₹51,000 करोड़ का महा-निवेश: भारतीय रेलवे के नक्शे पर ‘ग्लोबल लॉजिस्टिक्स हब’ बनने की राह पर छत्तीसगढ़

10 साल में 24 गुना भारी बजटीय उछाल, चालू वित्तीय वर्ष के लिए रिकॉर्ड ₹7,470 करोड़ मंजूर; बस्तर से सरगुजा तक बिछ रहा विकास का मजबूत जाल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पीएम मोदी की ‘डबल इंजन’ सरकार ने दी बुलेट रफ्तार; जशपुर पहली बार जुड़ेगा रेल नेटवर्क से

विशेष संवाददाता, रायपुर 11 जुलाई ।

छत्तीसगढ़ की धरती पर बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास की एक ऐसी स्वर्णिम इबारत लिखी जा रही है, जो आने वाले दशकों में राज्य की अर्थव्यवस्था का चेहरा बदल देगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य का रेल नेटवर्क अब केवल यात्रियों और माल परिवहन का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की औद्योगिक क्रांति, ऊर्जा सुरक्षा और असीमित रोजगार का सबसे बड़ा ‘ग्रोथ इंजन’ बन चुका है। वर्तमान में राज्य में ₹51,000 करोड़ से अधिक की रेल परियोजनाओं पर युद्धस्तर पर काम चल रहा है, जो छत्तीसगढ़ के इतिहास का अब तक का सबसे विशाल और अभूतपूर्व पूंजीगत निवेश (Capital Investment) है।

​इस ऐतिहासिक परिवर्तन पर मुहर लगाते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार की नीतियों और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव की त्वरित पहलों के चलते आज छत्तीसगढ़ देश का सबसे बड़ा रेल एवं लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।

बजट में 2400% की ऐतिहासिक वृद्धि: केंद्र की प्राथमिकताओं में अव्वल छत्तीसगढ़

​आंकड़े गवाह हैं कि वर्ष 2014 से पहले के दौर में छत्तीसगढ़ को रेलवे विकास के लिए सालाना औसतन महज ₹300 करोड़ का बजट मिलता था। लेकिन बदलते वक्त के साथ, वर्ष 2026-27 के लिए यह राशि रिकॉर्ड ₹7,470 करोड़ तक पहुंच गई है। एक दशक के भीतर रेलवे बजट में 24 गुना (2400%) की यह ऐतिहासिक वृद्धि सीधे तौर पर यह साबित करती है कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के आर्थिक सामर्थ्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

“हमारा संकल्प समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है। मजबूत रेल नेटवर्क से उद्योगों की परिवहन लागत घटेगी, वैश्विक निवेश आकर्षित होगा, किसानों को बड़े बाजार मिलेंगे और युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।”

श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

161 साल के इतिहास पर भारी पड़े पिछले कुछ वर्ष

​छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क का विस्तार किस आक्रामक रफ्तार से हो रहा है, इसे इस तुलना से आसानी से समझा जा सकता है:

  • सवा सौ साल का सफर: देश में रेल की शुरुआत (1853) से लेकर 2014 तक, यानी करीब 161 वर्षों में छत्तीसगढ़ में सिर्फ 1,100 रूट किलोमीटर रेल नेटवर्क तैयार हो पाया था।
  • आधुनिक युग की रफ्तार: वर्तमान में राज्य का कुल रेल नेटवर्क 2,200 रूट किलोमीटर से अधिक करने का काम प्रगति पर है।
  • नेक्स्ट-जेन इंफ्रास्ट्रक्चर: लगभग 1,200 किलोमीटर नए रेल ट्रैक, शत-प्रतिशत (100%) रेल विद्युतीकरण, अत्याधुनिक ऑटोमैटिक सिग्नलिंग और मल्टी-ट्रैकिंग ने राज्य में रेल परिचालन की क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है।

बस्तर का कायाकल्प और जशपुर का ऐतिहासिक सपना सच

​दूरस्थ और आदिवासी अंचलों को आधुनिकता से जोड़ने के लिए मेगा प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारा जा रहा है:

  • रावघाट रेल परियोजना: दल्लीराजहरा से अंतागढ़ (77 किमी) तक यात्री ट्रेन की गूंज से वनांचल के हजारों ग्रामीण पहली बार रेल से जुड़े हैं। अब कोसरोण्डा से रावघाट तक का ट्रैक बिछाने का काम अंतिम दौर में है, जिसके पूरे होते ही रावघाट की समृद्ध लौह अयस्क खदानें सीधे भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से जुड़ जाएंगी।
  • पहली बार जशपुर में छुक-छुक: ‘धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा’ रेल परियोजना के जरिए जशपुर जिला इतिहास में पहली बार सीधे देश के रेल मानचित्र से जुड़ने जा रहा है।
  • गेम-चेंजर रेल कॉरिडोर: ₹8,741 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा 278 किलोमीटर लंबा ‘खरसिया-नवा रायपुर-परमालकसा’ रेल कॉरिडोर मुंबई-कोलकाता रूट का सबसे दमदार विकल्प बनेगा। यह हब छत्तीसगढ़ के उद्योगों की लॉजिस्टिक्स लागत में हर साल ₹2,520 करोड़ की भारी-भरकम बचत कराएगा।

भविष्य का छत्तीसगढ़: वर्ल्ड क्लास स्टेशन और आधुनिक पावर हब

₹51,000 करोड़ का महा-निवेश: भारतीय रेलवे के नक्शे पर ‘ग्लोबल लॉजिस्टिक्स हब’ बनने की राह पर छत्तीसगढ़

10 साल में 24 गुना भारी बजटीय उछाल, चालू वित्तीय वर्ष के लिए रिकॉर्ड ₹7,470 करोड़ मंजूर; बस्तर से सरगुजा तक बिछ रहा विकास का मजबूत जाल

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और पीएम मोदी की ‘डबल इंजन’ सरकार ने दी बुलेट रफ्तार; जशपुर पहली बार जुड़ेगा रेल नेटवर्क से

विशेष संवाददाता, रायपुर।

छत्तीसगढ़ की धरती पर बुनियादी ढांचे (Infrastructure) के विकास की एक ऐसी स्वर्णिम इबारत लिखी जा रही है, जो आने वाले दशकों में राज्य की अर्थव्यवस्था का चेहरा बदल देगी। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के दूरदर्शी नेतृत्व और प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में राज्य का रेल नेटवर्क अब केवल यात्रियों और माल परिवहन का जरिया नहीं रह गया है, बल्कि यह प्रदेश की औद्योगिक क्रांति, ऊर्जा सुरक्षा और असीमित रोजगार का सबसे बड़ा ‘ग्रोथ इंजन’ बन चुका है। वर्तमान में राज्य में ₹51,000 करोड़ से अधिक की रेल परियोजनाओं पर युद्धस्तर पर काम चल रहा है, जो छत्तीसगढ़ के इतिहास का अब तक का सबसे विशाल और अभूतपूर्व पूंजीगत निवेश (Capital Investment) है।

​इस ऐतिहासिक परिवर्तन पर मुहर लगाते हुए मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने कहा कि डबल इंजन सरकार की नीतियों और रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव की त्वरित पहलों के चलते आज छत्तीसगढ़ देश का सबसे बड़ा रेल एवं लॉजिस्टिक्स हब बनने की दिशा में कदम बढ़ा चुका है।

बजट में 2400% की ऐतिहासिक वृद्धि: केंद्र की प्राथमिकताओं में अव्वल छत्तीसगढ़

​आंकड़े गवाह हैं कि वर्ष 2014 से पहले के दौर में छत्तीसगढ़ को रेलवे विकास के लिए सालाना औसतन महज ₹300 करोड़ का बजट मिलता था। लेकिन बदलते वक्त के साथ, वर्ष 2026-27 के लिए यह राशि रिकॉर्ड ₹7,470 करोड़ तक पहुंच गई है। एक दशक के भीतर रेलवे बजट में 24 गुना (2400%) की यह ऐतिहासिक वृद्धि सीधे तौर पर यह साबित करती है कि केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ के आर्थिक सामर्थ्य को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

“हमारा संकल्प समाज के अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है। मजबूत रेल नेटवर्क से उद्योगों की परिवहन लागत घटेगी, वैश्विक निवेश आकर्षित होगा, किसानों को बड़े बाजार मिलेंगे और युवाओं के लिए रोजगार के लाखों नए अवसर पैदा होंगे।”

श्री विष्णु देव साय, मुख्यमंत्री, छत्तीसगढ़

161 साल के इतिहास पर भारी पड़े पिछले कुछ वर्ष

​छत्तीसगढ़ में रेल नेटवर्क का विस्तार किस आक्रामक रफ्तार से हो रहा है, इसे इस तुलना से आसानी से समझा जा सकता है:

  • सवा सौ साल का सफर: देश में रेल की शुरुआत (1853) से लेकर 2014 तक, यानी करीब 161 वर्षों में छत्तीसगढ़ में सिर्फ 1,100 रूट किलोमीटर रेल नेटवर्क तैयार हो पाया था।
  • आधुनिक युग की रफ्तार: वर्तमान में राज्य का कुल रेल नेटवर्क 2,200 रूट किलोमीटर से अधिक करने का काम प्रगति पर है।
  • नेक्स्ट-जेन इंफ्रास्ट्रक्चर: लगभग 1,200 किलोमीटर नए रेल ट्रैक, शत-प्रतिशत (100%) रेल विद्युतीकरण, अत्याधुनिक ऑटोमैटिक सिग्नलिंग और मल्टी-ट्रैकिंग ने राज्य में रेल परिचालन की क्षमता को कई गुना बढ़ा दिया है।

बस्तर का कायाकल्प और जशपुर का ऐतिहासिक सपना सच

​दूरस्थ और आदिवासी अंचलों को आधुनिकता से जोड़ने के लिए मेगा प्रोजेक्ट्स को धरातल पर उतारा जा रहा है:

  • रावघाट रेल परियोजना: दल्लीराजहरा से अंतागढ़ (77 किमी) तक यात्री ट्रेन की गूंज से वनांचल के हजारों ग्रामीण पहली बार रेल से जुड़े हैं। अब कोसरोण्डा से रावघाट तक का ट्रैक बिछाने का काम अंतिम दौर में है, जिसके पूरे होते ही रावघाट की समृद्ध लौह अयस्क खदानें सीधे भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) से जुड़ जाएंगी।
  • पहली बार जशपुर में छुक-छुक: ‘धरमजयगढ़-पत्थलगांव-लोहरदगा’ रेल परियोजना के जरिए जशपुर जिला इतिहास में पहली बार सीधे देश के रेल मानचित्र से जुड़ने जा रहा है।
  • गेम-चेंजर रेल कॉरिडोर: ₹8,741 करोड़ की लागत से तैयार हो रहा 278 किलोमीटर लंबा ‘खरसिया-नवा रायपुर-परमालकसा’ रेल कॉरिडोर मुंबई-कोलकाता रूट का सबसे दमदार विकल्प बनेगा। यह हब छत्तीसगढ़ के उद्योगों की लॉजिस्टिक्स लागत में हर साल ₹2,520 करोड़ की भारी-भरकम बचत कराएगा।

भविष्य का छत्तीसगढ़: वर्ल्ड क्लास स्टेशन और आधुनिक पावर हब

मेगा प्रोजेक्ट्स और सुविधाएंनिवेश राशिराज्य और देश को सीधा फायदा
अमृत भारत स्टेशन योजना₹1,680 करोड़प्रदेश के 32 रेलवे स्टेशनों का कायाकल्प, एयरपोर्ट जैसी आलीशान सुविधाएं मिलेंगी।
चांपा-कोर巴 तीसरी लाइन₹755 करोड़SECL और MCL की खदानों से कोयला परिवहन होगा सुपरफास्ट, देश के पावर प्लांट्स को निर्बाध बिजली।
रायपुर लोको शेड विस्तार₹175 करोड़250 इलेक्ट्रिक इंजनों के रख-रखाव (होमिंग) की हाई-टेक सुविधा, जिससे मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ेगी।
प्रीमियम ट्रेनेंवंदे भारत व अमृत भारतछत्तीसगढ़ के आम और खास नागरिकों के सफर को लग्जरी और समय-बचत प्रदान कर रही हैं।

संपादकीय टिप्पणी: पटरियों पर दौड़ती छत्तीसगढ़ की नई नियति

छत्तीसगढ़ के संदर्भ में जब भी विकास की बात होती है, तो अमूमन ध्यान यहां की खनिज संपदा और कृषि पर जाता है। लेकिन सच यह है कि बिना मजबूत परिवहन तंत्र के किसी भी राज्य की संपदा तिजोरी में बंद लॉकर की तरह होती है। वर्तमान सरकार द्वारा रेल इंफ्रास्ट्रक्चर में किया जा रहा ₹51,000 करोड़ का यह निवेश दरअसल छत्तीसगढ़ की आर्थिक तिजोरी की चाबी है।

वार्षिक रेल बजट का ₹300 करोड़ से बढ़कर ₹7,470 करोड़ होना केवल आंकड़ों की बाजीगरी नहीं, बल्कि एक नीतिगत बदलाव (Policy Shift) है। सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह है कि यह विकास केवल रायपुर, बिलासपुर या दुर्ग जैसे शहरी केंद्रों तक सीमित नहीं है। जब रेल की पटरियां जशपुर के जंगलों को पार करती हैं या बस्तर के अंदरूनी इलाकों में पहुंचती हैं, तो वे केवल ट्रेन नहीं ले जातीं, बल्कि अपने साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और मुख्यधारा से जुड़ाव का विश्वास लेकर आती हैं।

लॉजिस्टिक्स लागत में ₹2,520 करोड़ की अनुमानित वार्षिक बचत छत्तीसगढ़ के उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी। यह निवेश ‘विकसित भारत-2047’ के राष्ट्रीय विजन में छत्तीसगढ़ की भागीदारी को एक ‘कंट्रीब्यूटर’ (योगदानकर्ता) के रूप में स्थापित करता है। यह देखना सुखद है कि छत्तीसगढ़ अब केवल खनिज देने वाला राज्य नहीं, बल्कि देश का आधुनिक लॉजिस्टिक्स पावरहाउस बनने की दिशा में मजबूती से कदम बढ़ा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *