विष्णुदेव साय सरकार का मास्टरस्ट्रोक: अब जिला पंचायतें भी होंगी वित्तीय रूप से आत्मनिर्भर

रायपुर, 28 मई 2026: छत्तीसगढ़ की विष्णुदेव साय सरकार ने त्रिस्तरीय पंचायत व्यवस्था को वित्तीय रूप से अधिक सक्षम और मजबूत बनाने के लिए एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। राज्य शासन ने जिला पंचायतों को भी गौण खनिजों (Minor Minerals) से मिलने वाली रॉयल्टी राजस्व राशि में हिस्सेदारी देने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है

मुख्यमंत्री द्वारा राष्ट्रीय पंचायत दिवस पर की गई घोषणा के अमल में खनिज साधन विभाग ने इस राशि के वितरण का नया फॉर्मूला और स्लैब तय किया है।

रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष की मांग पर मुहर

हाल ही में राष्ट्रीय पंचायत दिवस के राज्य स्तरीय कार्यक्रम में रायपुर जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नवीन कुमार अग्रवाल ने मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय से जिला पंचायतों को गौण खनिज निधि का हिस्सा देने की मांग मंच से की थी। मुख्यमंत्री ने तत्परता दिखाते हुए मंच से ही इसकी घोषणा की थी, जिसे अब शासन ने अमलीजामा पहना दिया है।

राजस्व वितरण का नया स्लैब फॉर्मूला

नये आदेश के मुताबिक, गौण खनिजों से प्राप्त कुल राजस्व का 33 प्रतिशत हिस्सा पहले की तरह पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को मिलेगा। शेष 67 प्रतिशत राशि को तीनों स्तर की पंचायतों में इस तरह बांटा जाएगा:

  • ₹7.50 लाख तक: 100% राशि सीधे ग्राम पंचायत को मिलेगी।
  • ₹7.50 लाख से ₹10 लाख तक: ग्राम पंचायत को 80%, जनपद को 10% और जिला पंचायत को 10% हिस्सा।
  • ₹10 लाख से ₹25 लाख तक: ग्राम पंचायत को 70%, जनपद को 15% और जिला पंचायत को 15% हिस्सा।
  • ₹25 लाख से ₹50 लाख तक: ग्राम पंचायत को 60%, जनपद को 20% और जिला पंचायत को 20% हिस्सा।
  • ₹50 लाख से अधिक: ग्राम पंचायत को 50%, जनपद को 25% और जिला पंचायत को 25% हिस्सा।

बुनियादी सुविधाओं और खनन प्रभावित क्षेत्रों पर खर्च होगी राशि

राज्य सरकार ने इस रॉयल्टी राशि के उपयोग का दायरा भी बढ़ा दिया है। अब इस फंड का इस्तेमाल ग्रामीण क्षेत्रों में सीधे जनता से जुड़े विकास कार्यों में होगा।

  • विकास कार्य: स्कूलों-अस्पतालों में रनिंग वाटर (नल जल), सामुदायिक शौचालय, मुक्तिधाम, पहुंच मार्ग और वाचनालय (लाइब्रेरी) निर्माण।
  • विशेष प्रावधान: जिला पंचायतों को मिलने वाले हिस्से की राशि अनिवार्य रूप से उन क्षेत्रों में खर्च की जाएगी, जहां खनन (Mining) गतिविधियों के कारण पर्यावरण या जनजीवन पर विपरीत असर पड़ रहा है।

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