खेती छोटी, हौसला बड़ा: साय सरकार की योजना से जशपुर के कीना राम ने खाली खेत में उगाया ‘सोना’!

सीमित भूमि, असीमित हौसला: धान के बाद गेहूं की खेती से चमकी जशपुर के किसान कीना राम की किस्मत

रायपुर/जशपुर, 2 जुलाई 2026। सीमित भूमि, असीमित हौसला: धान के बाद गेहूं की खेती से चमकी जशपुर के किसान कीना राम की किस्मत
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में कृषि को लाभ का धंधा बनाने और किसानों की समृद्धि के लिए चलाए जा रहे अभियान जमीनी स्तर पर रंग लाने लगे हैं। कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ उठाकर राज्य के सुदूर वनांचल क्षेत्रों के किसान भी अब आधुनिक और बहु-फसली खेती की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं। इसका एक बेहद सफल और प्रेरणादायक उदाहरण जशपुर जिले के मनोरा विकासखंड के ग्राम सोगड़ा से सामने आया है, जहां सीमित संसाधनों के बावजूद एक छोटे किसान ने अपनी सूझबूझ से मिसाल कायम की है।

पारंपरिक खेती से आगे बढ़कर रबी में भी लहराई फसल

ग्राम सोगड़ा के निवासी किसान श्री कीना राम के पास कुल 0.800 हेक्टेयर कृषि भूमि है। कुछ समय पहले तक वे भी राज्य के अधिकांश पारंपरिक किसानों की तरह केवल खरीफ सीजन में ही धान की खेती करते थे। रबी का सीजन आते ही उनके खेत खाली (पड़ती) छूट जाते थे। इस वजह से न केवल उन्हें साल के कई महीने खाली बैठना पड़ता था, बल्कि खुद के खाने के लिए भी बाजार से महंगे दामों पर गेहूं खरीदना पड़ता था।

कृषि विभाग और एनएफएसएम (NFSM) योजना बनी मददगार

कीना राम की इस स्थिति में बदलाव तब आया जब वे कृषि विभाग के ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी के संपर्क में आए। अधिकारी के मार्गदर्शन में उन्होंने रबी सीजन का उपयोग करने का फैसला किया। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन (एनएफएसएम) योजना के तहत उन्हें कृषि विभाग द्वारा एक एकड़ भूमि के लिए उन्नत किस्म का गेहूं बीज पूरी तरह अनुदान (subsidy) पर उपलब्ध कराया गया।

जैविक खाद और वैज्ञानिक प्रबंधन से मिला बंपर उत्पादन

अनुदान पर बीज मिलने के बाद कीना राम ने कृषि वैज्ञानिकों की सलाह पर अपने खेत की अच्छे से तैयारी की। उन्होंने रासायनिक खादों पर निर्भरता कम करते हुए खेत में पर्याप्त मात्रा में गोबर की खाद का उपयोग किया। सही समय पर सिंचाई, उचित खरपतवार प्रबंधन और वैज्ञानिक तरीकों को अपनाने का बड़ा लाभ उन्हें मिला। फसल में कीट और रोगों का प्रकोप न के बराबर रहा, जिसके परिणामस्वरूप इस बार गेहूं का रिकॉर्ड और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त हुआ।

एक तीर से कई निशाने: खाद्य सुरक्षा के साथ आर्थिक मजबूती

किसान श्री कीना राम ने अपनी इस सफलता पर खुशी जाहिर करते हुए बताया, “अब मुझे परिवार के लिए बाजार से गेहूं खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती। घर के लिए उच्च गुणवत्ता का शुद्ध अनाज तो मिल ही रहा है, साथ ही अतिरिक्त उत्पादन को बाजार में बेचकर अच्छी नगद आय भी प्राप्त हो रही है।”

उन्होंने आगे कहा कि धान के बाद गेहूं की फसल लेने से उनके खाली समय और उपलब्ध संसाधनों (जैसे पानी और जमीन) का सबसे बेहतर उपयोग हो रहा है। इससे उनकी खेती अब घाटे का सौदा नहीं बल्कि बेहद लाभप्रद बन गई है। जमीन का पड़ती रहना भी हमेशा के लिए समाप्त हो गया है, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है।

अन्य किसानों के लिए बने रोल मॉडल, मुख्यमंत्री का जताया आभार

अपनी इस सफलता से उत्साहित होकर श्री कीना राम अब क्षेत्र के अन्य किसानों के लिए रोल मॉडल बन चुके हैं। उन्होंने जशपुर और प्रदेश के अन्य साथी किसानों से अपील की है कि वे खरीफ के बाद खेतों को खाली न छोड़ें। कम लागत और कम समय में बेहतर आमदनी के लिए रबी सीजन में गेहूं, दलहन (दालें) और तिलहन (तेल वाली फसलें) जरूर अपनाएं।

किसान कीना राम ने संकट के समय में सही राह दिखाने और लगातार सहयोग देने के लिए छत्तीसगढ़ शासन, मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय और कृषि विभाग के प्रति दिल से आभार व्यक्त किया है।

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