साल्हेओना (रायगढ़) 27 जून । मेड़ के प्रयोग से चमकी किस्मत: धान उगाने वाला किसान अब अनानास से कमा रहा सालाना ₹2.5 लाख अतिरिक्त
छत्तीसगढ़ के किसान अब पारंपरिक फसलों के चक्रव्यूह से बाहर निकलकर खेती में नए प्रयोग कर रहे हैं। रायगढ़ जिले की सकरबोगा पंचायत के ग्राम साल्हेओना निवासी प्रगतिशील किसान अरुण कुमार सॉ ने इस बदलाव की एक नई इबारत लिखी है। कभी शौक व घरेलू उपयोग के लिए खेत की मेड़ पर लगाए गए अनानास के चंद पौधों ने आज उनकी तकदीर बदल दी है। अरुण सॉ अब दो एकड़ में व्यावसायिक स्तर पर अनानास की खेती कर हर साल 2 से 2.5 लाख रुपये की शानदार अतिरिक्त आय अर्जित कर रहे हैं।

शौक बना मुनाफे का जरिया
कृषि विविधीकरण की जीती-जागती मिसाल बन चुके अरुण सॉ पहले केवल धान और अन्य पारंपरिक फसलों की खेती पर निर्भर थे। वर्षों पहले उन्होंने अपने खेत की मेड़ पर अनानास के कुछ पौधे लगाए थे। अनुकूल जलवायु के कारण पौधों की बढ़वार और फलों का स्वाद बेहद लाजवाब रहा। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। फलों से निकलने वाले प्ररोहों (सकर्स) को अलग कर वे लगातार रोपाई का दायरा बढ़ाते गए। कृषि विभाग के अधिकारियों से मिले तकनीकी मार्गदर्शन ने उनके इस प्रयास को एक बड़े मुनाफे वाले व्यवसाय में बदल दिया।
‘मल्टीक्रॉपिंग’ का बेहतरीन मॉडल
अरुण सॉ ने अपने दो एकड़ के खेत का उपयोग बेहद चतुराई से किया है। उन्होंने खेत में आम और अमरूद के बगीचे के बीच खाली बची कतारों में अनानास के पौधे रोपे हैं। यह बहुफसली (मल्टीक्रॉपिंग) पद्धति का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जहां एक ही जमीन से किसान एक साथ कई फसलों का उत्पादन लेकर अपनी आय दोगुनी कर रहे हैं।
कम लागत, बंपर मुनाफा
अनानास की खेती की सबसे बड़ी खासियत इसकी बेहद कम उत्पादन लागत है।
- न्यूनतम सिंचाई: इस फसल को बहुत कम पानी की आवश्यकता होती है।
- कम खाद-कीटनाशक: रासायनिक खादों और महंगे कीटनाशकों पर खर्च न के बराबर होता है।
- सीधा मुनाफा: बाजार में इस फल की मांग सालभर बनी रहती है। अरुण के खेत का एक फल गुणवत्ता के आधार पर ₹40 से ₹80 तक में आसानी से बिक जाता है।
प्ररोहों (पौधों) की बिक्री से डबल कमाई
इस खेती में आम के आम और गुठलियों के दाम वाली कहावत सच साबित हो रही है। अरुण सॉ को केवल फलों से ही नहीं, बल्कि पौधों से निकलने वाले नए प्ररोहों (सकर्स) को बेचकर भी मोटी कमाई हो रही है। क्षेत्र के अन्य किसान भी उनसे ये पौधे खरीदकर अपने खेतों में लगा रहे हैं।
क्षेत्र के किसानों के लिए बने रोल मॉडल
अरुण कुमार सॉ की इस सफलता को देखकर रायगढ़ और आसपास के इलाकों में कृषि नवाचार की बयार चल पड़ी है। उन्हें देखकर कई अन्य किसानों ने भी पारंपरिक धान की खेती के साथ-साथ उद्यानिकी फसलों को अपनाना शुरू कर दिया है। अरुण सॉ आज छत्तीसगढ़ के उन प्रगतिशील किसानों की कतार में खड़े हैं, जो अपनी मेहनत और सूझबूझ से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई दिशा दे रहे हैं।
