DRM दयानंद के विजन से बदला इंफ्रास्ट्रक्चर का भूगोल; सरोना में ‘मिशन 100%’ फतेह, बालोद में फरवरी 2026 तक पूरा होगा कायाकल्प
₹20 करोड़ की लागत से बदला मुसाफिरों का सफर: वर्ल्ड क्लास सुविधाएं, मॉल जैसा लुक और अभेद्य सुरक्षा से चमक उठे स्टेशन
[ सरोना स्टेशन: ₹13.57 करोड़ ] ═══════════════════════════════ [ बालोद स्टेशन: ₹6.37 करोड़ ]
(शत-प्रतिशत कार्य पूरी भव्यता से संपन्न) (तेजी से बढ़ रहे कदम, फरवरी 2026 तक लक्ष्य)
रायपुर, 11 जुलाई 2026:
छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए सफर का एक नया और स्वर्णिम अध्याय शुरू हो चुका है. भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी ‘अमृत भारत स्टेशन योजना’ के तहत दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) के रायपुर मंडल ने यात्री सुविधाओं का ऐसा ताना-बाना बुना है, जिसकी चमक अब जमीन पर साफ दिखने लगी है. मंडल रेल प्रबंधक (DRM) श्री दयानंद के कुशल मार्गदर्शन और रणनीतिक नेतृत्व में सरोना और बालोद रेलवे स्टेशनों को सिर्फ सुधारा नहीं गया है, बल्कि उन्हें भविष्य के ‘ग्लोबल स्टैंडर्ड’ के हिसाब से पुनर्जीवित कर दिया गया है.

सुरक्षा, संरक्षा और लक्जरी सुविधाओं को टॉप प्रायोरिटी पर रखकर किए गए इस कायाकल्प ने स्टेशनों की सूरत और सीरत दोनों बदल दी है.
## सरोना रेलवे स्टेशन: ₹13.57 करोड़ का मास्टरस्ट्रोक, सभी कार्य पूरी तरह मुकम्मल

सरोना स्टेशन पर विकास कार्यों ने रफ्तार का नया रिकॉर्ड बनाया है और यहाँ के सभी काम शत-प्रतिशत पूरे कर लिए गए हैं:
- भव्य प्रवेश द्वार और कॉनकोर्स: स्टेशन में एंट्री के लिए 2 नए शानदार गेट और यात्रियों के बैठने व ठहरने के लिए 95 वर्ग मीटर की आलीशान कॉनकोर्स बिल्डिंग तैयार हो चुकी है.

- आधुनिक फुट ओवर ब्रिज (FOB) व लिफ्ट: यात्रियों को एक से दूसरे प्लेटफार्म पर बिना किसी परेशानी के ले जाने के लिए आधुनिक एफओबी के साथ 2 हाई-स्पीड लिफ्ट इंस्टॉल कर चालू कर दी गई हैं.
- चमचमाते प्लेटफार्म और शेड: प्लेटफार्मों पर 2800 वर्ग मीटर की शानदार सरफेसिंग की गई है, साथ ही मौसम की मार से बचाने के लिए 7 नए चमचमाते कवर शेड लगाए गए हैं.

- ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर: 1912 वर्ग मीटर का बड़ा सर्कुलेटिंग एरिया, 550 वर्ग मीटर की चौड़ी पार्किंग, 189 नए आधुनिक फर्नीचर, 14 सीसीटीवी कैमरे, 4 पैसेंजर इंफॉर्मेशन सिस्टम और 10 KWp का सोलर पैनल स्टेशन की नई पहचान बन चुके हैं.
## बालोद रेलवे स्टेशन: ₹6.37 करोड़ से संवर रहा कल; फरवरी 2026 तक लक्ष्य

बालोद स्टेशन पर भी पुनर्विकास की बयार बह रही है. यहाँ बुनियादी ढांचे से जुड़े कई बड़े काम हो चुके हैं और बाकी को फरवरी 2026 तक पूरा करने का लक्ष्य है:
- मिशन फरवरी 2026 (अंतिम चरण में चल रहे कार्य): यात्रियों के लिए 340 वर्ग मीटर का विशाल कॉनकोर्स हॉल, 4236 वर्ग मीटर का भव्य सर्कुलेटिंग एरिया और प्लेटफार्मों पर 700 वर्ग मीटर का नया सरफेसिंग कार्य तेजी से चल रहा है. इसके साथ ही 70 वर्ग मीटर का आधुनिक वेटिंग हॉल, नया टॉयलेट ब्लॉक और 196 नए फर्नीचर्स भी जल्द ही स्थापित कर दिए जाएंगे.
- जो काम हो चुके हैं पूरे: गाड़ियों की सुगम आवाजाही के लिए 1200 वर्ग मीटर का पार्किंग एरिया, नए प्लेटफार्म शेल्टर, पर्यावरण अनुकूल 10 KWp क्षमता का सोलर पैनल और 2 सोलर लाइट मास्ट लगाने का काम पूरी तरह से पूरा हो चुका है.

## इस ‘अमृत कायाकल्प’ की 4 सबसे शानदार और दमदार बातें
1. मॉल जैसा फील, एयरपोर्ट जैसी स्पीड:
इन स्टेशनों के अंदर कदम रखते ही आपको किसी प्रीमियम मॉल जैसा लुक दिखाई देगा. दिशा-निर्देशों के लिए चमकीले साइनेज बोर्ड और ट्रेनों की सटीक लोकेशन बताने के लिए अत्याधुनिक कोच गाइडेंस डिस्प्ले सिस्टम लगाया गया है, ताकि मुसाफिरों को एक सेकंड के लिए भी भटकना न पड़े.
2. दिव्यांगजनों के लिए ‘संवेदनशीलता’ का सफर:
रेलवे ने दिव्यांग और बुजुर्ग सहयात्रियों के लिए अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं. स्टेशनों पर विशेष रैंप, कम ऊंचाई वाले स्पेशल टिकट काउंटर, आरक्षित मार्केड पार्किंग, ब्रेल लिपि आधारित स्टैंडर्ड टैक्सटाइल गाइड्स, अलग से दिव्यांग-अनुकूल टॉयलेट और कम ऊंचाई वाले ड्रिंकिंग वाटर बूथ बनाए गए हैं.
3. दीवारें गाएंगी छत्तीसगढ़ की गौरवगाथा:
स्टेशनों के सौंदर्यीकरण के लिए स्थानीय कला और संस्कृति को विशेष तरजीह दी गई है. बालोद स्टेशन पर 150 वर्ग मीटर और सरोना पर 50 वर्ग मीटर क्षेत्र में छत्तीसगढ़ की पारंपरिक लोक कला और संस्कृति की मनमोहक चित्रकारी उकेरी गई है, जो यात्रियों को मंत्रमुग्ध कर देगी.
4. ‘तीसरी आंख’ का अभेद्य पहरा:
सुरक्षा के मामले में कोई समझौता नहीं किया गया है. चप्पे-चप्पे की निगरानी के लिए सरोना में 14 और बालोद में 10 हाई-डेफिनिशन सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, जो सीधे कंट्रोल रूम से जुड़े हैं. इसके साथ ही आपातकालीन त्वरित सहायता प्रणाली को भी अपग्रेड किया गया है.
क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को लगेंगे विकास के पंख
रायपुर रेल मंडल द्वारा उठाए गए ये ऐतिहासिक कदम न केवल रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय विकास, पर्यटन और आर्थिक वृद्धि में भी एक गेम-चेंजर साबित होंगे. आधुनिक और भव्य रेलवे स्टेशनों की यह नई तस्वीर नए भारत की नई प्रगति की कहानी बयां कर रही है.
