अन्नदाताओं के चेहरों पर लौटी मुस्कान: 182 हेक्टेयर सूखी धरती को मिलेगी संजीवनी, अंतिम छोर तक दौड़ेगा पानी
- दशकों का इंतजार खत्म: जर्जर नहरों और बांध की मरम्मत के लिए जल संसाधन विभाग ने जारी की प्रशासकीय स्वीकृति।
- बर्बाद नहीं होगी बूंद-बूंद: नहरों के सुदृढ़ीकरण से थमेगा पानी का रिसाव, रबी और खरीफ दोनों फसलों में होगी बंपर पैदावार।
- आर्थिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त: MCB जिले के विकासखण्ड खड़गंवा में कृषि क्रांति की नई इबारत लिखेगी यह परियोजना।

विशेष संवाददाता, रायपुर/मनेन्द्रगढ़ 14 जुलाई :
छत्तीसगढ़ के नवगठित मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (MCB) जिले के किसानों के लिए सावन के इस महीने में सरकार ने सौगातों की बड़ी बौछार की है। खड़गंवा विकासखण्ड के अंतर्गत वर्षों से उपेक्षा का दंश झेल रहे गज्जूपानी जलाशय के दिन अब बहुरने वाले हैं। राज्य शासन के जल संसाधन विभाग ने जलाशय के कायाकल्प और जीर्णाेद्धार के लिए 3 करोड़ 8 लाख रुपए की भारी-भरकम राशि को हरी झंडी दे दी है। सरकार के इस फैसले से न केवल क्षेत्र के जल संकट का समाधान होगा, बल्कि 182 हेक्टेयर कृषि भूमि की प्यास बुझेगी।
जर्जर बांध और रिसती नहरों से मिलेगी मुक्ति
गज्जूपानी जलाशय लंबे समय से विभागीय लापरवाही और रखरखाव के अभाव में अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहा था। बांध में दरारें और नहरों के जर्जर होने के कारण पानी खेतों तक पहुँचने से पहले ही रिसकर बर्बाद हो जाता था। सबसे ज्यादा मार अंतिम छोर (टेलर एंड) पर बैठे उन गरीब किसानों पर पड़ती थी, जिनके खेतों तक पानी की एक बूंद भी नहीं पहुंच पाती थी।
अब स्वीकृत हुई इस ३.०८ करोड़ की राशि से:
- मुख्य बांध की मरम्मत कर उसकी जल भराव क्षमता को बढ़ाया जाएगा।
- नहरों का नए सिरे से पक्कीकरण (Lining) और सुदृढ़ीकरण किया जाएगा।
- पानी की लीकेज पूरी तरह बंद होगी, जिससे टेलर एंड के अंतिम खेत तक पानी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
खरीफ और रबी में धान के साथ लहलहाएंगी दलहन-तिलहन की फसलें
जल संसाधन विभाग के अधिकारियों ने साफ किया है कि इस महत्वाकांक्षी योजना के सभी निर्माण कार्यों को कड़े दिशा-निर्देशों के साथ समय-सीमा (Time-limit) के भीतर पूरा किया जाएगा। इस कायाकल्प के बाद क्षेत्र के किसानों को अब मानसून के भरोसे नहीं बैठना पड़ेगा। खरीफ के साथ-साथ रबी सीजन में भी पर्याप्त पानी मिलेगा, जिससे किसान अब पारंपरिक फसलों के अलावा नकदी और दलहन-तिलहन फसलों की खेती कर सकेंगे। इससे स्थानीय कृषि उत्पादन में रिकॉर्ड बढ़ोतरी होगी और किसानों की आय दोगुनी करने के संकल्प को बल मिलेगा।
“यह महज जीर्णोद्धार नहीं, क्षेत्र की समृद्धि का नया अध्याय है”
“गज्जूपानी जलाशय के लिए राशि की स्वीकृति खड़गंवा के किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। लंबे समय से किसान इसके लिए संघर्ष कर रहे थे। अब जब खेतों को पर्याप्त पानी मिलेगा, तो क्षेत्र में खुशहाली आएगी और पलायन पर भी रोक लगेगी।”
— स्थानीय किसान संगठन एवं कृषि विशेषज्ञ
धरातल पर जल्द दिखेगा असर
प्रशासकीय स्वीकृति मिलने के बाद विभाग ने टेंडर (निविदा) की कागजी कार्रवाई तेज कर दी है। विभाग की कोशिश है कि बारिश का मौसम बीतते ही युद्ध स्तर पर निर्माण कार्य शुरू करा दिया जाए, ताकि आने वाले अगले कृषि सीजन तक जलाशय पूरी तरह बनकर तैयार हो सके। इस ऐतिहासिक फैसले के बाद से खड़गंवा क्षेत्र के चप्पे-चप्पे में जश्न का माहौल है और किसानों ने सरकार के इस कदम की सराहना की है।
