​’सेवा सेतु’ से सुशासन का शंखनाद: छत्तीसगढ़ में ‘चक्कर बाबू’ राज खत्म, 7 दिन में घर आ रहे प्रमाण पत्र!

छत्तीसगढ़ में ‘डिजिटल क्रांति’: फाइलों की दौड़ थमी, 7 दिनों में घर आ रहे सरकारी प्रमाण पत्र

मुख्यमंत्री साय के ‘सेवा सेतु’ ने खत्म किया दफ्तरों का ‘चक्कर बाबू’; बिचौलियों का खेल बंद, समय और पैसे की सीधी बचत

रायपुर/कोरबा, 5 जुलाई 2026

छत्तीसगढ़ में अब सरकारी दफ्तरों की चौखट पर चप्पलें नहीं घिसनी पड़ेंगी और न ही “साहब कल आना” का पुराना बहाना चलेगा। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने ‘सेवा सेतु पोर्टल’ के जरिए प्रशासनिक व्यवस्था का पूरा ढर्रा ही बदल दिया है। डिजिटल गवर्नेंस और जीरो टॉलरेंस की नीति का नतीजा है कि जो प्रमाण पत्र कभी महीनों तक बाबू की टेबल पर धूल खाते थे, वे अब महज एक सप्ताह में सीधे नागरिकों के हाथ में पहुंच रहे हैं।

​यह पोर्टल प्रदेश में पारदर्शी, त्वरित और जवाबदेह शासन का सबसे बड़ा हथियार बनकर उभरा है।

ग्राउंड रिपोर्ट: सुदूर गाँव की निधि बनीं सुशासन की गवाह

​डिजिटल सुशासन का सबसे चमकदार चेहरा बनी हैं कोरबा जिले के वनांचल क्षेत्र पोड़ी उपरोड़ा की रहने वाली कुमारी निधि सेन। ग्रामीण परिवेश से आने वाली निधि को अपनी पढ़ाई और भविष्य के लिए ‘निवास प्रमाण पत्र’ की सख्त जरूरत थी। उन्होंने ग्राम सुतर्रा के लोक सेवा केंद्र से ‘सेवा सेतु पोर्टल’ पर लॉग-इन किया।

​आमतौर पर हफ़्तों लटकाए जाने वाले इस काम में न तो कोई सिफारिश लगी और न ही किसी बिचौलिये की जरूरत पड़ी। पटवारी की ऑनलाइन रिपोर्ट लगते ही, मात्र 7 दिनों के भीतर निधि का डिजिटल हस्ताक्षर युक्त निवास प्रमाण पत्र उनके हाथ में था।

“बिना भटके, बिना अटके मिला हक”

“पहले एक कागज के लिए कई बार बस का किराया फूंककर तहसील जाना पड़ता था। पूरा दिन खराब होता था सो अलग। सेवा सेतु ने हमें इस सिरदर्द से आजादी दे दी है। यह सरकार की आम आदमी के लिए सबसे बेहतरीन सोच है।”

कुमारी निधि सेन, ग्रामीण हितग्राही

विश्लेषण: ‘सेवा सेतु’ ने कैसे बदला सिस्टम का मिजाज?

  • ‘चक्कर बाबू’ से मुक्ति: अब नागरिक को दफ्तर जाने की जरूरत नहीं, बल्कि सेवा खुद चलकर नागरिक के घर (डिजिटल माध्यम से) आ रही है।
  • समय-सीमा का कड़ा पहरा: पोर्टल पर आवेदन दर्ज होते ही उल्टी गिनती शुरू हो जाती है। अधिकारियों को तय समय में काम निपटाना ही होगा, वरना जवाबदेही तय होगी।
  • भ्रष्टाचार के रास्ते बंद: पूरी प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप (Human Intervention) न्यूनतम होने से ‘लेन-देन’ और बिचौलियों का नेटवर्क पूरी तरह ध्वस्त हो गया है।
  • गाँव और शहर का भेद खत्म: जो सुविधा रायपुर के नागरिक को मिल रही है, वही सुविधा बस्तर और सरगुजा के सुदूर गांवों के नागरिकों को भी एक क्लिक पर सुलभ है।

मुख्यमंत्री का विजन: जनता का समय और सम्मान सर्वोपरि

​मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का साफ संदेश है—प्रशासन को शासक नहीं, सेवक बनना होगा। ‘सेवा सेतु पोर्टल’ इसी सोच को धरातल पर उतार रहा है। यह सिर्फ एक वेबसाइट नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ के नागरिकों के ‘इज्ज़ ऑफ लिविंग’ (जीने की सुगमता) का नया ढांचा है। सरकार की इस पहल ने प्रशासनिक दूरी को पाटकर जनता के भीतर सरकार के प्रति भरोसे को एक नए शिखर पर पहुंचा दिया है।

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