

क्या है माइक्रो ब्रुअरी और क्यों खास है क्राफ्ट बीयर?

आम तौर पर मिलने वाली बोतलबंद या कैन बीयर को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए पास्चुरीकृत (Pasteurized) किया जाता है और उसमें केमिकल या प्रिजर्वेटिव्स मिलाए जाते हैं। इसके विपरीत, माइक्रो ब्रुअरी में एक पारदर्शी कांच के पीछे लाइव सेटअप लगाकर सीधे ताजी बीयर तैयार की जाती है। इसे उसी परिसर में मौजूद रेस्तरां (ब्रूपब) में सीधे ग्राहकों को सर्व किया जाता है। छोटे बैच में तैयार होने के कारण इसकी गुणवत्ता, स्वाद और ताजगी बेहद प्रीमियम होती है।

लाइसेंस और स्थापना के कड़े नियम: एक नजर में

सरकार ने इस नीति को पारदर्शी और सुरक्षित रखने के लिए कड़े मापदंड तय किए हैं:

  • ₹10 लाख सालाना फीस: माइक्रो ब्रुअरी का लाइसेंस प्राप्त करने के लिए संचालकों को प्रति वर्ष ₹10 लाख की लाइसेंस फीस चुकानी होगी।
  • 4,000 वर्गफीट की जगह अनिवार्य: इसे स्थापित करने के लिए संचालक के पास कम से कम 4,000 वर्ग फीट का व्यावसायिक परिसर होना आवश्यक है।
  • उत्पादन की तय सीमा: नई नीति के तहत एक माइक्रो ब्रुअरी प्रतिदिन अधिकतम 1,000 बल्क लीटर और सालभर में अधिकतम 3.65 लाख बल्क लीटर ही क्राफ्ट बीयर का उत्पादन कर सकेगी।
  • केमिकल और सिंथेटिक फ्लेवर पर बैन: इसमें केवल उच्च गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और प्राकृतिक सामग्रियों का उपयोग होगा; किसी भी प्रकार के कृत्रिम रंग या शुगर की अनुमति नहीं होगी।
  • अल्कोहल की मात्रा नियंत्रित: नियमों के अनुसार निर्मित क्राफ्ट बीयर में अल्कोहल की मात्रा 8% (या 14 प्रूफ स्प्रिंट) से अधिक नहीं होनी चाहिए।

सरकार, उद्योग और उपभोक्ताओं को तिहरा फायदा

क्षेत्रहोने वाला सीधा लाभ/असर
राजस्व (Revenue)लाइसेंस फीस और आबकारी ड्यूटी से राज्य सरकार के खजाने में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी।
रोजगार व व्यापारहोटल-रेस्टोरेंट और टूरिज्म सेक्टर में भारी तेजी आएगी तथा स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर खुलेंगे।
उपभोक्ता (Consumers)बीयर प्रेमियों को अब मेट्रो शहरों की तरह बिना केमिकल वाली फ्रेश और ऑन-डिमांड बीयर का नया विकल्प मिलेगा।

आबकारी विभाग रखेगा पैनी नजर

शासन के अधिकारियों के मुताबिक, माइक्रो ब्रुअरी में उत्पादन से लेकर उसकी बिक्री तक की पूरी निगरानी आबकारी विभाग द्वारा ऑनलाइन व ऑन-साइट की जाएगी। इसके साथ ही पर्यावरण प्रदूषण बोर्ड और स्थानीय निकायों से एनओसी (NOC) लेना भी संचालकों के लिए अनिवार्य रहेगा। कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा और गोवा जैसे राज्यों की तर्ज पर अब छत्तीसगढ़ भी देश के प्रीमियम लिक्विड कल्चर वाले राज्यों की सूची में शामिल होने जा रहा है।

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