- ऐतिहासिक फैसला: जगदलपुर में अंडरग्राउंड हुए बिजली के तार, अब बिना बाधा के दौड़ेगा भगवान जगन्नाथ का रथ
- मुख्यमंत्री निवास पहुंचे बस्तर के प्रतिनिधि, सीएम को सौंपा आमंत्रण; 16 जुलाई को निकलेगी भव्य रथयात्रा
खास खबर | रायपुर 11 जुलाई।
छत्तीसगढ़ की सबसे अनूठी सांस्कृतिक धरोहरों में से एक ‘बस्तर गोंचा महापर्व-2026’ इस बार इतिहास रचने जा रहा है। सदियों पुरानी इस परंपरा के साक्षी बनने के लिए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय को बस्तर से आए एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने भावभीना आमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री ने इस आमंत्रण को सहर्ष स्वीकार करते हुए पूरे बस्तर को महापर्व की बधाई दी। इस दौरान मुख्यमंत्री ने बस्तर की पारंपरिक ‘तुपकी’ (बांस की प्रतीकात्मक तोप) चलाकर भगवान श्री जगन्नाथ को सलामी दी, जिससे मुख्यमंत्री निवास बस्तर के पारंपरिक लोक-उत्साह से गूंज उठा।

जगदलपुर में अंडरग्राउंड केबलिंग: रथयात्रा के इतिहास का सबसे बड़ा सुधार
इस मुलाकात के दौरान बस्तर के प्रतिनिधिमंडल ने जगदलपुर शहर में बिजली के तारों को अंडरग्राउंड (भूमिगत) करने के सरकार के फैसले की जमकर सराहना की।
सुरक्षा और श्रद्धा का संगम
समाज के प्रमुखों ने कहा कि सालों से रथयात्रा के दौरान भगवान के ऊंचे रथों को बिजली के लटकते तारों से बचाना एक बड़ी चुनौती और खतरा होता था। मुख्यमंत्री के इस फैसले से न केवल शहर की सूरत बदली है, बल्कि अब बिना किसी डर और बाधा के महाप्रभु की रथयात्रा सुचारू रूप से संपन्न हो सकेगी।

29 जून से 25 जुलाई तक उत्सव, 16 को रथयात्रा
360 घर आरण्यक ब्राह्मण समाज के अध्यक्ष श्री वेदप्रकाश पाण्डे ने बताया कि समाज अपनी 619 वर्ष पुरानी गौरवशाली परंपरा का निर्वहन पूरी निष्ठा से कर रहा है। इस वर्ष यह महापर्व 29 जून से शुरू होकर 25 जुलाई 2026 तक चलेगा।
- मुख्य आकर्षण: महापर्व का सबसे बड़ा केंद्र बिंदु 16 जुलाई को होने वाली भगवान श्री 1008 जगन्नाथ महाप्रभु की भव्य रथयात्रा होगी।
- जनकपुरी प्रस्थान: जगन्नाथ मंदिर से निकलकर यह रथयात्रा सिरहासार भवन (जनकपुरी) पहुंचेगी, जहां भगवान पूरे राजकीय सम्मान के साथ विराजमान होंगे।
बस्तर के दिग्गज नेता रहे मौजूद
इस गरिमामयी अवसर पर वन मंत्री श्री केदार कश्यप, विधायक श्री किरण सिंह देव, महापर्व आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री मुक्तेश पाण्डे सहित बस्तर की संस्कृति और समाज से जुड़े कई वरिष्ठ पदाधिकारी उपस्थित थे।
क्या है ‘तुपकी’ परंपरा? क्यों है यह अनूठी?
बस्तर का गोंचा पर्व पूरे देश में इकलौता ऐसा उत्सव है जहां भगवान जगन्नाथ को बंदूकों या तोपों से नहीं, बल्कि बांस से बनी ‘तुपकी’ से प्रतीकात्मक सलामी दी जाती है। इसमें ‘मालकांगनी’ के छोटे फलों को बुलेट की तरह इस्तेमाल किया जाता है, जिससे ‘ठांय-ठांय’ की अनूठी आवाज निकलती है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने भी इसी तुपकी को चलाकर बस्तर की इस अद्भुत लोक-परंपरा का मान बढ़ाया।
